सहारनपुर शहर में क्या बदला, क्यों बढ़ी BJP की चिंता? 2027 का गणित समझें

उत्तर प्रदेश की चुनावी हवा का रुख अक्सर सहारनपुर से तय होता आया है। राज्य में कई चुनावों के पहले चरण की शुरुआत इसी क्षेत्र से होती है। व्यापार और सियासी मिजाज के लिए मशहूर सहारनपुर शहर विधानसभा सीट (संख्या 3) हमेशा से हाई-प्रोफाइल रही है। वर्तमान में इस सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राजीव गुंबर विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव के वोटिंग पैटर्न ने इस सीट के सियासी समीकरणों को बेहद दिलचस्प बना दिया है।
मतदाता सूची में बड़ा फेरबदल, 61 हजार वोटर घटे
सहारनपुर शहर में 2026 के एसआईआर (SIR) के बाद कुल मतदाताओं की संख्या 3,90,735 दर्ज की गई है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव के वक्त यहां मतदाताओं की संख्या 4,52,509 थी। एसआईआर के बाद इस विधानसभा क्षेत्र में 61,774 मतदाता कम हुए हैं। मतदाता सूची में आई इस भारी कमी का सीधा असर किस राजनीतिक दल (भाजपा या समाजवादी पार्टी) के वोट बैंक पर पड़ेगा, यह स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।
2022 में भाजपा की जीत और सपा से सीधी टक्कर
2022 के विधानसभा चुनाव में सहारनपुर शहर सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच रहा। भाजपा के राजीव गुंबर ने 1,43,195 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। सपा के संजय गर्ग 1,35,761 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे। भाजपा ने यह सीट 7,434 वोटों के अंतर से जीती थी।
इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के उम्मीदवार मनीष 10 हजार का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके और उन्हें 8,776 वोट मिले। कांग्रेस की सुखविंदर कौर महज 2,256 वोटों पर सिमट गई थीं।
2024 के लोकसभा चुनाव में पलटा गेम
महज दो साल के भीतर 2024 के लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा क्षेत्र के वोटिंग पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिला। सहारनपुर शहर सीट के आंकड़ों के अनुसार, सपा-कांग्रेस गठबंधन (इमरान मसूद) को 1,34,949 वोट मिले। भाजपा-आरएलडी गठबंधन (राघव लखनपाल) को 1,29,933 वोट प्राप्त हुए।
इस तरह 2022 में भाजपा के गढ़ रही इस सीट पर सपा-कांग्रेस गठबंधन ने 5,016 वोटों की बढ़त हासिल कर ली। दूसरी तरफ, बसपा के माजिद अली को मात्र 7,122 वोट मिले, जो दर्शाता है कि पार्टी अपने मूल कैडर वोट को भी सहेजने में विफल रही।
जातीय समीकरण: मुस्लिम और पंजाबी तय करते हैं हार-जीत
सहारनपुर शहर सीट मुस्लिम और पंजाबी बाहुल्य है। यहां सामान्य वर्ग के मतदाता भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। अनुमानित जातीय आंकड़ों के अनुसार:
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मुस्लिम: 1.5 लाख
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पंजाबी: 80 हजार
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वैश्य: 30 हजार
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ब्राह्मण: 25 हजार
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एससी (SC): 20 हजार
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सैनी: 15 हजार
इसके अलावा कश्यप (9 हजार), जाट (8 हजार), क्षत्रिय (8 हजार), गुर्जर (7 हजार), प्रजापति (6 हजार), त्यागी (5 हजार), यादव (3 हजार) और पाल (2 हजार) मतदाता भी मौजूद हैं।
पूरे सहारनपुर जिले में यह एकमात्र ऐसी सीट है जहां अनुसूचित जाति (SC) के मतदाताओं की संख्या काफी कम है। शहरी सीट होने के कारण भाजपा का पलड़ा पारंपरिक रूप से भारी रहा है, लेकिन 2024 के झटके और पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग के नए ध्रुवीकरण के बाद दोनों गठबंधनों के बीच कड़ी टक्कर तय मानी जा रही है। स्थानीय प्रत्याशी का चयन ही इस सीट पर अंतिम नतीजे की रूपरेखा तय करेगा।
