संभल में 2027 का सियासी टेस्ट, 2012 से सपा का कब्जा; जानें पूरा गणित

Sambhal
साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

उत्तर प्रदेश की राजनीति में पश्चिम यूपी की सियासी फिजा तय करने वाली संभल विधानसभा सीट (विधानसभा संख्या 33) को राजनीतिक दलों के लिए एक लिटमस टेस्ट माना जाता है। पूरे देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान रखने वाले संभल में 2012 से लगातार समाजवादी पार्टी जीत दर्ज करती आ रही है। सपा के इकबाल महमूद 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में यहां से लगातार विधायक चुने गए हैं। क्षेत्र के चुनावी इतिहास और हालिया आंकड़ों पर नजर डालें तो इस सीट पर मुख्य तौर पर मुस्लिम और दलित (SC) मतदाताओं का दबदबा है, जिसके चलते अधिकांश दल यहां मुस्लिम प्रत्याशियों पर ही दांव लगाते हैं।

2022 का चुनावी परिणाम: सपा की एकतरफा जीत

साल 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को छोड़कर सभी प्रमुख दलों ने संभल सीट से मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। सपा से इकबाल महमूद, बसपा से शकील अहमद और कांग्रेस से निदा अहमद प्रत्याशी थीं, जबकि बीजेपी ने राजेश सिंघल को टिकट दिया था।

चुनाव नतीजों में समाजवादी पार्टी के इकबाल महमूद ने 1,07,073 (43.73%) वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उन्होंने बीजेपी के राजेश सिंघल को 41,697 वोटों के अंतर से हराया। राजेश सिंघल को 65,376 (26.7%) वोट मिले। दोनों प्रमुख दलों के बीच 17.03 प्रतिशत वोटों का अंतर रहा। इस चुनाव में बसपा को 18.15% वोट शेयर के साथ 44,443 वोट मिले, जो एक मजबूत प्रदर्शन था। वहीं, एआईएमआईएम के प्रत्याशी मुशीर खान ने 8.77% वोट शेयर के साथ 21,470 वोट हासिल किए। कांग्रेस की निदा अहमद महज 2,256 वोटों पर सिमट गईं।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, 2022 में सपा को मुस्लिम और यादव वोट के गठजोड़ ने बड़े अंतर से जीत दिलाई। दूसरी ओर, सपा-आरएलडी गठबंधन के बावजूद जाट मतदाता सपा के बजाय बीजेपी के साथ गए। बीजेपी को गैर-यादव ओबीसी (सैनी, जाट, प्रजापति, पाल, कश्यप) के साथ-साथ वैश्य, पंजाबी, क्षत्रिय और ब्राह्मण समाज का एकतरफा वोट मिला। बसपा को मुख्य रूप से एससी समाज का वोट मिला, लेकिन मुस्लिम मतदाताओं का बहुत छोटा हिस्सा ही उसके पक्ष में गया।

2024 लोकसभा चुनाव: सपा के वोट बैंक में भारी इजाफा

2022 से 2024 के बीच उत्तर प्रदेश में गठबंधन और सियासी समीकरणों में बदलाव हुआ। सपा-कांग्रेस साथ आए, जबकि आरएलडी ने एनडीए का दामन थाम लिया। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान संभल विधानसभा क्षेत्र के आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां समाजवादी पार्टी की पकड़ और मजबूत हुई है।

लोकसभा चुनाव में संभल विधानसभा क्षेत्र से सपा के जियाउर्रहमान को 1,43,950 वोट मिले। वहीं बीजेपी के परमेश्वर लाल सैनी को 65,459 और बसपा को 20,312 वोट हासिल हुए। इस तरह सपा ने संभल विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी पर 78,491 वोटों की भारी बढ़त बनाई, जो 2022 की तुलना में लगभग दोगुनी है।

आंकड़े बताते हैं कि 2024 में मुस्लिम वोट पूरी तरह से सपा के पक्ष में एकजुट हो गया। 2022 में जो करीब 36 हजार मुस्लिम वोट ओवैसी की पार्टी (21 हजार) और बसपा (15 हजार) में बंटा था, वह 2024 में सीधे सपा के खाते में जुड़ गया। दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी को 2022 की तरह ही 2024 में भी अपने कोर हिंदू वोट बैंक के लगभग 65 हजार वोट ही मिले।

मतदाता सूची में बड़ा उलटफेर (SIR 2026)

संभल विधानसभा सीट पर मतदाताओं की संख्या में हाल ही में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 2024 के लोकसभा चुनाव के समय इस सीट पर 3,73,790 मतदाता थे। हालांकि, 2026 में हुए एसआईआर (SIR) के बाद यहां मतदाताओं की संख्या घटकर 3,32,674 रह गई है। यानी 41,116 मतदाता कम हुए हैं। बूथ स्तर पर मजबूती से काम करने वाले राजनीतिक दलों के लिए यह आकलन का विषय है कि किस दल के समर्थक मतदाताओं के वोट इस सूची से कम हुए हैं।

संभल सीट का जातीय समीकरण

संभल विधानसभा सीट मूल रूप से मुस्लिम और एससी बाहुल्य है। यहां के अनुमानित जातीय समीकरण इस प्रकार हैं:

  • मुस्लिम: 2 लाख

  • एससी: 44 हजार

  • सैनी: 25 हजार

  • वैश्य: 11 हजार

  • जाट: 10 हजार

  • क्षत्रिय: 8 हजार

  • पाल: 7 हजार

  • ब्राह्मण: 7 हजार

  • यादव: 7 हजार

  • कश्यप: 5 हजार

  • प्रजापति: 5 हजार

इस क्षेत्र में ओबीसी वोटों की कुल संख्या 60 हजार और सामान्य वर्ग के मतदाताओं की संख्या करीब 30 हजार के आसपास है।

आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर संभल सीट पर वर्तमान में समाजवादी पार्टी का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी अपने कोर वोट बैंक को पिछले कई चुनावों से लगातार एकजुट रखने में सफल रही है।