प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत का राज गहराया, रिपोर्ट में गंभीर खुलासा

7a103d94c8b3560b62556d9137e35946717b924fdbe14392dc02bf4c17e74f54
महेंद्र सिंह
महेंद्र सिंह

मथुरा के वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के 25 वर्षीय साधक रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत से जुड़ी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ गई है। इस रिपोर्ट ने मौत की असली वजह और घटना के बाद शरीर पर मौजूद चोटों की स्थिति को पूरी तरह साफ कर दिया है। इसे एक मेडिको-लीगल केस माना गया है, जिसमें सिर, छाती और प्राइवेट पार्ट पर गंभीर चोटों का विस्तार से जिक्र किया गया है।

अत्यधिक खून बहने से हुई मौत

26 सितंबर को दोपहर 2 बजे से 2:40 बजे के बीच डॉक्टरों के पैनल ने साधक के शव का पोस्टमार्टम किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, रसिक दुलारी शरण की मौत ‘हेमरेजिक शॉक’ (Hemorrhagic Shock) के कारण हुई है। आसान शब्दों में, शरीर पर आई कई गंभीर चोटों के चलते बहुत ज्यादा खून बह गया, जो अंततः उनकी मौत का कारण बना।

सिर पर 14 टांके और प्राइवेट पार्ट कटा हुआ मिला

मृतक के शरीर की बाहरी जांच में कई खौफनाक चोटें दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, शरीर दो हिस्सों में पाया गया, जिसमें उनका प्राइवेट पार्ट शरीर से अलग था।

बाहरी हिस्से में मुख्य रूप से पांच गहरी चोटें पाई गईं:

  • सिर पर 14 टांके लगा हुआ घाव मौजूद था।

  • बाएं निचले होंठ पर फटने का निशान था।

  • ठुड्डी (Chin) पर भी फटा हुआ घाव पाया गया।

  • प्राइवेट पार्ट पर पांच टांके लगा घाव था।

  • टखने से लेकर पैर तक एक बड़ा फटा हुआ घाव मिला।

अंदरूनी जांच: टूटी पसलियां और फटा बायां फेफड़ा

पोस्टमार्टम के दौरान शरीर के अंदरूनी हिस्सों की स्थिति भी बेहद गंभीर पाई गई। खोपड़ी के पीछे वाले हिस्से में हेयरलाइन फ्रेक्चर था और वहां खून का थक्का जमा हुआ मिला। मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक का दिमाग बिल्कुल पीला पड़ चुका था।

छाती की चोटों का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि बाईं तरफ की 5 से 8 नंबर तक की पसलियां टूटी हुई थीं। उनका बायां फेफड़ा फटा हुआ था और दोनों फेफड़े पीले पड़ चुके थे। छाती की गुहा (Chest cavity) में खून और खून के बड़े थक्के जमे हुए पाए गए।

डॉक्टरों ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि प्राइवेट पार्ट कटा हुआ था, लेकिन गुदा (Anus) वाले हिस्से में किसी प्रकार की कोई चोट नहीं मिली। इसके अलावा, पोस्टमार्टम प्रक्रिया के दौरान रीढ़ की हड्डी को नहीं खोला गया।