मिलेगा मुफ्त AI? लेकिन नौकरियों और डीपफेक अपराधों ने बढ़ाई चिंता

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Lee Chang (North East Expert)
Lee Chang

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते खतरों को लेकर दुनिया भर में चिंताएं जताई जा रही हैं। यहां तक कि ‘गॉडफादर ऑफ AI’ जेफ्री हिंटन और एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई जैसे दिग्गज इसके बेकाबू विकास पर लगाम लगाने की मांग कर चुके हैं। लेकिन इन सबके उलट, दक्षिण कोरिया ने AI की दौड़ में एक्सीलरेटर दबाने का फैसला किया है।

राष्ट्रपति ली जे-म्युंग (Lee Jae Myung) की ‘AI for All’ पहल के तहत, सरकार अपने हर नागरिक को मुफ्त AI एक्सेस देने की तैयारी कर रही है। हालांकि, इस महत्वकांक्षी योजना के साथ ही ऑटोमेशन से नौकरियों के खत्म होने, शिक्षा पर पड़ते असर और डीपफेक जैसे साइबर अपराधों का खतरा भी गहराने लगा है।

क्या है ‘AI for All’ और सरकार का प्लान?

दक्षिण कोरिया का लक्ष्य अमेरिका और चीन के साथ दुनिया की शीर्ष तीन AI महाशक्तियों में शामिल होना है। सियोल के विज्ञान और आईसीटी मंत्रालय के अनुसार, इस पहल का मकसद तकनीकी बाधाओं को कम करना है ताकि AI का लाभ सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित न रहे।

  • सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए 10 ट्रिलियन वॉन (करीब 7.3 अरब डॉलर) का AI बजट रखा है और 2027 तक इसके रोलआउट के लिए अतिरिक्त 250 अरब वॉन आवंटित किए हैं।

  • इसी महीने इसका बीटा (Beta) वर्जन लॉन्च किया जाएगा। इसमें एसके टेलीकॉम (SK Telecom), केटी (KT) और काकाओ (Kakao) द्वारा विकसित जनरल-परपज चैटबॉट्स तक असीमित और मुफ्त पहुंच मिलेगी। इसके लिए सरकार ने कंपनियों को सैकड़ों अत्याधुनिक Nvidia B200 चिप्स दिए हैं।

  • अगले साल से इसे एक स्थायी सार्वजनिक सुविधा के रूप में सरकारी सिस्टम से जोड़ दिया जाएगा। इसके बाद नागरिक AI के जरिए डॉक्टर की अपॉइंटमेंट लेने, टैक्स सलाह और घर खोजने जैसे काम कर सकेंगे।

विदेशी निर्भरता और साइबर सुरक्षा की चिंता

दक्षिण कोरिया की लगभग 5.16 करोड़ आबादी में से करीब दो-तिहाई लोग नियमित रूप से AI का इस्तेमाल करते हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इनमें से 2.34 करोड़ लोग ओपनएआई (ChatGPT), 84.5 लाख गूगल (Gemini) और 24.1 लाख लोग एंथ्रोपिक (Claude) के सक्रिय यूजर्स हैं।

मंत्रालय का मानना है कि विदेशी AI सेवाओं की उपलब्धता किसी भी समय विदेशी सरकारों या कंपनियों के फैसलों से सीमित हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए, विज्ञान और आईसीटी मंत्री बे क्यूंग-हून ने इस साल के अंत तक देश का अपना साइबर-सुरक्षा केंद्रित AI मॉडल विकसित करने की योजना पेश की है। इसके अलावा, जनवरी में लागू हुए ‘AI बेसिक एक्ट’ और नवगठित ‘AI सेफ्टी इंस्टीट्यूट’ के जरिए सरकार इसकी निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित कर रही है।

नौकरियों पर मंडराता खतरा और युवाओं का मोहभंग

एक तरफ सरकार इसे घटती वर्कफोर्स के समाधान के रूप में देख रही है, तो दूसरी तरफ युवाओं के लिए यह तकनीक एक बड़ा खतरा बन गई है। कोरिया के केंद्रीय बैंक के अनुसार, जून 2022 से इस साल जून के बीच 15 से 29 वर्ष के 2,85,000 युवाओं ने रोजगार गंवाया है। इनमें से 94 प्रतिशत नौकरियां आईटी सेवा, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और पब्लिशिंग जैसे क्षेत्रों में गई हैं, जिन पर ऑटोमेशन का सबसे ज्यादा असर है।

‘कोरिया डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट’ का अनुमान है कि अगले एक दशक में AI हर साल लगभग 2,56,000 नौकरियां खत्म कर सकता है। सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी में लॉ के प्रोफेसर को हक-सू कहते हैं, “शुरुआत में माना जा रहा था कि कम पढ़े-लिखे लोगों की नौकरियां जाएंगी, लेकिन अब एंट्री-लेवल और जूनियर प्रोफेशनल्स की नौकरियां सबसे ज्यादा खतरे में हैं।”

निजी क्षेत्र में छंटनी के डर से युवा अब सैन्य सेवा और सरकारी नौकरियों की ओर भाग रहे हैं। सियोल की एक परीक्षा अकादमी में सेना और पुलिस की तैयारी करने वाले छात्रों की संख्या में पिछले साल के मुकाबले 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

डीपफेक अपराधों में भारी इजाफा

रोजगार के अलावा, AI के आपराधिक इस्तेमाल ने दक्षिण कोरियाई पुलिस की नींद उड़ा दी है। 2020 के कुख्यात ‘Nth रूम’ कांड के बाद देश ने अपने डीपफेक कानूनों को सख्त किया है। अब ऐसे मामलों में 7 साल तक की जेल या 50 मिलियन वॉन का जुर्माना हो सकता है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल कोरिया के हालिया फोरम में पेश आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल पुलिस ने डीपफेक से जुड़े 1,553 मामले दर्ज किए, जो कुल साइबर-सेक्स अपराधों का 35 प्रतिशत हैं। इस साल की पहली छमाही में पुलिस ने 419 संदिग्ध पकड़े हैं। डिजिटल यौन अपराधों की जांच करने वाली टीम की निदेशक वोन यून-जी का कहना है कि पुलिस को सिर्फ तकनीक के भरोसे रहने के बजाय अपनी जांच क्षमताओं को और अधिक विशेषज्ञ बनाना होगा।