सोने-चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे दिन गिरावट के पीछे क्या हैं बड़े कारण

वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख, मजबूत डॉलर और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के दबाव में भारतीय सर्राफा बाजार में कीमती धातुओं का टूटना जारी है। शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के आंकड़ों के मुताबिक 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 1,900 रुपये टूटकर 1,46,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है।
चांदी में 30 हजार रुपये तक की टूट
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी भारी बिकवाली देखी गई। शुक्रवार को चांदी की कीमत 5,500 रुपये गिरकर 2,02,000 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। पिछले कारोबारी सत्र (गुरुवार) में इसका भाव 2,07,500 रुपये प्रति किलोग्राम था। चांदी में यह लगातार तीसरे दिन की गिरावट है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 30 सितंबर के बाद से अब तक चांदी की कीमत में करीब 13 प्रतिशत (30,000 रुपये) की बड़ी गिरावट आ चुकी है।
क्यों आ रही है कीमतों में गिरावट?
जिंस बाजार में इस समय व्यापक बिकवाली का माहौल है। एचडीएफसी (HDFC) सिक्योरिटीज में जिंस मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी ने बताया कि वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के कारण घरेलू बाजार में सोने की कीमतें जुलाई की शुरुआत के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं।
चॉइस ब्रोकिंग की जिंस विश्लेषक पिंकी यादव के मुताबिक, शेयर बाजार में व्यापक बिकवाली के बीच पिछले एक महीने में चांदी करीब 14% तक गिर गई है। निवेशक प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए कीमती धातुओं में अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं।
उन्होंने इस गिरावट के पीछे व्यापक आर्थिक और भू-राजनीतिक कारणों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार डॉलर में मजबूती, बॉन्ड प्रतिफल (यील्ड) में वृद्धि और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने महंगाई की आशंकाओं को बढ़ा दिया है। इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतें करीब 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इन स्थितियों के कारण ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बने रहने की आशंका है, जिसका सीधा दबाव सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल
घरेलू बाजार की तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं पर दबाव दिखा। वैश्विक स्तर पर हाजिर सोने की कीमत एक समय गिरकर 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गई थी। हालांकि, बाद में इसमें मामूली सुधार हुआ और यह 4,024.37 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर कारोबार कर रहा था। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की हाजिर कीमत 1.41 प्रतिशत के नुकसान के साथ 53.83 डॉलर प्रति औंस दर्ज की गई।

