फिरोजाबाद की 5 सीटों पर 27 का रण, मुलायम परिवार के गढ़ में क्या बदला?

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गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

उत्तर प्रदेश की राजनीति में चूड़ियों और कांच उद्योग के लिए मशहूर फिरोजाबाद (Firozabad) जिला अपनी एक अलग पहचान रखता है। राजनीतिक नजरिए से यह वही इलाका है, जिसका समाजवादी पार्टी (SP) के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के परिवार से बेहद गहरा नाता रहा है। हर चुनाव में यहां ‘यादव वोट बैंक’ की चर्चा सबसे ज्यादा होती है।

आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर फिरोजाबाद में सियासी हलचल अभी से तेज हो गई है। जिले में कुल 5 विधानसभा सीटें हैं—टूंडला (सुरक्षित), जसराना, फिरोजाबाद (सदर), शिकोहाबाद और सिरसागंज। आइए समझते हैं इन सीटों का पूरा चुनावी और जातीय गणित।

2022 का चुनावी गणित: 3 पर सपा, 2 पर BJP

2022 के विधानसभा चुनाव में फिरोजाबाद की 5 सीटों में से 3 पर समाजवादी पार्टी और 2 पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कब्जा जमाया था।

विधानसभा सीट विजेता प्रत्याशी (2022) पार्टी जीत का अंतर (लगभग)
टूंडला (SC) प्रेमपाल सिंह धनगर BJP 32,000 वोट
जसराना सचिन यादव SP 836 वोट
फिरोजाबाद (सदर) मनीष असीजा BJP 13,000 वोट
शिकोहाबाद मुकेश चंद्र वर्मा SP 1,116 वोट
सिरसागंज सर्वेश सिंह यादव SP —

(नोट: 2022 में जसराना और शिकोहाबाद में जीत का अंतर बेहद कम रहा था, जिससे 2027 का मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।)

2027 के लिए जातीय समीकरण: किस सीट पर किसका दबदबा?

फिरोजाबाद की राजनीति में जातियों का गुणा-गणित अहम भूमिका निभाता है।

  • टूंडला (सुरक्षित): इस आरक्षित सीट पर करीब 65 हजार जाटव मतदाता हैं। इसके बाद ठाकुर, बघेल-धनगर (करीब 50-50 हजार), यादव (40 हजार), और निषाद व मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं।

  • जसराना: यह सपा का मजबूत किला माना जाता है, जहां यादव वोट बैंक का स्पष्ट दबदबा है। इनके साथ लोधी और अन्य ओबीसी मतदाता चुनावी नतीजों पर गहरा असर डालते हैं।

  • फिरोजाबाद (सदर): यह जिले की सबसे बड़ी सीट है और यहां भाजपा लगातार तीन बार से जीत रही है। यहां मुस्लिम और वैश्य समाज सबसे बड़े मतदाता समूह हैं। इनके अलावा जाटव, राठौर, ब्राह्मण और यादव मतदाता भी अहम हैं।

  • शिकोहाबाद: यहां यादव मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है, जिनके बाद निषाद-राजपूत और दलित जाटव समाज आता है। 2022 में यहां बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिला था।

  • सिरसागंज: मुलायम परिवार से जुड़ाव के कारण यह पूरी तरह से एक यादव बहुल सीट है और यहां यादव वोट बैंक हमेशा राजनीति के केंद्र में रहता है।

2024 के आम चुनाव से बदले हालात

लोकसभा स्तर पर देखा जाए तो 2024 के आम चुनाव ने सपा के हौसले बुलंद कर दिए हैं। फिरोजाबाद लोकसभा सीट से सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव ने भाजपा के विश्वदीप सिंह को करीब 89 हजार वोटों से हराया था।

2019 में शिवपाल सिंह यादव के अलग चुनाव लड़ने से सपा का वोट बंट गया था और भाजपा जीत गई थी। लेकिन 2024 में शिवपाल यादव के वापस सपा खेमे में आने से पार्टी को सीधा फायदा मिला।

2027 की लड़ाई: सपा के हौसले बुलंद, भाजपा की नई रणनीति

2024 के लोकसभा चुनाव की जीत ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह भर दिया है। सपा अपने यादव-मुस्लिम समीकरण के साथ अन्य पिछड़े वर्गों को साधने में लगी है। वहीं दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ‘गैर-यादव ओबीसी’ और ‘गैर-जाटव दलित’ मतदाताओं तक अपनी पैठ बढ़ाकर सपा के इस मजबूत किले में दोबारा सेंध लगाने की रणनीति पर काम कर रही है।