Encounter: हाशिम मूसा ढेर, PoK में LeT की भर्ती रणनीति कितनी गहरी?

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अजमल शाह
अजमल शाह

जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षाबलों को आतंकवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हाथ लगी है। कोराग वन क्षेत्र में हुई एक मुठभेड़ (Budgam Encounter) में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का एक बेहद खतरनाक विदेशी कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा उर्फ फौजी मूसा मारा गया है। मूसा की मौत को कश्मीर घाटी में सक्रिय आतंकी नेटवर्क, विशेषकर पीर पंजाल इलाके के मॉड्यूल के लिए एक करारा झटका माना जा रहा है।

कैसे हुआ एनकाउंटर?

सुरक्षा एजेंसियों को बडगाम के यूसमर्ग और दूधपथरी के ऊपरी इलाकों में आतंकियों की मौजूदगी की पुख्ता खुफिया जानकारी मिली थी। सूचना के आधार पर भारतीय सेना की चिनार कोर, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने गुरुवतकलां स्थित कोराग वन क्षेत्र की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया।

जब सुरक्षाबलों की टीम संदिग्ध ठिकाने के पास पहुंची, तो छिपे हुए आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवानों की सटीक और त्वरित जवाबी कार्रवाई में आतंकी हाशिम मूसा ढेर हो गया। सेना की चिनार कोर ने इस सफल ऑपरेशन की आधिकारिक पुष्टि की है।

पाकिस्तानी सेना से था गहरा नाता, नाम पड़ा था ‘फौजी’

सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, हाशिम मूसा मूल रूप से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) का रहने वाला था। उसके पिता पाकिस्तानी सेना में अपनी सेवाएं दे चुके थे। पारिवारिक सैन्य पृष्ठभूमि के कारण उसे विशेष ट्रेनिंग मिली थी।

घाटी में उसे ‘फौजी’ उपनाम से भी जाना जाता था। यह नाम उसे उसके सैन्य शैली के पहनावे और एडवांस ट्रेनिंग के कारण मिला था। खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मूसा की ट्रेनिंग पाकिस्तानी सेना या उसके स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) जैसी थी, जिसने उसे एक बेहद शातिर आतंकी बना दिया था।

इन बड़े आतंकी हमलों का था मास्टरमाइंड

मूसा लंबे समय तक पुंछ-राजौरी क्षेत्र में सक्रिय रहा और बाद में पीर पंजाल की दुर्गम पहाड़ियों के रास्ते कश्मीर घाटी में घुसपैठ कर अपना नेटवर्क फैलाया। वह लश्कर के एक बड़े सिंडिकेट का अहम हिस्सा था, जिसके तार कई बड़े हमलों से जुड़े थे:

  • पहलगाम हमला: इस हमले की जांच में मूसा का नाम सामने आने के बाद से ही वह एजेंसियों के रडार पर था।

  • दिसंबर 2023: डेरा की गली हमला।

  • मई 2024: पुंछ में वायुसेना के काफिले पर हमला।

  • अक्टूबर 2024: गुलमर्ग के पास बोटा पाथरी हमला।

सिंडिकेट का आखिरी बचा आतंकी था मूसा

इस खतरनाक मॉड्यूल में मूसा के साथ यासिर, जुनैद अहमद भट और सुलेमान शाह भी शामिल थे। सुरक्षाबलों ने इस गिरोह के आतंकियों को एक-एक कर ठिकाने लगाया।

  • दिसंबर 2024 में गगनगीर टनल हमले में शामिल जुनैद मारा गया।

  • जुलाई 2025 में सुलेमान शाह को श्रीनगर के बाहरी इलाके में ढेर किया गया।

  • 5 सितंबर को यूसमर्ग की पहाड़ियों में हुए एनकाउंटर में यासिर मारा गया था, लेकिन मूसा उस वक्त बाल-बाल बच निकला था।

यासिर के खात्मे के बाद इस पूरे ग्रुप का केवल मूसा ही आखिरी सक्रिय बड़ा आतंकी बचा था, जिसे अब कोराग के जंगलों में सुरक्षाबलों ने हमेशा के लिए शांत कर दिया है।

लश्कर-ए-तैयबा (LeT) की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में भर्ती रणनीति

