8 नाम, कई जातीय संदेश: BJP की राज्यसभा लिस्ट में किसके लिए क्या संकेत?

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गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने आजमाए हुए सामाजिक समीकरणों पर दोबारा काम करना शुरू कर दिया है। संगठन के फेरबदल, हालिया कैबिनेट बदलाव और अब उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए घोषित 8 उम्मीदवारों की सूची को देखें तो पार्टी का फोकस साफ नजर आता है। बीजेपी ने एक बार फिर गैर-जाटव दलित और गैर-यादव ओबीसी (OBC) समूहों को साधने का वही दांव चला है, जिसने 2014 और 2017 में पार्टी को राज्य में ऐतिहासिक बढ़त दिलाई थी।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, नेतृत्व इस रणनीतिक सोशल इंजीनियरिंग के जरिए 2024 के लोकसभा चुनाव में छिटके हुए अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को दोबारा पूरी तरह एकजुट करने की कोशिश कर रहा है।

चार संगठनात्मक क्षेत्रों को मिला प्रतिनिधित्व

बीजेपी संगठन के लिहाज से उत्तर प्रदेश को कुल 6 क्षेत्रों में बांटा गया है। राज्यसभा उम्मीदवारों की इस नई सूची में क्षेत्रीय संतुलन साधते हुए चार प्रमुख क्षेत्रों को सीधा प्रतिनिधित्व दिया गया है:

  • काशी क्षेत्र: विद्यासागर सोनकर और राधाकांत ओझा

  • अवध क्षेत्र: प्रियंका रावत

  • कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र: गोपी कृष्ण पांडेय और प्रकाश पाल

  • ब्रज क्षेत्र: रामप्रताप सिंह चौहान, धर्मपाल सिंह और श्रुति गंगवार

अलग-अलग क्षेत्रों के प्रभावशाली सामाजिक तबकों को उच्च सदन भेजकर पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय समीकरणों दोनों को संतुलित रखने का संदेश दिया गया है।

2014 और 2017 का फॉर्मूला फिर क्यों जरूरी हुआ?

बीजेपी के लिए यह सामाजिक गणित नया नहीं है। 2014 के आम चुनाव और 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी ने गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वर्ग के बीच गहरी पैठ बनाकर विपक्ष के पारंपरिक दुर्ग को ढहाया था। दोनों ही बार बीजेपी को इसका भारी चुनावी फायदा मिला और पार्टी ने प्रचंड बहुमत हासिल किया।

हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में इस समीकरण में दरार देखने को मिली थी। उस चुनाव में पासी और कुर्मी वर्ग के मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा बीजेपी से छिटक गया था, जबकि लोध मतदाता भी पूरी तरह पार्टी के साथ लामबंद नहीं रहे। इसके चलते यूपी में बीजेपी को सीटों का भारी नुकसान उठाना पड़ा और पार्टी केंद्र में अपने दम पर पूर्ण बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी। अब राज्यसभा टिकटों और संगठन में इन वर्गों को अहमियत देकर पार्टी उसी नुकसान की भरपाई में जुटी है।

दो ब्राह्मण चेहरों के जरिए नाराजगी थामने की कोशिश

गैर-यादव ओबीसी और दलित समीकरणों को मजबूत करने के साथ-साथ पार्टी ने सवर्ण आधार, विशेषकर ब्राह्मण वर्ग को भी साधे रखा है। सूची में दो ब्राह्मण नेताओं (राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडेय) को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया गया है, ताकि इस वर्ग के भीतर किसी तरह के असंतोष की गुंजाइश न रहे। इससे पहले संगठन स्तर पर भी पार्टी उत्तर प्रदेश से पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाकर इस दिशा में कदम बढ़ा चुकी है।