सूखा समीक्षा बैठक में काजू-बादाम पर विवाद, सरकार और विपक्ष आमने-सामने

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शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

महाराष्ट्र (Maharashtra) में एक तरफ किसान कम बारिश और भयंकर सूखे (Drought) की मार झेल रहे हैं। खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद होने की कगार पर हैं और जानवरों के चारे-पानी का संकट गहरा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ नांदेड़ (Nanded) में इसी सूखे की स्थिति पर चर्चा के लिए बुलाई गई समीक्षा बैठक में नेताओं और अधिकारियों की टेबल पर काजू, बादाम और पिस्ता परोसे जाने को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है।

कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे की मौजूदगी में हुई इस बैठक की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विपक्ष ने सरकार की संवेदनशीलता पर कड़े सवाल उठाए हैं।

क्या है पूरा मामला?

मराठवाड़ा क्षेत्र में सूखे जैसी गंभीर स्थिति को लेकर नांदेड़ में एक अहम समीक्षा बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में राज्य के कृषि मंत्री, कई सांसद, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

बैठक का मुख्य एजेंडा किसानों की मदद करना और सूखे से निपटना था, लेकिन टेबल पर प्लेटों में सजे काजू, बादाम और पिस्ता ने पूरी चर्चा का रुख ही बदल दिया। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार पर सीधा निशाना साधा और पूछा कि जब किसान भूखे-प्यासे संकट में हैं, तो ऐसी गंभीर बैठक में ड्राई फ्रूट्स (Dry Fruits) परोसना कितना जायज है?

रोहित पवार ने की विशेष अधिवेशन की मांग

इस मामले पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सरकार से पूछा कि क्या वह सच में सूखे की स्थिति को लेकर गंभीर है? रोहित पवार ने मांग की है कि किसानों के इस संकट पर चर्चा के लिए तुरंत विधानसभा का विशेष अधिवेशन (Special Session) बुलाया जाए।

सत्ता पक्ष की अजीबोगरीब दलीलें

विवाद बढ़ने के बाद सत्ता पक्ष के नेताओं ने इस मामले पर अलग-अलग और हैरान करने वाले तर्क दिए:

  • शिवसेना विधायक हेमंत पाटिल: इन्होंने कहा कि टेबल पर रखा गया काजू-बादाम भी तो किसानों के खेतों से ही आता है। इसलिए इसे खरीदकर और परोसकर एक तरह से किसानों की ही मदद की गई है।

  • NCP (अजित गुट) विधायक प्रताप पाटिल चिखलीकर: उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को बेवजह तूल दिया जा रहा है। अगर किसी ने गलती से टेबल पर काजू-बादाम रख दिए हैं, तो इस पर इतना हंगामा करने की जरूरत नहीं है।

  • कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे: सफाई देते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि बैठक में शामिल कुछ लोगों को शुगर और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं, इसीलिए उनके लिए ड्राई फ्रूट्स रखे गए थे।

सवाल जो अब भी कायम है: भले ही नेताओं ने अपनी सफाई दे दी हो, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब राज्य का किसान सूखे से जूझ रहा हो और बैठक का मुद्दा उसकी फसल और जान बचाने का हो, तो क्या मेज पर सजे काजू-बादाम सिर्फ एक ‘सामान्य नाश्ता’ हैं, या यह संवेदनहीनता का एक गलत संदेश देने वाला दृश्य है? फिलहाल नांदेड़ की यह घटना पूरे महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है।