योगी के CM बने के बाद गोरखपुर में का बदलल? 17 से 26 तक बदलत तस्वीर

cm yogi

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गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

एगो समय रहे जब पूर्वांचल के सबसे बड़ा शहर गोरखपुर के चर्चा अक्सर बाढ़, इंसेफेलाइटिस, बंद खाद कारखाना, खराब सड़क आ रोजगार के कमी खातिर होत रहे। बाकिर 2017 के बाद शहर के तस्वीर में धीरे-धीरे बदलाव देखे के मिलल। आज गोरखपुर में AIIMS बा, बंद पड़ल खाद कारखाना फेर से चालू हो गइल बा, नया एक्सप्रेसवे बन गइल, एयर कनेक्टिविटी बढ़ल बा, चिड़ियाघर खुलल बा आ GIDA के आसपास उद्योग लगावे के रफ्तार तेज भइल बा।

बाकिर एह कहानी के पूरा सच ई भी बा कि हर परियोजना 2017 के बाद शुरू ना भइल रहे। AIIMS आ खाद कारखाना के शिलान्यास जुलाई 2016 में हो चुकल रहे। असली सवाल इहे बा कि 2017 के बाद गोरखपुर में इन परियोजनन के साथ-साथ नया का जुड़ल आ शहर के अर्थव्यवस्था के दिशा कतना बदलल?

 AIIMS से पूर्वांचल के स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव

गोरखपुर के सबसे बड़ा बदलाव में AIIMS के गिनती हो सकेला। गोरखपुर AIIMS के नींव 22 जुलाई 2016 के पड़ल रहे आ 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एकरा के राष्ट्र के समर्पित कइलें। संस्थान में 750 बेड के अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, AYUSH सुविधा आ छात्रन खातिर हॉस्टल समेत कई सुविधा बनावल गइल। आज AIIMS गोरखपुर में OPD, IPD, सर्जरी आ कई विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा उपलब्ध बा। पूर्वांचल खातिर एकर महत्व एही से समझीं कि गंभीर बीमारी खातिर मरीज के लखनऊ, दिल्ली या बनारस जाए के जरूरत कुछ हद तक कम हो गइल बा।

ध्यान रखे वाला बात: AIIMS के विचार आ शिलान्यास योगी के मुख्यमंत्री बने से पहिले हो चुकल रहे। एह से एकरा के पूरा तरह “योगी सरकार के शुरू कइल परियोजना” कहल ठीक ना होई। हाँ, 2017 के बाद परियोजना के निर्माण तेजी से पूरा भइल आ संस्थान चालू रूप में सामने आइल।

30 साल से बंद खाद कारखाना फेर से धुआं छोड़ल

गोरखपुर खाद कारखाना पूर्वांचल के औद्योगिक पहचान से जुड़ल रहे, बाकिर ई कई दशक तक बंद रहल। 2016 में एकर पुनर्जीवन खातिर नींव पड़ल आ 2021 में करीब ₹8,600 करोड़ के लागत से बनल नया प्लांट राष्ट्र के समर्पित भइल। PIB के मुताबिक प्लांट के क्षमता करीब 12.7 लाख टन यूरिया सालाना बा। यानी गोरखपुर में उद्योग के पुरान निशान खाली याद ना रहल, बल्कि एगो आधुनिक बड़ा औद्योगिक प्लांट के रूप में वापस आइल।

 गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे: शहर के सड़क से उद्योग तक जोड़ल

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे 2017 के बाद गोरखपुर के सबसे महत्वपूर्ण infrastructure projects में से एगो बनल। ई करीब 91.35 किलोमीटर लंबा, चार लेन access-controlled expressway बा, जे गोरखपुर के आजमगढ़ के रास्ते पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ेला। परियोजना पर काम 2020 में शुरू भइल आ 20 जून 2025 के एकर उद्घाटन भइल। एकर सबसे बड़ा असर खाली यात्रा समय पर ना, बल्कि गोरखपुर-आजमगढ़-अंबेडकर नगर-संत कबीर नगर बेल्ट में व्यापार आ उद्योग के connectivity पर पड़ल बा।

 GIDA में उद्योग: गोरखपुर के सबसे दिलचस्प आर्थिक बदलाव

अब आवीं ओह जगह पर जहाँ बदलाव के असली परीक्षा होखेले—गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी GIDA। Invest UP के मुताबिक 2017 से 2025 के बीच गोरखपुर में ₹11,618.75 करोड़ के निवेश आकर्षित भइल। GIDA क्षेत्र में 319 operational units आ करीब 39,448 रोजगार के आंकड़ा दिहल गइल बा। कुछ बड़े निवेश में Keyan Industries, Varun Beverages, Ankur Udyog आ India Auto Wheel जइसन कंपनियन के नाम सामने आवेला। साथे Plastic Park आ Garment Park पर भी काम बतावल गइल बा। एहसे गोरखपुर के अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे सिर्फ परंपरागत व्यापार से निकल के industrial growth centre बने के कोशिश में बा।

 एयरपोर्ट आ पर्यटन: गोरखपुर अब हवाई नक्शा पर मजबूत

गोरखपुर एयरपोर्ट पर यात्री संख्या में लगातार वृद्धि देखे के मिलत बा। AAI के दस्तावेज के मुताबिक 2021-22 में करीब 6.02 लाख passenger movements से बढ़के 2024-25 में 8.82 लाख हो गइल। एयर कनेक्टिविटी बढ़े के मतलब खाली विमान उड़ल ना होला, बल्कि एकर असर व्यापार, निवेश, पर्यटन आ शिक्षा सब पर पड़ेला। साथ ही शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) खुलला से रामगढ़ताल और गोरखनाथ मंदिर के साथ परिवारिक पर्यटन खातिर एगो नया combination बन गइल बा।

बाकिर का सब कुछ बदल गइल?

एगो निष्पक्ष हिसाब जरूरी बा। शहर में infrastructure आ investment में बदलाव जरूर दिखाई देता, बाकिर गोरखपुर के सामने आज भी कई चुनौती बा:

  • तेजी से बढ़त urban population आ traffic congestion

  • जलभराव की समस्या

  • रोजगार के quality आ industrial pollution

  • शहर के बाहरी इलाकन में basic infrastructure के कमी

यानी सड़क बन गइल मतलब शहर के हर समस्या खत्म हो गइल, अइसन निष्कर्ष निकालल गलत होई।

गोरखपुर में बदलाव के कहानी 2017 में शून्य से शुरू ना भइल, कवनो-कवनो प्रोजेक्ट के foundation पहिले पड़ चुकल रहे। बाकिर 2017 के बाद परियोजनन के completion, सड़क infrastructure, GIDA investment आ airport connectivity सब एकसाथ तेजी से आगे बढ़ल। आज पहिले के सवाल “गोरखपुर में उद्योग कब आई?” से बदल के इ हो गइल बा कि “गोरखपुर के अगिला industrial growth story का होई?” आ असली परीक्षा इहे बा कि इ निवेश जमीन पर आम आदमी के जीवन में कतना बदलाव लावत बा।

Resident Editor | विशेष रिपोर्ट