चीन के साथ ब्रुनेई की ‘Quiet Diplomacy’, विवादों के बीच शांति पर जोर

Halbi Mohammad Yussof
अजमल शाह
अजमल शाह

ब्रुनेई ने दक्षिण चीन सागर (South China Sea) के विवादित क्षेत्र में अपने रुख को बेहद संयमित रखा है। बीजिंग में आयोजित 13वें जियांगशान फोरम (Beijing Xiangshan Forum) के दौरान ब्रुनेई और चीन के रक्षा अधिकारियों के बीच हुई मुलाकात इसी सधी हुई कूटनीति का हिस्सा है। पिछले हफ्ते ब्रुनेई के रक्षा मंत्री हलबी मोहम्मद युसूफ (Halbi Mohammad Yussof) के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने चीनी रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन (Dong Jun) से मुलाकात की।

इस बैठक में दोनों देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता और व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इसके बावजूद रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रुनेई और चीन के बीच रक्षा संबंध सीमित (modest) ही रहेंगे। इसकी मुख्य वजह समुद्री सीमा के दावे और ब्रुनेई की अन्य सुरक्षा साझेदारों के साथ नेटवर्क को विविधतापूर्ण बनाए रखने की रणनीति है।

विवाद के बीच ‘गैर-संवेदनशील’ सहयोग पर फोकस

चीन के रक्षा मंत्री डोंग जुन ने इसी साल जुलाई में बंदर सेरी बेगवान (Bandar Seri Begawan) का दौरा किया था। उस दौरान ब्रुनेई के सुल्तान हसनल बोल्किया ने रक्षा सहयोग को दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का अहम स्तंभ बताया था। सुल्तान ने चीनी नौसेना के अधिक पोर्ट कॉल्स की भी उम्मीद जताई थी।

सिंगापुर स्थित Iseas-Yusof Ishak Institute के प्रमुख फेलो इयान स्टोरी के मुताबिक ब्रुनेई की छोटी सेना और दक्षिण चीन सागर में विरोधी दावों के कारण दोनों देशों के रक्षा संबंध बेहद सीमित हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देश बड़े पैमाने पर संयुक्त युद्धाभ्यास नहीं करते और न ही ब्रुनेई चीन से हथियार खरीदता है।

ब्रुनेई की रक्षा कूटनीति नियमित संवाद, शैक्षणिक आदान-प्रदान और ASEAN के नेतृत्व वाले सुरक्षा मंचों पर केंद्रित है। इसमें पोर्ट विजिट जैसे छोटे पैमाने के नौसैनिक अभ्यास शामिल हैं। स्टोरी का मानना है कि रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच आगे भी विकास ‘गैर-संवेदनशील’ गतिविधियों तक ही सीमित रहेगा।

ब्रुनेई एक ‘साइलेंट क्लेमेंट’

वियतनाम, फिलीपींस और मलेशिया की तरह ब्रुनेई का भी दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ क्षेत्रीय और समुद्री विवाद है। ब्रुनेई के 200 समुद्री मील के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और कॉन्टिनेंटल शेल्फ का दावा चीन की व्यापक ‘नाइन-डैश लाइन’ के साथ ओवरलैप करता है।

इस विवाद में ब्रुनेई एक “साइलेंट क्लेमेंट” (शांत दावेदार) की तरह काम करता है। वह अकेला ऐसा देश है जिसकी विवादित क्षेत्र में कोई स्थायी सैन्य उपस्थिति नहीं है।

यूएई के रबदान सिक्योरिटी एंड डिफेंस इंस्टीट्यूट के रिसर्च फेलो अब्दुल रहमान याकूब ने बताया कि जब भी चीनी सरकारी या गैर-सरकारी जहाज ब्रुनेई के EEZ में प्रवेश करते हैं, तो वे बाहरी सीमाओं के करीब ही रहते हैं। जब ब्रुनेई की नौसेना उन्हें जाने के लिए कहती है, तो चीनी जहाज बिना किसी टकराव के चले जाते हैं। एक छोटे देश के रूप में ब्रुनेई अपनी सैन्य क्षमताओं से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीति पर निर्भर है। पिछले साल ब्रुनेई और चीन ने दक्षिण चीन सागर में संयुक्त अन्वेषण (joint exploration) के अवसरों पर भी चर्चा की थी।

सुरक्षा साझेदारों में संतुलन

ब्रुनेई अपने सुरक्षा साझेदारों में संतुलन बनाए रखने पर काफी जोर देता है। जिस समय बीजिंग में जियांगशान फोरम चल रहा था, उसी दौरान ब्रुनेई की सेना ने अमेरिकी नौसेना और कोस्ट गार्ड के साथ पांच दिवसीय 27वें वार्षिक CARAT (Cooperation Afloat Readiness and Training) अभ्यास की मेजबानी की, जो शुक्रवार को समाप्त हुआ।

विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रुनेई के सबसे करीबी रक्षा साझेदार ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका ही बने रहेंगे। दूसरी ओर, चीन दक्षिण पूर्व एशिया को अपने ‘बैकयार्ड’ के रूप में देखता है और चाहता है कि इस क्षेत्र में रक्षा और सुरक्षा के मामलों में अमेरिकी प्रभाव कम हो।

शांति स्थापना और कूटनीतिक संवाद

यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रुनेई दारुस्सलाम के लेक्चरर हफीज हाशिम के मुताबिक, ब्रुनेई की चुनौती अन्य बड़े दावेदारों से कुछ अलग है। ब्रुनेई अपने समुद्री अधिकारों की रक्षा करने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना चाहता है कि दक्षिण चीन सागर का विवाद इतना अधिक सुरक्षात्मक (securitised) न हो जाए कि क्षेत्रीय स्थिरता या उसकी अपनी कूटनीतिक जगह ही खत्म हो जाए।

वर्तमान में ब्रुनेई और चीन ADMM-Plus (Asean Defence Ministers’ Meeting-Plus) एक्सपर्ट्स वर्किंग ग्रुप ऑन पीसकीपिंग ऑपरेशंस की सह-अध्यक्षता कर रहे हैं।

हफीज ने स्पष्ट किया कि ब्रुनेई की इस “शांत कूटनीति” को निष्क्रियता नहीं समझना चाहिए। ब्रुनेई सक्रिय रूप से ASEAN नेतृत्व वाले संवाद का समर्थन कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से UNCLOS पर लगातार जोर देता है। ब्रुनेई ने दक्षिण चीन सागर विवाद को चीन के साथ अपने संपूर्ण संबंधों को परिभाषित करने की अनुमति नहीं दी है और वह प्रतिस्पर्धात्मक हितों को अनावश्यक रूप से बढ़ाए बिना उनका प्रबंधन कर रहा है।