आर्मी कैंप में 12 राइफलें चोरी, पूर्व हवलदार की ‘फिल्मी’ साजिश से हड़कंप

हैदराबाद के सिकंदराबाद स्थित एक हाई-सिक्योरिटी सैन्य छावनी से हथियारों की चोरी का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। सदर्न कमांड की मिलिट्री इंटेलिजेंस (Military Intelligence) और तेलंगाना पुलिस के एक जॉइंट ऑपरेशन में खुलासा हुआ है कि सेना से निकाले गए एक पूर्व हवलदार ने किसी हॉलीवुड फिल्म की तरह इस वारदात को अंजाम दिया। उसने बोलारम स्थित 20 मद्रास रेजिमेंट की आर्मरी (शस्त्रागार) का ताला तोड़कर एके (AK) असॉल्ट राइफल और इंसास (INSAS) समेत 12 खतरनाक हथियार और गोला-बारूद पार कर दिए।
पूरी बटालियन थी पोखरण में, पूर्व हवलदार ने उठाया फायदा
आरोपी हवलदार को 30 जून को नौकरी से निकाल दिया गया था। जांच के मुताबिक, उसने 29 और 30 अगस्त (शनिवार-रविवार) की रात को इस वारदात को अंजाम दिया।
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सुनियोजित साजिश: आरोपी को अच्छी तरह पता था कि कमांडिंग ऑफिसर सहित पूरी बटालियन फील्ड फायरिंग के लिए पोखरण गई हुई है। उसने वीकेंड का समय इसलिए चुना क्योंकि उसे मालूम था कि 48 घंटे तक आर्मरी के स्टॉक की कोई जांच नहीं होगी।
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झाड़ियों में छिपाए हथियार: आरोपी एक एक्टिवा स्कूटी पर सवार होकर छावनी में घुसा। उसने आर्मरी का ताला तोड़ा और उसी रेजिमेंट का सदस्य होने का दिखावा करते हुए 12 हथियारों को निकालकर बाहर घनी झाड़ियों में छिपा दिया।
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जमीन में गाड़े: अगली सुबह उसने सुराग मिटाने के लिए उन हथियारों को अपनी ब्रेजा कार में लादा और नगरकुरनूल जिले के उदिलीला गांव के पास ले जाकर उन्हें जमीन में गाड़ दिया।
कैसे पकड़ा गया आरोपी?
31 अगस्त को हथियारों की गिनती के दौरान चोरी का खुलासा हुआ, जिसके बाद 1 सितंबर को एफआईआर दर्ज की गई। 70 से ज्यादा संदिग्धों से पूछताछ के बाद जब कोई सुराग नहीं मिला, तो जांच एजेंसियों ने हाल ही में रिटायर और निकाले गए कर्मचारियों पर फोकस किया। मोबाइल टावर लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल फुटप्रिंट्स की मदद से आरोपी पूर्व हवलदार की पहचान कर ली गई।
पूछताछ में उसने जुर्म कबूल करते हुए कहा कि कमांडिंग ऑफिसर ने उसे तीन साल का सर्विस एक्सटेंशन नहीं दिया था, जिससे नाराज होकर उसने बदले की भावना से यह चोरी की।
अंदरूनी मिलीभगत का शक, आतंकी साजिश का अंदेशा
हालांकि, जांच अधिकारी आरोपी की इस ‘बदले की थ्योरी’ पर यकीन नहीं कर रहे हैं।
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अंदरूनी मदद: जांचकर्ताओं का मानना है कि अंदरूनी मदद के बिना कोई भी रिटायर्ड कर्मचारी स्कूटी पर आकर 12 राइफलों के साथ हाई-सिक्योरिटी एरिया से आसानी से बाहर नहीं निकल सकता।
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अधिकारी जांच के घेरे में: सेना के छह से सात वर्किंग अधिकारी अब जांच के दायरे में हैं और तीन लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है।
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देश-विरोधी तत्वों का कनेक्शन: सुरक्षा एजेंसियों को गहरा शक है कि इतनी बड़ी संख्या में हथियारों की चोरी किसी निजी रंजिश के लिए नहीं की गई, बल्कि इसके पीछे इन हथियारों को देश-विरोधी और आतंकी तत्वों को सौंपने की एक बहुत बड़ी और खतरनाक साजिश थी।
सभी चोरी किए गए हथियार बरामद कर लिए गए हैं, लेकिन मिलिट्री इंटेलिजेंस और तेलंगाना पुलिस की संयुक्त जांच अभी भी जारी है।
