Election 27: खैर से अलीगढ़ तक 7 सीटों का समीकरण, जानिए पूरा इतिहास

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘तालानगरी’ अलीगढ़ अपनी एक बेहद खास और प्रभावशाली अहमियत रखता है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की वजह से यह जिला देश की शिक्षा और राजनीति के नक्शे पर भी हमेशा चर्चा में रहता है। जिले की सियासत केवल अलीगढ़ शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की ग्रामीण और कस्बाई विधानसभा सीटें पूरे पश्चिमी यूपी के चुनावी समीकरणों की दिशा तय करती हैं।
वर्तमान विधानसभा व्यवस्था के तहत अलीगढ़ जिले में कुल 7 विधानसभा सीटें हैं—खैर (SC), बरौली, अतरौली, छर्रा, कोल, अलीगढ़ (सदर) और इगलास (SC)। 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में इन सभी 7 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ‘क्लीन स्वीप’ किया था। 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर जिले में अभी से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
2022 का चुनावी गणित: 7 की 7 सीटों पर खिला ‘कमल’
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अलीगढ़ जिले की सातों सीटों पर अपना परचम लहराया था। हालांकि, कुछ सीटों पर जीत का अंतर काफी बड़ा था, जबकि कुछ सीटों पर समाजवादी पार्टी (SP) ने कांटे की टक्कर दी थी।
| विधानसभा सीट | विजेता प्रत्याशी (2022) | पार्टी | निकटतम प्रतिद्वंद्वी (पार्टी) | जीत का अंतर (वोट) |
| बरौली | जयवीर सिंह | BJP | प्रमोद गौड़ (BSP/SP) | 90,645 |
| इगलास (SC) | राजकुमार सहयोगी | BJP | बीरपाल सिंह दिवाकर (RLD) | 59,163 |
| अतरौली | संदीप कुमार सिंह | BJP | वीरेश यादव (SP) | 39,324 |
| खैर (SC) | अनूप प्रधान वाल्मीकि* | BJP | चारू कैन (BSP) | ~75,000 |
| छर्रा | रवींद्र पाल सिंह | BJP | राकेश कुमार (SP) | 24,327 |
| अलीगढ़ (सदर) | मुक्ता राजा | BJP | जफर आलम (SP) | 12,786 |
| कोल | अनिल पाराशर | BJP | शाज इशाक (SP) | 5,028 |
(नोट: खैर सीट से विधायक अनूप प्रधान के 2024 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद, हाल ही में हुए उपचुनाव में भाजपा के सुरेंद्र दिलेर ने सपा की चारू कैन को 38,393 वोटों से हराकर यह सीट भाजपा के पास बरकरार रखी है।)
कोल की कांटे की टक्कर और अतरौली की विरासत
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कोल सीट: यह अलीगढ़ की सबसे महत्वपूर्ण शहरी सीटों में से एक है। 2012 में यहां सपा ने जीत दर्ज की थी। 2017 और 2022 में भाजपा के अनिल पाराशर ने सीट जीती, लेकिन 2022 में सपा और भाजपा के बीच हार-जीत का अंतर महज 5,028 वोट रहा। इसलिए 2027 में यह सीट सबसे ज्यादा ‘फोकस’ में रहेगी।
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अतरौली सीट: यह सीट उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता रहे स्व. कल्याण सिंह की राजनीतिक विरासत से जुड़ी है। 1974 में कल्याण सिंह ने यहीं से भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की थी। वर्तमान में उनके पौत्र संदीप कुमार सिंह यहां से लगातार दो बार (2017 और 2022) विधायक चुने गए हैं।
अलीगढ़ का सामाजिक और धार्मिक समीकरण
2011 की जनगणना के अनुसार, अलीगढ़ की कुल आबादी 36,73,889 थी। इसमें लगभग 67% ग्रामीण और 33% शहरी आबादी शामिल है।
धार्मिक दृष्टिकोण से देखें तो जिले में लगभग 80% हिंदू और 20% मुस्लिम आबादी है। यहां जाट, ठाकुर, ब्राह्मण, दलित, पिछड़ा वर्ग (OBC) और मुस्लिम मतदाताओं का मिश्रण है, जो चुनावी समीकरणों को बेहद बहुआयामी बनाता है।
2027 के लिए क्या हैं संकेत?
अलीगढ़ का चुनावी इतिहास बताता है कि यह जिला एक स्थिर वोट बैंक से ज्यादा बदलते हुए समीकरणों वाला क्षेत्र रहा है। 2012 के विधानसभा चुनाव में यहां सपा और राष्ट्रीय लोक दल (RLD) का भारी प्रभाव देखने को मिला था, लेकिन 2017 और 2022 में भाजपा ने पूरी तरह से क्लीन स्वीप कर अपना मजबूत आधार स्थापित किया।
2027 के चुनाव में भाजपा के सामने लगातार तीसरी बार सातों सीटें बचाने की बड़ी चुनौती होगी। वहीं, दूसरी ओर सपा और उसके सहयोगी दल 2012 के इतिहास को दोहराने और कोल जैसी करीबी सीटों पर उलटफेर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। आने वाले चुनाव में महंगाई, विकास, कानून-व्यवस्था, रोजगार और कृषि से जुड़े मुद्दे अलीगढ़ की चुनावी दिशा तय करेंगे।

