BSP में बदलाव, आकाश की जिम्मेदारी गई; ईशान को 15 राज्यों की कमान

उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रमुख विपक्षी दल बहुजन समाज पार्टी (BSP) के भीतर अंदरूनी कलह और बड़े संगठनात्मक बदलावों ने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाते हुए अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद को पार्टी के अहम पदों से हटा दिया है। वहीं, उनके छोटे भाई ईशान आनंद (ईशू) को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए करीब 15 राज्यों का मुख्य सेक्टर प्रभारी बना दिया गया है। इस बीच, लगातार हो रहे फेरबदल के बाद आकाश आनंद ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर एक बार फिर बायो बदलकर खुद को सिर्फ ‘समर्थक’ बता दिया है।
आकाश आनंद का घटा कद, प्रोफाइल में फिर बदलाव
पिछले कुछ वर्षों से बसपा में उत्तराधिकारी के तौर पर उभरे आकाश आनंद का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है।
-
इसी महीने 3 सितंबर को पार्टी की राष्ट्रीय बैठक में मायावती ने उन्हें ‘अपरिपक्व’ बताते हुए राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटा दिया था।
-
इसके तुरंत बाद आकाश ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से ‘नेशनल कन्वीनर’ का पद हटाकर खुद को ‘पार्टी वर्कर’ लिख लिया था।
-
रविवार को उन्होंने एक बार फिर बदलाव करते हुए ‘पार्टी वर्कर’ की जगह खुद को ‘BSP समर्थक’ कर लिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव पार्टी से उनकी बढ़ती दूरियों और आंतरिक नाराजगी की तरफ इशारा करता है। हालांकि, आकाश की तरफ से पार्टी छोड़ने को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
ईशान आनंद को मिली 15 राज्यों की बड़ी जिम्मेदारी
एक तरफ जहां आकाश आनंद हाशिए पर जाते दिख रहे हैं, वहीं मायावती ने उनके छोटे भाई ईशान आनंद को संगठन में मुख्यधारा से जोड़ दिया है।
-
ईशान आनंद को बसपा का ‘मुख्य सेक्टर प्रभारी’ नियुक्त किया गया है।
-
उन्हें पश्चिम बंगाल और ओडिशा समेत करीब 15 राज्यों में पार्टी के संगठनात्मक कामकाज की समीक्षा का जिम्मा सौंपा गया है।
-
वे इन राज्यों के सेक्टर प्रभारियों से रिपोर्ट लेकर अपनी समीक्षा सीधे मायावती और अपने पिता व पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार को सौंपेंगे।
मायावती का सख्त संदेश: नियंत्रण पूरी तरह हाथ में
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती ने यह कदम पार्टी के भीतर किसी दूसरे समानांतर सत्ता केंद्र के उभरने की संभावना को खत्म करने के लिए उठाया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नेतृत्व को यह आशंका थी कि आकाश कुछ पूर्व नेताओं के प्रभाव में आकर टिकट वितरण और आर्थिक प्रबंधन जैसे मामलों में दखल दे रहे थे।
इस बदलाव के बाद अब मायावती ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से जुड़े सभी चुनावी और संगठनात्मक फैसलों की कमान सीधे लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय (9 मॉल एवेन्यू) से अपने हाथों में ले ली है।
चुनौतियों के दौर से गुजर रही बसपा
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के भीतर इस प्रकार की पारिवारिक और संगठनात्मक उठापटक ऐसे समय में हो रही है जब राज्य में बसपा के पास एक भी विधायक नहीं है। पारंपरिक दलित (खासकर जाटव) वोट बैंक को बचाने और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के नेता चंद्रशेखर आजाद के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव का मुकाबला करने जैसी बड़ी चुनौतियां इस वक्त मायावती के सामने खड़ी हैं। ऐसे में देखना यह होगा कि पार्टी का यह नया समीकरण आगामी चुनावों में क्या गुल खिलाता है।
