बुंदेलखंड का सियासी समीकरण: उरई से झांसी तक जानिए युवाओं की जुबानी

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच बुंदेलखंड के राजनीतिक मैदान में सरगर्मी तेज हो गई है। उरई से लेकर झांसी तक फैले इस इलाके में युवाओं की राय किसी एक नेता या पार्टी के पक्ष में एकतरफा नजर नहीं आती। जहां एक तरफ कानून-व्यवस्था और सड़कों के बुनियादी विकास को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में आवाजें उठती हैं, वहीं दूसरी तरफ रोजगार, पलायन, पानी की किल्लत और खेती से जुड़ी समस्याएं भी उतनी ही मजबूती से बहस का हिस्सा बनी हुई हैं।
बुंदेलखंड के युवाओं से हुई बातचीत के आधार पर तैयार इस ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए कि मतदाता आगामी चुनाव को किस नजरिए से देख रहे हैं और उनकी असल प्राथमिकताएं क्या हैं।
- रोहित यादव, 22 “बेरोजगारी और पलायन बहुत है यहाँ। योगी जी ने सड़कें तो बनाईं, लेकिन उद्योग नहीं आए। फिर भी अखिलेश के समय से बेहतर लग रहा है, इसलिए योगी को ही दूँगा।”
- प्रिया पटेल, 19 “पानी और सिंचाई का मसला सबसे बड़ा है। नहरें सूखी पड़ी हैं। अभी तय नहीं किया है… जो वाकई काम करके दिखाएगा उसी को वोट देंगे।”
- अंकित कुशवाहा, 24 “पलायन रोकने के लिए रोजगार चाहिए। योगी भैया ने कानून-व्यवस्था सुधारी है, लेकिन बुंदेलखंड में उद्योग नहीं आए। अखिलेश को एक मौका देना चाहिए शायद।”
- शालिनी साहू, 20 “सड़कें बेहतर हुई हैं, लेकिन नौकरी नहीं मिली तो क्या फायदा? मेरे भाई शहर चले गए। काम देखकर फैसला करूँगी।”
- विकास तिवारी, 21 “योगी जी के समय में थोड़ा सुधार दिख रहा है, लेकिन पानी की समस्या जस की तस है। अभी तो योगी को ही वोट देने का मन है।”
बाँदा से:
- सूरज सिंह, 20 “खेती और पलायन दोनों समस्या हैं। बारिश पर निर्भर रहना पड़ता है। योगी जी ने कुछ काम किया है, इसलिए अभी उन्हीं को वोट दूँगा।”
- नेहा गुप्ता, 18 “यहाँ से ज्यादातर लड़के दिल्ली-मुंबई चले जाते हैं। रोजगार नहीं है। अखिलेश जी को एक मौका मिलना चाहिए, शायद वो कुछ नया करें।”
- राहुल द्विवेदी, 23 “सिंचाई और खेती का मुद्दा सबसे ऊपर है। दोनों में से कोई भी ठीक से हल नहीं कर पाया। उम्मीदवार देखकर फैसला करूँगा।”
- अंजलि यादव, 21 “पलायन बहुत है। घर में कोई नौजवान नहीं बचता। योगी जी की कानून-व्यवस्था अच्छी लगती है, लेकिन विकास धीमा है। अभी उलझन में हूँ।”
- मोहित चौरसिया, 19 “खेती घाटे की हो गई है। योगी भैया के समय में थोड़ी सड़कें बनी हैं, इसलिए उन्हीं को वोट दूँगा।”
महोबा से:
- अभिषेक राजपूत, 22 “पानी का संकट सबसे बड़ा है। तालाब सूख रहे हैं। योगी जी ने कुछ योजनाएँ चलाईं, लेकिन असर कम दिखा। फिर भी उन्हीं को वोट देने का सोच रहा हूँ।”
- काजल शर्मा, 20 “पानी की समस्या सालों से है। अखिलेश जी के समय में भी यही हाल था। काम देखकर फैसला करूँगी, अभी तय नहीं है।”
- दीपक वर्मा, 18 “यहाँ पानी और रोजगार दोनों की कमी है। अखिलेश को मौका देना चाहिए। शायद वो बुंदेलखंड पर ज्यादा ध्यान दें।”
- पूजा गुप्ता, 23 “पानी की किल्लत के कारण खेती मुश्किल हो गई है। योगी जी की सरकार ने कुछ सुधार किया है, इसलिए योगी को ही वोट दूँगी।”
- सौरभ तिवारी, 21 “पानी का सवाल सबसे ऊपर है। दोनों पार्टियाँ वादा करती हैं। उम्मीदवार और काम देखकर तय करूँगा।”
झाँसी से:
- आर्यन सक्सेना, 19 “रोजगार और पर्यटन दोनों में संभावना है, लेकिन नौकरियाँ कम हैं। योगी जी के समय में शहर थोड़ा सुधरा है, इसलिए उन्हीं को वोट दूँगा।”
- ऋतु पाल, 22 “पर्यटन बढ़ाया जा सकता है, लेकिन युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही। अखिलेश जी को एक मौका मिलना चाहिए।”
- कुलदीप यादव, 20 “रोजगार का मुद्दा सबसे बड़ा है। झाँसी में इंडस्ट्री कम है। अभी तय नहीं किया… जो वा कई रोजगार देगा उसी को वोट।”
- स्नेहा गुप्ता, 18 “पर्यटन की बहुत गुंजाइश है, लेकिन सुविधाएँ कम हैं। योगी जी ने कुछ काम किया है, इसलिए अभी उन्हीं को वोट देने का मन है।”
- विवेक कुशवाहा, 24 “नौकरी नहीं मिल रही तो पढ़-लिखकर भी क्या फायदा। दोनों में से किसी पर पूरा भरोसा नहीं। काम और उम्मीदवार देखकर फैसला करूँगा।”
उरई से झांसी तक: विकास और कानून-व्यवस्था के साथ रोजगार की बड़ी कसक
बुंदेलखंड के युवाओं का कहना है कि क्षेत्र में पिछले कुछ सालों में बुनियादी ढांचे और सुरक्षा के मोर्चे पर सुधार हुआ है, लेकिन रोजगार के अवसरों की कमी के चलते आज भी युवाओं को पलायन करने पर मजबूर होना पड़ता है।
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कानून-व्यवस्था और सुरक्षा: कई युवाओं का मानना है कि प्रशासनिक सख्ती और अपराध पर लगाम लगने से इलाके में शांति का माहौल बेहतर हुआ है, जो मौजूदा सरकार का एक मजबूत पक्ष है।
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रोजगार और पलायन: युवाओं के बीच सबसे बड़ा दर्द बेरोजगारी और स्थानीय स्तर पर उद्योगों की कमी का है। कई युवाओं का कहना है कि सिर्फ सड़कों और सुरक्षा से घर नहीं चलता, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार और समय पर सरकारी भर्तियां सबसे बड़ा पैमाना हैं।
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बुनियादी समस्याएं: पानी की किल्लत और कृषि से जुड़े संकट आज भी बुंदेलखंड के कई इलाकों में अहम चुनावी मुद्दे बने हुए हैं। किसानों के बेटे और पढ़ाई कर रहे युवा यह देखना चाहते हैं कि सरकार ने सिंचाई और खेती के आधुनिकीकरण के लिए जमीन पर क्या काम किया है।
