कल साथ मार्च, आज लंच से दूरी… अखिलेश और कांग्रेस के बीच है खटास?

INDIA गठबंधन के दो प्रमुख घटकों—समाजवादी पार्टी (SP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच तालमेल को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। दिल्ली में विपक्ष के विरोध मार्च और उसके बाद जनपथ स्थित सागर रत्ना में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा आयोजित लंच को लेकर दोनों दलों के बीच तल्खी सामने आई है। लंच में सपा नेताओं के शामिल न होने को लेकर दोनों पक्षों की तरफ से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।
लंच विवाद: निमंत्रण को लेकर कांग्रेस और सपा के अलग दावे
विवाद की शुरुआत तब हुई जब यह बात सामने आई कि मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा आयोजित लंच में समाजवादी पार्टी को आमंत्रित नहीं किया गया था। इस पर कांग्रेस सूत्रों ने सफाई देते हुए दावा किया कि सभी दलों को न्योता भेजा गया था। कांग्रेस की तरफ से यहां तक कहा गया कि यूपी के घोसी से सपा नेता राजीव राय लंच और विरोध प्रदर्शन दोनों में शामिल हुए थे।
हालांकि, जब राजीव राय से बात की गई, तो उन्होंने कांग्रेस के दावों को खारिज कर दिया। राजीव राय ने बताया कि उन्हें निमंत्रण बहुत देर से मिला, जिस कारण वह लंच में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने यह भी साफ किया कि वह उस वक्त विरोध प्रदर्शन का हिस्सा भी नहीं थे।
सपा सूत्रों का स्पष्ट तौर पर दावा है कि पार्टी को लंच के बारे में कांग्रेस की तरफ से कोई जानकारी या निमंत्रण नहीं दिया गया था, यही वजह है कि कोई भी सपा नेता वहां नहीं पहुंचा।
जयराम रमेश की सफाई: ‘देर रात लिया गया था फैसला’
विवाद बढ़ता देख कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सफाई पेश की। उन्होंने लिखा कि लंच का फैसला देर रात लिया गया था और उसी समय सभी को इसकी जानकारी दी गई थी। रमेश ने किसी भी ‘कम्युनिकेशन गैप’ से इनकार करते हुए कहा कि इतने कम समय में सूचना मिलने के कारण कुछ दलों के सदस्यों का शामिल न हो पाना स्वाभाविक था।
राहुल की रणनीति से अखिलेश यादव की नाराजगी की चर्चा
लंच से पहले दिल्ली में हुए INDIA गठबंधन के मार्च के दौरान भी दोनों दलों के समन्वय पर सवाल उठे थे। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आकाशवाणी की ओर जाकर प्रदर्शन में बैठ गए, जबकि अन्य विपक्षी नेताओं को इंडिया गेट जाने की जानकारी दी गई थी।
बताया जा रहा है कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव इस बात से नाराज थे कि राहुल गांधी के अचानक बैरिकेड पार कर आगे जाने और उनकी रणनीति के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई। जानकारी के अनुसार, लखनऊ रवाना होने तक अखिलेश यादव को इस घटनाक्रम का पता नहीं था और उन्हें टीवी के जरिए मालूम चला कि राहुल गांधी वहां प्रदर्शन कर रहे हैं।
उठ रहे हैं 3 अहम सवाल
उत्तर प्रदेश में आगामी उपचुनावों के लिए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे को लेकर पहले से ही तनाव की खबरें हैं। ऐसे में इस हालिया विवाद के बाद राजनीतिक हलकों में तीन बड़े सवाल उठ रहे हैं:
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क्या INDIA गठबंधन में सब कुछ ठीक चल रहा है?
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क्या कांग्रेस पार्टी अब क्षेत्रीय दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी से दूरी बनाने की रणनीति पर काम कर रही है?
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क्या राहुल गांधी नहीं चाहते कि अखिलेश यादव उनके साथ ज्यादा नजर आएं, ताकि मीडिया का ध्यान या कवरेज बंटने न पाए?