लश्कर-ए-तैयबा (LeT) लंबे समय से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को अपने आतंक नेटवर्क का महत्वपूर्ण आधार बनाकर रखे हुए है। यह क्षेत्र भौगोलिक निकटता, नियंत्रण रेखा (LoC) की पहुंच और स्थानीय संसाधनों के कारण संगठन के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। खुले स्रोतों, खुफिया रिपोर्टों और शोध अध्ययनों के आधार पर इसकी भर्ती रणनीति का व्यापक विश्लेषण इस प्रकार है।ऐतिहासिक और सामरिक पृष्ठभूमि1990 के दशक से LeT ने कश्मीर को अपना मुख्य मोर्चा बनाया। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (ISI) के समर्थन से संगठन ने PoK को प्रशिक्षण शिविरों, लॉजिस्टिक्स और भर्ती का केंद्र बनाया। मुजफ्फराबाद और आसपास के इलाके लंबे समय तक इसके प्रमुख केंद्र रहे। संगठन की रणनीति का मूल उद्देश्य भारतीय पक्ष में घुसपैठ और आतंक फैलाने के लिए तैयार कैडर तैयार रखना रहा है। PoK को “फॉरवर्ड बेस” की तरह इस्तेमाल किया जाता रहा, जहां से ऑपरेशनल क्षमता बनाए रखी जाती है।भर्ती के प्रमुख स्रोत और पैटर्नअध्ययनों (जिनमें मारे गए आतंकियों की बायोग्राफी पर आधारित शोध शामिल हैं) के अनुसार, LeT के अधिकांश लड़ाकू पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से आते हैं। PoK स्थानीय युवाओं की भर्ती भी होती है, लेकिन मुख्य आधार पंजाबी युवक रहे हैं। भर्ती के सामान्य माध्यमों में शामिल रहे हैं:

  • मौजूदा सदस्यों और परिवारिक नेटवर्क के जरिए संपर्क।
  • मस्जिदों और मदरसों का उपयोग वैचारिक प्रभाव के लिए।
  • संगठन के साहित्य, भाषणों और प्रचार सामग्री के माध्यम से आकर्षण।

संगठन अक्सर बेरोजगारी, आर्थिक कठिनाइयों और धार्मिक-वैचारिक भावनाओं का फायदा उठाता है। “शहीद” परिवारों को सहायता देने जैसी गतिविधियों के जरिए भी समर्थन जुटाया जाता है। हाल के वर्षों में रिपोर्ट्स में PoK में रैलियों और बंद कमरों की बैठकों के जरिए स्थानीय युवाओं को जुटाने के प्रयास बताए गए हैं।हालिया रुझान2025-2026 की खुफिया रिपोर्ट्स में LeT द्वारा PoK में भर्ती अभियान तेज करने के संकेत मिले हैं। कुछ कमांडरों द्वारा मिर्पुर, कोटली और पूंछ जैसे इलाकों में सक्रियता बताई गई। उद्देश्य नए शिविर स्थापित करना और क्रॉस-बॉर्डर गतिविधियों के लिए कैडर तैयार रखना बताया जाता है। भारतीय कार्रवाइयों (जैसे ऑपरेशन सिंदूर) के बाद संगठन ने कुछ अवसंरचना को स्थानांतरित करने या पुनर्निर्माण के प्रयास भी किए हैं।प्रभाव और चुनौतियांयह रणनीति क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती पैदा करती है। PoK की भौगोलिक स्थिति घुसपैठ को आसान बनाती है, जबकि स्थानीय और पंजाबी युवकों का मिश्रण नेटवर्क को लचीला रखता है। भारतीय सुरक्षा बलों की कार्रवाइयों ने कई मॉड्यूल को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन भर्ती का चक्र पूरी तरह नहीं रुका है।कुल मिलाकर, LeT की PoK रणनीति वैचारिक प्रचार, स्थानीय संसाधनों के दोहन और बाहरी समर्थन का मिश्रण है। यह संगठन को लंबे समय तक सक्रिय रखने में मदद करती रही है। इसका मुकाबला केवल सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि सीमा पार प्रभाव, स्थानीय विकास और वैचारिक स्तर पर काउंटर-नैरेटिव से भी करना होगा। सुरक्षा एजेंसियां लगातार इन गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं।