रेस कोर्स मस्जिद का इतिहास, नोटिस की वजह और क्यों मचा सियासी घमासान

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शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

दिल्ली के लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित ऐतिहासिक ‘रेस कोर्स मस्जिद’ (हुजरा कुआं) को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। अधिकारियों ने करीब 125 से 130 साल पुरानी इस मस्जिद को छह दिनों के भीतर खाली करने का नोटिस दिया है।

मस्जिद के नाम नोटिस जारी होने और कार्रवाई शुरू होने के बाद राजनीतिक हलकों से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी और जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से इस मामले में तत्काल दखल देने की मांग की है।

वक्फ संपत्ति और 1977 के गजट का हवाला

रेस कोर्स मस्जिद दिल्ली वक्फ बोर्ड की संपत्ति में दर्ज है। इसे साल 1977 से अधिसूचित वक्फ संपत्ति माना जाता है और यह धरोहर स्थल के रूप में भी सूचीबद्ध है। पिछले करीब 40 साल से मस्जिद से जुड़े मोहम्मद हारून के मुताबिक, ‘लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस’ (L&DO) ने मस्जिद के सभी गेट बंद कर दिए हैं और वहां की बिजली-पानी की सप्लाई पूरी तरह काट दी गई है। हारून ने आरोप लगाया है कि बिना किसी औपचारिक नोटिस के केयरटेकर को मस्जिद गिराने की धमकी दी गई और लोगों को नमाज पढ़ने से रोका जा रहा है।

ओवैसी ने किरेन रिजिजू से की हस्तक्षेप की अपील

एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से मामले में दखल देने का आग्रह किया है। ओवैसी के मुताबिक, ‘उपयोग के आधार पर वक्फ’ होने के कारण वक्फ संशोधन अधिनियम भी इस मस्जिद की सुरक्षा करता है। उन्होंने तर्क दिया कि 2023 से दिल्ली वक्फ बोर्ड का गठन नहीं हुआ है, इसलिए इस मुद्दे को सुलझाने की जिम्मेदारी सीधे मंत्री की है। ओवैसी ने सरकार से धमकियों पर रोक लगाने की मांग करते हुए सवाल किया कि मुसलमानों की इबादतगाहों को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद का डेलिगेशन मंत्री से मिला

इस कार्रवाई को रोकने के लिए जमीयत उलेमा-ए-हिंद का एक प्रतिनिधिमंडल किरेन रिजिजू से मिला। डेलिगेशन ने मंत्री को एक ज्ञापन सौंपकर रेस कोर्स मस्जिद और सफदरजंग मकबरे के पीछे स्थित कब्रिस्तान को बचाने के लिए तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की मांग रखी है।

विपक्षी नेताओं ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने इस नोटिस को लेकर सरकार की आलोचना की। अल्वी ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार देश की हर मस्जिद को सरकारी जमीन पर बनी हुई बता सकती है। उनके मुताबिक, बीजेपी और आरएसएस की मुस्लिम दुश्मनी बार-बार सामने आती है और उनके पास मंदिर-मस्जिद के अलावा कोई दूसरा मुद्दा नहीं है।

कश्मीर के धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त मस्जिद को वक्फ अधिकारी बचाने में विफल रहे हैं। मीरवाइज ने सवाल उठाया कि क्या मुसलमानों की इबादत वाली जगहों के लिए यही नई परिपाटी बन रही है। उन्होंने कहा कि इन्‍हीं वजहों से वक्फ संशोधनों और मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने का कड़ा विरोध किया गया था।