ईरान के हमलों से अमेरिकी ठिकानों को भारी नुकसान, तस्वीरों में दिखी तबाही

ईरान के जवाबी हमलों के बाद खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को पहुंचे भारी नुकसान की नई तस्वीरें सामने आई हैं। इन तस्वीरों में कुवैत और सऊदी अरब के ठिकानों पर एयरफील्ड, बंकर और महत्वपूर्ण सैन्य ढांचों की तबाही देखी जा सकती है। हाल ही में पेंटागन के महानिरीक्षक (Inspector General) की रिपोर्ट और विभिन्न अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स ने भी इस बात की पुष्टि की है कि इन हमलों से अमेरिका को भारी रणनीतिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
कुवैत और सऊदी अरब के ठिकानों पर व्यापक तबाही
नई सामने आई तस्वीरों में कुवैत के बेस पर गंभीर नुकसान के संकेत मिलते हैं। तस्वीरों में सैन्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए बनाए गए एक मजबूत बंकर पर सीधा ड्रोन हमला देखा जा सकता है, जो हमलों के दौरान सैनिकों को आश्रय देने के लिए डिज़ाइन किया गया था। इसके अलावा, बेस का एयरफील्ड पूरी तरह तबाह होने की बात सामने आई है और कभी काम करने वाली कई इमारतें मलबे में तब्दील हो गई हैं।
अमेरिकी बलों से प्राप्त तस्वीरों और वीडियो में कुवैत के कैंप आरिफजान (Camp Arifjan) सहित तीन सैन्य ठिकानों और सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस (Prince Sultan Air Base) पर इमारतों व विमानों को भारी क्षति पहुंचने की पुष्टि हुई है।
270 मिलियन डॉलर का निगरानी विमान क्षतिग्रस्त
सऊदी अरब स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस से जुड़ी एक तस्वीर में ई-3 सेंट्री (E-3 Sentry) निगरानी विमान क्षतिग्रस्त अवस्था में दिखाई दे रहा है। लगभग 270 मिलियन डॉलर की कीमत वाले इस विमान को मार्च के अंत में नुकसान पहुंचा था। खतरे को देखते हुए बेस से कुछ अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को सुरक्षित स्थानों पर भी भेजा गया।
एक वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य कर्मी ने इस नुकसान को ‘गंभीर’ बताते हुए दावा किया कि प्रभावित ठिकानों के पुनर्निर्माण में कई दशकों का समय लग सकता है। उन्होंने ठिकानों पर लगातार हो रहे ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमलों की जानकारी सार्वजनिक न करने और पारदर्शिता की कमी के लिए पेंटागन की आलोचना भी की।
पेंटागन की रिपोर्ट और युद्ध की भारी कीमत
पेंटागन ने अब तक कुवैत, बहरीन, कतर, यूएई, सऊदी अरब, इराक, ओमान और जॉर्डन में अपने ठिकानों को हुए नुकसान का कोई विस्तृत सार्वजनिक आकलन जारी नहीं किया है। हालांकि, सोमवार को जारी पेंटागन के महानिरीक्षक की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि “सैकड़ों इमारतों और ढांचों” को नुकसान पहुंचा है।
इस सरकारी निगरानी संस्था ने युद्ध की अब तक की लागत 33 अरब डॉलर आंकी है, जबकि गैर-पक्षपाती ‘कांग्रेशनल बजट ऑफिस’ (CBO) के अनुसार यह खर्च 38 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।
पेंटागन के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध के बाद से अब तक 18 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और 824 घायल हुए हैं। सबसे घातक हमला युद्ध के दूसरे दिन कुवैत के पोर्ट शुएबा (Port Shuaiba) में हुआ था, जहां छह अमेरिकी सैनिकों की जान चली गई थी। अमेरिकी युद्ध सचिव (War Secretary) पीट हेगसेथ ने बल की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए स्वीकार किया है कि कुछ ईरानी हथियार अमेरिकी रक्षा प्रणालियों को भेदने में सफल रहे हैं।
युद्ध की पृष्ठभूमि और ईरानी सैन्य प्रतिक्रिया
इस पूरे संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 40 दिन बाद 8 अप्रैल को ईरान के कड़े प्रतिरोध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर उसकी मजबूत पकड़ के चलते एक युद्धविराम (Ceasefire) पर सहमति बनी।
युद्ध को समाप्त करने के लिए 17 जून को ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे। लेकिन आरोप है कि इस समझौते का उल्लंघन करते हुए अमेरिका ने जुलाई में ईरान पर कई घातक हवाई हमले किए और देश की नौसैनिक नाकेबंदी कर दी। इसके जवाब में, ईरानी सशस्त्र बलों ने पश्चिम एशिया भर में रणनीतिक अमेरिकी ठिकानों पर भीषण हमले शुरू किए और होर्मुज जलडमरूमध्य को हर तरह के यातायात के लिए बंद करने की घोषणा कर दी।
