प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों ने पुलिस पर लगाए यौन उत्पीड़न के आरोप

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अजमल शाह
अजमल शाह

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 3 अक्टूबर 2026 को हुए विरोध प्रदर्शन की कवरेज करने गई तीन महिला पत्रकारों ने तैनात पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। दिल्ली पुलिस ने महिलाओं की लिखित शिकायत दर्ज कर ली है और मामले की निष्पक्ष जांच के लिए यह केस क्राइम ब्रांच (Crime Branch) को सौंप दिया है।

धारा 163 BNSS लागू होने के बावजूद हुआ था प्रदर्शन

नई दिल्ली की डीसीपी (DCP) नेहा यादव ने मामले को क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने की आधिकारिक पुष्टि की है। डीसीपी ने बताया कि 3 अक्टूबर को नई दिल्ली इलाके में धारा 163 BNSS लागू थी, इसके बावजूद ‘AISA’ और अन्य दलों ने SIR के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को मौके से चले जाने की चेतावनी दी गई थी। चेतावनी न मानने पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। डीसीपी के मुताबिक, शाम करीब 6 बजे तीन महिलाओं ने खुद को पत्रकार बताते हुए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ हिरासत के दौरान अनुचित व्यवहार की शिकायत दी। तीनों पत्रकारों के मेडिकल करा लिए गए हैं। अब क्राइम ब्रांच इन आरोपों की जांच करेगी और शिकायतकर्ताओं के साथ-साथ अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

एसीपी पर धक्का मारने और बदसलूकी का आरोप

पुलिस को दी गई लिखित शिकायत में एक महिला पत्रकार ने विस्तार से घटना का ब्योरा दिया है। शिकायत के मुताबिक, मौके पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन महिला प्रदर्शनकारियों को संभालने के लिए वहां कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी।

पत्रकार ने एसीपी (ACP) विवेक भगत से महिला पुलिसकर्मियों की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल पूछा था। आरोप है कि इसी बातचीत के दौरान एसीपी ने उनका यौन उत्पीड़न किया और उन्हें पीछे की ओर धक्का दिया। शिकायतकर्ता का कहना है कि पुलिस को लिखित शिकायत देने के बावजूद अब तक इस मामले में कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की गई है।

प्रेस काउंसिल और प्रेस क्लब ने की तत्काल कार्रवाई की मांग

महिला पत्रकारों के साथ पुलिसकर्मियों के इस कथित व्यवहार पर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने सख्त नाराजगी जताई है। दोनों संस्थाओं ने शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए एक बयान जारी किया है।

बयान में कहा गया कि एक लोकतांत्रिक देश में इस तरह का रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संस्थाओं ने कहा कि पुलिस विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि मीडियाकर्मियों को अपना काम करने की आजादी और पर्याप्त जगह मिले, उनके साथ आक्रामक व्यवहार न किया जाए और न ही धमकियां दी जाएं। प्रेस क्लब ने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर और आस-पास के इलाके में खुद से इंटरनेट बंद करने का कोई अधिकार नहीं है।