BJP के सर्वे से हलचल, 128 विधायकों के टिकट कटने के आसार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में छह महीने से भी कम समय बचा है और सत्ता में लगातार तीसरी बार वापसी की कोशिश में जुटी भारतीय जनता पार्टी ने अपनी संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों से सबक लेते हुए पार्टी ने प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर एक गोपनीय और बहुस्तरीय आंतरिक सर्वे कराया है। सर्वे के जो आंकड़े सामने आए हैं, उसने सत्ता और संगठन के गलियारों में हलचल मचा दी है।
सर्वे में 125 से 128 विधायकों के खिलाफ नाराजगी
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, गोपनीय आंतरिक सर्वे रिपोर्ट में प्रदेश के करीब 125 से 128 मौजूदा विधायकों के खिलाफ उनके अपने ही निर्वाचन क्षेत्रों में भारी सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इनकंबेंसी) दर्ज की गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर संगठन करीब 128 सीटों पर मौजूदा विधायकों के टिकट काटने या नए चेहरों को उतारने का मन बना रहा है। पश्चिम यूपी से लेकर पूर्वांचल तक कई मंत्रियों और कद्दावर विधायकों के नाम भी इस ‘रेड लिस्ट’ में शामिल बताए जा रहे हैं।
क्षेत्रवार टिकट कटने के संभावित आंकड़े
भाजपा ने उत्तर प्रदेश को संगठनात्मक दृष्टि से जिन छह क्षेत्रों में बांटा है, वहां सर्वे के आधार पर टिकटों में बड़े फेरबदल के संकेत मिले हैं:
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पश्चिम क्षेत्र (कुल 71 सीटें): 23 से 25 विधायकों के टिकट कटने के आसार हैं।
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ब्रज क्षेत्र (कुल 65 सीटें): 24 से 26 सीटों पर नए प्रत्याशी उतारे जा सकते हैं।
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अवध क्षेत्र (कुल 82 सीटें): 26 से 28 विधायकों का पत्ता कटने के संकेत हैं।
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कानपुर क्षेत्र (कुल 52 सीटें): 22 से 24 मौजूदा विधायकों की जगह नए चेहरों पर दांव लग सकता है।
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काशी क्षेत्र (कुल 72 सीटें): 19 से 21 सीटों पर बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
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गोरखपुर क्षेत्र (कुल 62 सीटें): 18 से 22 विधायकों के टिकट काटे जा सकते हैं।
हैट्रिक की चुनौती और 2022 का जनादेश
योगी आदित्यनाथ सरकार के सामने लगातार तीसरी बार पूर्ण बहुमत हासिल करने की चुनौती है। 1985 के बाद 2022 का चुनाव पहला मौका था जब किसी सत्तारूढ़ पार्टी और मुख्यमंत्री ने पूरे बहुमत के साथ लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में 403 सदस्यीय सदन में एनडीए को 273 सीटें मिली थीं, जिसमें अकेले भाजपा ने 255 सीटें जीतकर 41.29% वोट हासिल किए थे। सहयोगी दलों में अपना दल (सोनेलाल) को 12 और निषाद पार्टी को 6 सीटें मिली थीं।
सपा-कांग्रेस की घेराबंदी और गठबंधन के नए समीकरण
विपक्षी खेमे में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन 2024 के लोकसभा नतीजों के बाद पूरे उत्साह में नजर आ रहा है। अखिलेश यादव ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के सामाजिक फॉर्मूले को धार देने में लगे हैं, तो वहीं कांग्रेस दलित और मुस्लिम मतदाताओं को लामबंद करने की रणनीति पर काम कर रही है।
एनडीए गठबंधन में इस बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश से राष्ट्रीय लोकदल (RLD) भी शामिल है, जिसके चलते सीटों के बंटवारे का तालमेल बिठाना भाजपा नेतृत्व के लिए अहम परीक्षा होगी।
