यूपी की राजनीति का ‘एक्स-रे’—राज्यसभा चुनाव में कौन किसके साथ?

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सुरेन्द्र दुबे ( पोलिटिकल एक्सपर्ट)
सुरेन्द्र दुबे  

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में हैं, लेकिन असली परीक्षा अक्टूबर 2026 में ही शुरू हो रही है। 16 अक्टूबर को राज्यसभा की 10 सीटों के लिए मतदान होगा। यह चुनाव सीटें जीतने-हारने से कहीं ज्यादा बड़ा है। सवाल साफ है—कौन विधायक किसके साथ खड़ा है?यूपी की राजनीति में राज्यसभा चुनाव हमेशा से ‘लॉयल्टी टेस्ट’ रहा है। 2024 में समाजवादी पार्टी को इसका कड़वा सबक मिला था। तब SP के सात विधायकों ने BJP उम्मीदवार संजय सेठ के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग की थी। एक विधायक मतदान से ही गायब रहीं। नतीजा—BJP के आठों उम्मीदवार जीत गए, SP तीन में से सिर्फ दो सीटें बचा पाई। उस घटना ने पार्टी के अंदर तूफान खड़ा कर दिया था। अब वही कहानी फिर दोहराई जा सकती है।गणित साफ है, लेकिन वफादारी नहींकागजी आंकड़ों में BJP-NDA का पलड़ा भारी है। SP के पास भी अपनी संख्या है। लेकिन राज्यसभा चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व और सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम से होता है। यहां एक-एक वोट मायने रखता है। जब आखिरी सीट का फैसला अतिरिक्त वोटों पर टिके, तब क्रॉस-वोटिंग पूरे समीकरण को पलट सकती है। 2024 ने यही साबित किया था।इस बार दोनों दलों के लिए दांव ऊंचे हैं। BJP के लिए सवाल है कि NDA का पूरा कुनबा एक लाइन में खड़ा रहेगा या नहीं। सहयोगी दलों के बीच सीटों और प्रतिनिधित्व को लेकर जो असंतोष सुनाई देता है, वह मतदान के दिन सामने आ सकता है। SP के लिए परीक्षा और भी संवेदनशील है। 2024 की क्रॉस-वोटिंग के घाव अभी भरे नहीं हैं। अखिलेश यादव के लिए यह सिर्फ राज्यसभा सीट का सवाल नहीं, बल्कि यह जांच है कि उनका विधायक दल 2027 से पहले कितना एकजुट दिखता है।दो टेस्ट, एक महीनाअक्टूबर सिर्फ राज्यसभा तक सीमित नहीं रहेगा। 23 अक्टूबर को शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 विधान परिषद सीटों का मतदान है। यहां विधायक वोट नहीं डालेंगे। स्नातक और शिक्षक मतदाता फैसला करेंगे। यह चुनाव संगठनात्मक ताकत की परीक्षा बनेगा। यानी एक तरफ विधायकों की वफादारी, दूसरी तरफ जमीनी कैडर की क्षमता—दोनों का हिसाब अक्टूबर में ही हो जाएगा।राजनीतिक दल इन चुनावों को 2027 का पूर्वानुमान बताने से बचेंगे। लेकिन अंदरूनी हकीकत छिप नहीं पाएगी। नाराज विधायक, कमजोर तालमेल, सहयोगियों का असंतोष—ये सब मतदान के दिन संकेतों में दिख सकते हैं।असली लड़ाई आखिरी वोट तक16 अक्टूबर को सबसे ज्यादा निगाहें राज्यसभा मतदान पर रहेंगी। उम्मीदवारों के नाम आने के बाद गणित और साफ हो जाएगा। तब सवाल सिर्फ यह नहीं रहेगा कि राज्यसभा कौन पहुंचेगा। बड़ा सवाल होगा—2027 की बड़ी लड़ाई से पहले किसका खेमा पूरी तरह साथ है, और किसके अंदर सेंध की दरारें दिखाई दे रही हैं?अक्टूबर का यह चुनाव अंतिम जवाब शायद न दे। लेकिन यूपी की राजनीति को 2027 से पहले आईना जरूर दिखाएगा। और इस आईने में जो चेहरा दिखेगा, वही असली तस्वीर होगी।