मस्जिद के नीचे मिला 20 फीट गहरा कुआं, 250 साल पुराना होने का अनुमान

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में हाल ही में ढहाई गई अवैध मस्जिद के मलबे के नीचे से एक 20 फीट गहरा कुआं निकला है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम ने सोमवार (7 सितंबर) को मौके पर पहुंचकर इस ढांचे का मुआयना किया। ईंटों की बनावट और निर्माण तकनीक के आधार पर एएसआई के अधिकारियों का शुरुआती अनुमान है कि यह कुआं करीब 200 से 250 साल पुराना हो सकता है।
लखौरी ईंटों और चूना-सुर्खी का इस्तेमाल
लखनऊ से सहारनपुर पहुंची ASI टीम के असिस्टेंट आर्कियोलॉजिकल ऑफिसर मनोज कुमार यादव ने ढांचे की जांच की। उनके मुताबिक, कुएं का निर्माण लखौरी ईंटों और चूना-सुर्खी से किया गया है, जो उत्तर-मध्यकालीन वास्तुकला की विशेषता है। इस तरह की निर्माण सामग्री पहले के दौर की इमारतों में आम थी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि कुएं के अंदर मौजूद मलबे के कारण पूरी तस्वीर साफ नहीं है। इसके ऐतिहासिक संबंध और सटीक उम्र का पता लगाने के लिए और गहराई से जांच की जरूरत होगी।
शाहजहां के दौर या मंदिर होने की अटकलें
मलबे के नीचे कुआं मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। चर्चा है कि इस ढांचे का संबंध मुगल काल (विशेषकर शाहजहां के दौर) से हो सकता है या यह अतीत में किसी मंदिर का हिस्सा रहा होगा। हालांकि, एएसआई अधिकारियों ने पर्याप्त पुरातात्विक सबूतों के बिना किसी भी ऐतिहासिक निष्कर्ष पर पहुंचने से आगाह किया है।
डिप्टी सीएम और बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “चूंकि मामला कोर्ट में है, इसलिए इस पर टिप्पणी करना सही नहीं होगा। हम उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
वहीं, यूपी सरकार के मंत्री नरेंद्र कश्यप ने विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव को मस्जिद गिराए जाने पर सवाल उठाने से पहले वहां मिली स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उस कुएं को पाटकर उसके ऊपर जबरन मस्जिद बनाई गई थी।” उन्होंने दावा किया कि पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए ही ढांचे को गिराया गया है, इसलिए अब इस पर सवाल नहीं उठने चाहिए।
