जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर ट्रस्ट के CEO, करगिल- ऑपरेशन सिंदूर कनेक्शन है

Jitendra Mishra
गौरव त्रिपाठी, रेजिडेंट एडिटर यूपी
गौरव त्रिपाठी, रेजिडेंट एडिटर यूपी

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के प्रशासनिक प्रबंधन को नई दिशा देने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। भारतीय वायुसेना के पूर्व दिग्गज अधिकारी और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अहम कमान संभालने वाले रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। दशकों तक देश की सुरक्षा और सामरिक मोर्चे पर अपनी सेवाएं देने के बाद अब वे अयोध्या में राम मंदिर के महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यों का नेतृत्व करेंगे।

वायुसेना के शीर्ष पदों पर रहा शानदार सफर

जितेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर रणनीतिक और प्रशासनिक उपलब्धियों से भरा रहा है। वायुसेना में रहते हुए उन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (AOC-in-C) के अहम पद पर अपनी सेवाएं दीं।

रक्षा तंत्र के भीतर उनकी गहरी समझ को देखते हुए उन्हें इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) का डिप्टी चीफ भी बनाया गया था। इसके अलावा, उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में ही डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइजेशन और ट्रेनिंग के डिप्टी चीफ की महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई है।

करगिल युद्ध से लेकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तक का अनुभव

युद्ध के मैदान और सैन्य ऑपरेशन्स में उनके पास ग्राउंड लेवल का सीधा अनुभव है। सैन्य ऑपरेशन्स के दौरान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में वे वेस्टर्न कमांड का नेतृत्व कर चुके हैं। इससे पहले करगिल युद्ध के समय जब भारतीय वायुसेना ने दुश्मन के खिलाफ अपने ऑपरेशन्स तेज किए थे, तब जितेंद्र मिश्रा एक स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर मिराज लड़ाकू विमानों की टीम का एक प्रमुख हिस्सा थे।

38 वर्षों का अनुभव, 18 तरह के एयरक्राफ्ट और 3000 घंटे की उड़ान

जितेंद्र मिश्रा को 6 दिसंबर 1986 को एयर फोर्स एकेडमी से भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। अपने 38 साल से अधिक के लंबे सैन्य करियर में उन्होंने 3000 घंटे से ज्यादा की उड़ान भरी है। इस पूरे सेवाकाल में उन्हें 18 से ज्यादा तरह के फाइटर जेट, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और सैन्य हेलीकॉप्टर उड़ाने की विशेषज्ञता हासिल है।

भारत, अमेरिका और ब्रिटेन के प्रतिष्ठित संस्थानों से ली शिक्षा

एयर मार्शल मिश्रा की गिनती उन सैन्य अधिकारियों में होती है, जिनकी ट्रेनिंग देश-दुनिया के चुनिंदा और सबसे प्रतिष्ठित सैन्य संस्थानों में हुई है। वे नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) खड़कवासला और एयर फोर्स एकेडमी (डुंडीगल) के पूर्व छात्र रहे हैं।

भारत के अलावा उन्होंने अपनी पेशेवर ट्रेनिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का भी रुख किया। उन्होंने एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, अमेरिका के अलबामा स्थित एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज (मोंटगोमरी) और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से भी उच्च स्तरीय रक्षा और सामरिक शिक्षा हासिल की है।