नीरजा भनोट के 40 साल बाद स्मित की कहानी, आसमान में मौत से मुकाबला

Neerja Bhanot
अजमल शाह
अजमल शाह

भारतीय विमानन इतिहास (Aviation History) में दो ऐसी घटनाएं दर्ज हैं, जो 40 साल के अंतराल पर हुईं, लेकिन दोनों में एक बात समान थी—मौत के साये में भारतीय क्रू मेंबर की अदम्य बहादुरी। 1986 में पैन एम फ्लाइट 73 (Pan Am Flight 73) की सीनियर फ्लाइट पर्सर नीरजा भनोट (Neerja Bhanot) ने जो साहस दिखाया था, वैसा ही कुछ 30 सितंबर 2026 को फ्लाईदुबई (Flydubai) के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछर (Captain Smit Machhar) ने कर दिखाया।

दोनों ने आसमान में पैदा हुए जीवन के सबसे बड़े खतरे के बीच खुद की परवाह किए बिना यात्रियों की जान बचाई। आइए जानते हैं कैप्टन स्मित मछर की बहादुरी की वो कहानी, जिसके लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और दुबई के क्राउन प्रिंस ने उनकी तारीफ की है।

फ्लाईदुबई की कॉकपिट में मौत से संघर्ष

30 सितंबर 2026 को कैप्टन स्मित मछर फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 की कमान संभाल रहे थे। यह बोइंग 737 MAX 8 विमान 174 यात्रियों को लेकर दुबई से इजरायल के तेल अवीव (Tel Aviv) जा रहा था। इसी दौरान कॉकपिट के अंदर एक भयानक आतंकी साजिश को अंजाम देने की कोशिश की गई। यूएई (UAE) प्रशासन के मुताबिक, को-पायलट ने एक ‘क्रैश एक्स’ (कुल्हाड़ी) का इस्तेमाल करते हुए कैप्टन स्मित पर जानलेवा हमला कर दिया।

खून से लथपथ थे, फिर भी कॉकपिट का दरवाजा खोला

हमले में बुरी तरह घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने हार नहीं मानी। उन्हें शुरुआत में समझ ही नहीं आया कि उन पर हमला हुआ है। उनका पहला इंस्टिंक्ट यही था कि विमान में कोई बड़ी तकनीकी खराबी आ गई है।

कैप्टन स्मित के मुताबिक, उनकी आंखों के सामने धुंधलापन छा गया था और वह कॉकपिट के फर्श पर गिर पड़े थे। विमान तेजी से नीचे आ रहा था और बाहर यात्री चीख रहे थे। उसी भयानक स्थिति में कैप्टन ने सोचा कि वह सबको मरने नहीं दे सकते। अपनी पूरी ताकत लगाकर उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिससे बाहर खड़े यात्री और क्रू मेंबर्स अंदर आ सके और उन्होंने हमलावर को काबू में कर लिया। इसके बाद विमान में मौजूद अन्य योग्य पायलटों की मदद से फ्लाइट को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब के ताबुक (Tabuk) में लैंड कराया गया।

दुबई के क्राउन प्रिंस और पीएम मोदी ने की तारीफ

कैप्टन स्मित की इस बहादुरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है। दुबई के क्राउन प्रिंस और यूएई के रक्षा मंत्री शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने खुद अस्पताल जाकर कैप्टन स्मित से मुलाकात की। उन्होंने कहा, “हमें गर्व है कि वह हमारी टीम का हिस्सा हैं… हमारे राष्ट्र की कहानी का हिस्सा हैं।”

इसके अलावा, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने भी कैप्टन स्मित से फोन पर बात कर उनके साहस को सलाम किया।

नीरजा भनोट: 40 साल पहले का वो ऐतिहासिक बलिदान

कैप्टन स्मित का यह संघर्ष तुरंत नीरजा भनोट की याद दिलाता है। 5 सितंबर 1986 को पाकिस्तान के कराची एयरपोर्ट पर पैन एम फ्लाइट 73 को आतंकियों ने हाईजैक कर लिया था। विमान में 379 लोग सवार थे। 22 वर्षीय नीरजा भनोट ने अपनी सूझबूझ से अमेरिकी नागरिकों के पासपोर्ट छिपा दिए थे और इमरजेंसी एग्जिट खोलकर कई यात्रियों की जान बचाई थी। 17 घंटे तक चले इस खौफनाक ड्रामे के अंत में तीन बच्चों को आतंकियों की गोलियों से बचाते हुए नीरजा शहीद हो गई थीं। उन्हें भारत के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया गया था।

आज 40 साल बाद, कैप्टन स्मित मछर ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब जिम्मेदारी और कर्तव्य की बात आती है, तो भारतीय एविएटर्स यात्रियों की जान बचाने के लिए मौत से भी टकराने को तैयार रहते हैं।