9/11 के 25 साल: न्यूयॉर्क के मुस्लिमों ने कैसे बनाई नई पहचान?

11 सितंबर 2001 को अमेरिका के इतिहास का सबसे भीषण आतंकी हमला हुआ था। आतंकियों द्वारा अगवा किए गए विमानों ने न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर सहित कई जगहों पर हमला किया, जिसमें करीब 3000 लोगों की जान चली गई। इस हमले के बाद न्यूयॉर्क में रहने वाले मुस्लिमों को डर, शक और भारी नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा। लेकिन आज, 25 साल बाद, न्यूयॉर्क की तस्वीर काफी बदल चुकी है। शहर को अपना पहला मुस्लिम मेयर मिल चुका है, टाइम्स स्क्वायर पर सार्वजनिक रूप से नमाज पढ़ी जाती है और अमेरिका की सबसे बड़ी मस्जिद भी यहीं बन रही है। आखिर दहशत के उस दौर के बाद मुस्लिम समुदाय ने अपनी जगह कैसे वापस पाई?
असद डंडिया की कहानी: मुखबिरी से लेकर इतिहासकार बनने तक
पाकिस्तानी मूल के असद डंडिया की उम्र 9/11 के हमले के वक्त महज 8 साल थी। हमले के बाद जब वह 19 साल के हुए, तब इस्लामी कट्टरपंथ का पता लगाने के नाम पर न्यूयॉर्क पुलिस के एक मुखबिर ने उनका दोस्त बनकर उनके परिवार पर निगरानी रखी। बाद में इस निगरानी मुहिम की भारी आलोचना हुई थी।
आज 33 वर्षीय डंडिया एक इतिहासकार हैं और न्यूयॉर्क के मुस्लिम इलाकों में वॉकिंग टूर आयोजित करते हैं। उनका कहना है, “9/11 के 25 साल बाद भी हम उस घटना का दुख मनाते हैं, लेकिन हम यह भी समझते हैं कि उस हमले के लिए मैं जिम्मेदार नहीं हूं। मैं भी उतना ही न्यूयॉर्क का हिस्सा हूं, जितना कोई और।”
2001 के बाद मुस्लिमों पर क्या गुजरी?
हमलों के तुरंत बाद अमेरिका में ‘इस्लामोफोबिया’ (इस्लाम के प्रति नफरत) चरम पर पहुंच गया था। सार्वजनिक स्थानों पर मुस्लिमों के साथ बदसलूकी और मारपीट आम हो गई थी। डर के मारे कई महिलाओं ने हिजाब पहनना छोड़ दिया था। अमेरिकी सरकार ने निगरानी के नाम पर हजारों मुस्लिम पुरुषों और लड़कों को अपना नाम दर्ज कराने पर मजबूर किया, जिसके चलते कई लोगों को देश से डिपोर्ट कर दिया गया।
अब बदल रही है न्यूयॉर्क की तस्वीर
आज न्यूयॉर्क शहर की करीब 9 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। 2001 के बाद से शहर में 100 से अधिक नई मस्जिदें बन चुकी हैं और जल्द ही अमेरिका की सबसे बड़ी मस्जिद भी यहां बनकर तैयार होने वाली है।
राजनीतिक स्तर पर भी मुस्लिम समुदाय मजबूत हुआ है। जोहरान ममदानी शहर के पहले मुस्लिम मेयर बने हैं, जिन्होंने कुरान पर हाथ रखकर अपने पद की शपथ ली। वह अमेरिका की डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट राजनीति का एक बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं।
नफरत आज भी है मौजूद
हालात बदलने के बावजूद शहर में नफरत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। मार्च में एक दक्षिणपंथी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने मेयर ममदानी के घर के बाहर ‘न्यूयॉर्क शहर पर इस्लामी कब्जा रोको’ के नाम से प्रदर्शन किया। वहीं, 9/11 के वक्त न्यूयॉर्क के मेयर रहे रूडी जूलियानी ने ममदानी के मेमोरियल कार्यक्रम में शामिल होने को अपमानजनक बताया था। इसके जवाब में ममदानी ने कहा कि वह किसी जुबानी जंग में नहीं उलझेंगे, बल्कि उनका पूरा ध्यान पीड़ितों और राहतकर्मियों के सम्मान पर है।
