प्रयागराज की 12 सीटों का सियासी समीकरण, 2022 से क्या बदला?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रयागराज (इलाहाबाद) एक बेहद अहम जिला माना जाता है। वर्तमान में यहां कुल 12 विधानसभा सीटें हैं, जो राज्य के चुनावी तापमान को मापने का बैरोमीटर रही हैं। इस जिले में शहरी और ग्रामीण दोनों तरह की राजनीति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। शहरी सीटों पर जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके संगठनात्मक नेटवर्क का मजबूत प्रभाव है, वहीं गंगा-यमुना की तलहटी में बसी ग्रामीण सीटों पर समाजवादी पार्टी (SP) और क्षेत्रीय दलों के बीच कड़ी टक्कर रहती है।
2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से यहां सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
2022 के नतीजे: 12 सीटों पर किसने मारी थी बाजी?
2022 के विधानसभा चुनाव में प्रयागराज की 12 सीटों में से BJP+ (NDA) ने 8 सीटें (7 BJP, 1 अपना दल) और समाजवादी पार्टी ने 4 सीटें जीती थीं।
| विधानसभा सीट | विजेता प्रत्याशी | पार्टी | जीत का अंतर (वोट) |
| फाफामऊ | गुरु प्रसाद मौर्य | BJP | 14,324 |
| सोरांव (SC) | गीता शास्त्री | SP | 5,590 |
| प्रतापपुर | विजमा यादव | SP | 10,956 |
| हंडिया | हाकिम लाल बिंद | SP | 3,543 |
| मेजा | संदीप सिंह | SP | 3,439 |
| करछना | पीयूष रंजन निषाद | BJP | 9,328 |
| इलाहाबाद पश्चिम | सिद्धार्थ नाथ सिंह | BJP | 29,933 |
| इलाहाबाद उत्तर | हर्षवर्धन बाजपेयी | BJP | 54,883 |
| बारा (SC) | वाचस्पति | अपना दल (S) | 12,524 |
| कोरांव (SC) | राजमणि कोल | BJP | 24,487 |
| इलाहाबाद दक्षिण | नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ | BJP | 26,182 |
(नोट: फूलपुर सीट पर 2024 में उपचुनाव हुआ था, इसलिए 2027 का समीकरण केवल 2022 के नतीजों से तय नहीं होगा।)
2027 के लिए प्रयागराज का सियासी गणित
जिले की चुनावी बिसात को 5 प्रमुख बिंदुओं से समझा जा सकता है:
1. BJP का अभेद्य शहरी किला:
इलाहाबाद उत्तर, दक्षिण और पश्चिम—इन तीनों शहरी सीटों पर BJP का प्रदर्शन एकतरफा रहा है। 2022 में उत्तर सीट पर हर्षवर्धन बाजपेयी ने 54 हजार से अधिक और पश्चिम में सिद्धार्थ नाथ सिंह ने करीब 30 हजार वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी।
2. ग्रामीण बेल्ट में सपा की पकड़:
समाजवादी पार्टी की ताकत ग्रामीण इलाकों में अधिक है। 2022 में सपा ने सोरांव, प्रतापपुर, हंडिया और मेजा जीती थीं। गंगा-यमुना के पार वाले इन क्षेत्रों में पिछड़ा और दलित प्रभाव स्पष्ट रूप से सपा के पक्ष में दिखा था।
3. PDA फॉर्मूला vs BJP का सामाजिक समीकरण:
2027 के लिए अखिलेश यादव की ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति प्रयागराज में खास असर डाल सकती है। सपा यादव-मुस्लिम के अलावा गैर-यादव OBC (विशेषकर पटेल-कुर्मी) और दलित वोटों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। यह रणनीति हंडिया, सोरांव और प्रतापपुर जैसी ग्रामीण सीटों पर अहम भूमिका निभाएगी।
4. BJP के लिए एंटी-इनकंबेंसी और अंदरूनी खींचतान:
शहरी मजबूती के बावजूद, ग्रामीण क्षेत्रों में BJP को एंटी-इनकंबेंसी और स्थानीय स्तर पर नेताओं की गुटबाजी का सामना करना पड़ सकता है।
5. अपना दल (S) की अहमियत:
बारा जैसी सुरक्षित सीटों पर BJP की सहयोगी अपना दल (S) का मजबूत सामाजिक आधार है। NDA गठबंधन के भीतर सीटों का बंटवारा और सहयोगियों का प्रदर्शन 12 सीटों के अंतिम नतीजों को प्रभावित करेगा।
कौन होगा किंगमेकर और क्या है पुराना ट्रेंड?
जिले में ब्राह्मण, पटेल (कुर्मी), और दलित मतदाता चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा युवा (Gen-Z) मतदाता भी जीत-हार का अंतर तय कर सकते हैं।
प्रयागराज को लेकर एक पुराना और दिलचस्प ट्रेंड यह रहा है कि 2007, 2012 और 2017 में जिस भी पार्टी या गठबंधन ने जिले में सबसे ज्यादा सीटें जीतीं, लखनऊ में उसी की सरकार बनी। 2022 में भी BJP गठबंधन ने 8 सीटें जीतकर इस ट्रेंड को बरकरार रखा था।
2027 की लड़ाई: BJP (NDA) के सामने चुनौती अपनी 8 सीटों को बचाने और फूलपुर उपचुनाव के बाद के समीकरणों को साधने की है। वहीं, सपा की रणनीति अपनी 4 सीटों से आगे बढ़कर ग्रामीण और अर्ध-शहरी सीटों पर सेंध लगाने की होगी।

