आकाश के बाद अब ईशान को भी किनारे लगाया मायावती ने, अब आगे क्या ?

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गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सुगबुगाहट के बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने परिवारवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अब उनके परिवार का कोई भी सदस्य (खासकर भाई आनंद कुमार के बेटे) बीएसपी में किसी भी राजनीतिक पद का लाभ नहीं उठाएगा।

आनंद कुमार को साथ रखने की बताई मजबूरी

मायावती ने एक विस्तृत बयान जारी कर कांशीराम के मिशन और परिवारवाद पर अपनी स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि उनके जीवन का एकमात्र लक्ष्य बहुजन समाज को अपने पैरों पर खड़ा करना है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि कांशीराम की तरह उन्होंने भी अपने परिवार वालों को हमेशा सांसदी, विधायकी और मंत्री पदों से दूर रखा है। अपने भाई आनंद कुमार को साथ रखने की वजह बताते हुए उन्होंने कहा, “मेरे अविवाहित और एक महिला होने के नाते मुझे अपनी सुरक्षा और देखभाल के लिए मजबूरी में अपने सबसे छोटे भाई आनंद कुमार को साथ रखना पड़ा। वह लंबे समय से मेरी निगरानी में पार्टी की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उनके परिवार के अन्य सदस्य इसका राजनीतिक लाभ उठाएं।”

बेटों की नो एंट्री, भतीजी दीपिका को मिल सकता है मौका

बसपा प्रमुख ने अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए कहा कि आनंद कुमार के किसी भी बेटे (आकाश या ईशान) को पार्टी में छोटे या बड़े पद पर रहकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा।

हालांकि, उन्होंने अपनी भतीजी दीपिका आनंद (आनंद कुमार की इकलौती बेटी) के लिए दरवाजे खुले रखे हैं। मायावती ने कहा, “दीपिका इस समय वकालत की पढ़ाई कर रही है। यदि आगे चलकर आनंद कुमार को मेरी मदद के लिए किसी सदस्य की जरूरत पड़ती है, तो वे केवल दीपिका की मदद ले सकते हैं। उसकी वफादारी, ईमानदारी और कार्यक्षमता को देखकर भविष्य में उसे पार्टी की जरूरत के अनुसार जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।”

दलित कार्यकर्ता को कमान सौंपने का भी विकल्प

मायावती ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दीपिका जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं होती है, तो पार्टी की आम सहमति से दलित वर्ग के ही किसी अन्य ‘मिशनरी कार्यकर्ता’ को यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

उन्होंने कहा कि भाई आनंद कुमार के बच्चों के बड़े और शादीशुदा होने के कारण उन्हें काफी कुछ झेलना पड़ रहा है, लेकिन वे किसी के मोह में पड़कर पार्टी को नुकसान नहीं होने देंगी। बसपा को पूरी तरह ‘परिवारवाद’ से मुक्त रखने के लिए यह कदम उठाया गया है ताकि सर्वसमाज के ज्यादा से ज्यादा लोग आंबेडकरवादी आंदोलन से जुड़ सकें।

विपक्षी प्रोपेगेंडा से सावधान रहने की अपील

अपने बयान के अंत में मायावती ने बसपा कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे पार्टी विरोधी संगठनों, जातिवादी मीडिया और सोशल मीडिया के ‘पेड प्रोपेगेंडा’ से सावधान रहें। उन्होंने कहा कि विरोधियों का एकमात्र मकसद साम, दाम, दंड, भेद अपनाकर बसपा को यूपी में सरकार बनाने से रोकना है, जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देना है।