अयोध्या की 5 विधानसभा सीटें: 22 के नतीजे और 25 के बाद बदला गणित

राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के बाद वैश्विक स्तर पर चर्चा के केंद्र में आई अयोध्या चुनावी राजनीति के मैदान में भी उत्तर प्रदेश के सबसे संवेदनशील और चर्चित जिलों में शामिल है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही जिले में सियासी हलचल तेज हो चुकी है। 2024 के लोकसभा चुनाव और फिर 2025 के मिल्कीपुर उपचुनाव के नतीजों ने यहां के समीकरणों को एक नया मोड़ दिया है।
अयोध्या (पूर्व में फैजाबाद) जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें आती हैं: अयोध्या (सदर), मिल्कीपुर (SC), बीकापुर, रुदौली और गोसाईगंज। इनमें से चार सीटें फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं, जबकि गोसाईगंज सीट प्रशासनिक रूप से मोहनलालगंज तहसील से जुड़ी है।
अयोध्या जिले की 5 विधानसभा सीटों का चुनावी रिपोर्ट कार्ड
| विधानसभा सीट | श्रेणी | 2022 का परिणाम (विजेता) | पार्टी | जीत का अंतर | प्रमुख स्थिति / वर्तमान अपडेट |
| अयोध्या (सदर) | सामान्य | वेद प्रकाश गुप्ता | BJP | ~20,000 वोट | सपा के तेज नारायण पांडेय को हराया; भाजपा का पारंपरिक गढ़ |
| मिल्कीपुर | अनुसूचित जाति (SC) |
अवधेश प्रसाद (2022) चंद्रभानु पासवान (2025) |
SP BJP |
— 61,710 वोट |
2024 में अवधेश प्रसाद सांसद बने; फरवरी 2025 उपचुनाव में भाजपा जीती |
| बीकापुर | सामान्य | अमित सिंह चौहान | BJP | ~5,500 वोट | सपा के फिरोज खान से करीबी मुकाबला रहा |
| रुदौली | सामान्य | रामचंद्र यादव | BJP | ~40,000 वोट | सपा के आनंद सेन को बड़े अंतर से शिकस्त दी |
| गोसाईगंज | सामान्य | अभय सिंह | SP | ~13,000 वोट | भाजपा की आरती तिवारी को हराया; बाहुबली वर्चस्व की सीट |
2024 का झटका और 2025 के मिल्कीपुर उपचुनाव से भाजपा की वापसी
अयोध्या की राजनीति में सबसे बड़ा उलटफेर 2024 के लोकसभा चुनाव में देखने को मिला था, जब राम मंदिर के उद्घाटन के कुछ ही महीनों बाद फैजाबाद संसदीय सीट से सपा के अवधेश प्रसाद ने भाजपा उम्मीदवार को हराकर देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं।
हालांकि, सांसद चुने जाने के बाद जब अवधेश प्रसाद ने मिल्कीपुर विधानसभा सीट से इस्तीफा दिया, तो फरवरी 2025 में हुए उपचुनाव ने समीकरण फिर बदल दिए। सपा ने अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को प्रत्याशी बनाया, लेकिन भाजपा के चंद्रभानु पासवान ने उन्हें 61,710 वोटों के भारी अंतर से हराकर सीट भाजपा की झोली में डाल दी। इस जीत ने जिले में भाजपा कार्यकर्ताओं में नया उत्साह फूंका, जबकि सपा 2027 में अपनी खोई जमीन वापस पाने की रणनीति बना रही है।
जातीय ताना-बाना और जनसांख्यिकी समीकरण
2011 की जनगणना के अनुसार, जिले की आबादी करीब 24.71 लाख है। यहां का लिंगानुपात 962 (प्रति हजार पुरुष) और साक्षरता दर लगभग 69% है। धार्मिक आधार पर करीब 85% हिंदू और 15% मुस्लिम आबादी है। इसके अलावा, करीब 22-23% अनुसूचित जाति (दलित) आबादी कई सीटों पर निर्णायक साबित होती है।
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अयोध्या (सदर): सामान्य वर्ग और वैश्य मतदाताओं का मजबूत प्रभाव है। साथ ही ब्राह्मण और मुस्लिम मतदाता भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं।
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मिल्कीपुर (SC): पासी और अन्य अनुसूचित जाति वर्ग सबसे बड़ा समूह है। इनके साथ यादव और मुस्लिम मतदाताओं का गठबंधन चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय या आमने-सामने का बनाता है।
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बीकापुर: ठाकुर, ब्राह्मण और मुस्लिम मतदाताओं के बीच संतुलन ही किसी प्रत्याशी की जीत तय करता है।
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रुदौली: मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी खासी आबादी के साथ-साथ यादव और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का साझा प्रभाव रहता है।
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गोसाईगंज: क्षत्रिय और ओबीसी समुदायों के साथ-साथ निषाद और दलित मतदाताओं की संख्या यहां परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभाती है।
2027 में दलों के सामने चुनौतियां
1991 के राम मंदिर आंदोलन के बाद से अयोध्या की राजनीति भाजपा के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन बीते दशकों में सपा और बसपा ने गोसाईगंज और मिल्कीपुर जैसी सीटों पर मजबूत पकड़ बनाकर मुकाबले को लगातार खुला रखा है। 2027 के चुनाव में भाजपा अपनी 2022 की बढ़त और 2025 के उपचुनाव की लय को बनाए रखने की कोशिश करेगी, वहीं समाजवादी पार्टी अपने ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए ग्रामीण और आरक्षित इलाकों में दोबारा सेंध लगाने के प्रयास में जुटी है।

