Banda: इतिहास, आबादी और चार विधानसभा सीटों का पूरा सियासी समीकरण

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, सूबे में सियासी हलचलें तेज होती जा रही हैं। राजनीतिक दल अपनी रणनीतियां बनाने के लिए हर जिले के सियासी, धार्मिक और जातीय समीकरणों को खंगाल रहे हैं। इसी कड़ी में आज हम बात करेंगे बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित बांदा जिले की।
कालिंजर का ऐतिहासिक किला, चंदेल और बुंदेला शासकों की विरासत और 1857 के विद्रोह में अहम भूमिका बांदा को एक अलग पहचान देती है। मौजूदा समय में भी यह जिला राजनीतिक रूप से बेहद अहम है। आइए जानते हैं बांदा का इतिहास, इसकी भौगोलिक-सामाजिक संरचना और यहां का मौजूदा सियासी समीकरण।
बांदा का ऐतिहासिक सफर
बांदा का इतिहास पाषाण युग से जुड़ा हुआ है। जिला प्रशासन के दस्तावेजों के अनुसार, इस जिले का नाम महर्षि बामदेव के नाम पर पड़ा, जिसे पहले ‘बामदा’ और बाद में ‘बांदा’ कहा जाने लगा।
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कालिंजर का महत्व: बुंदेलखंड के इतिहास में कालिंजर दुर्ग (किला) का विशेष स्थान रहा है, जो चंदेल शासकों की सत्ता का प्रमुख केंद्र था।
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1857 की क्रांति: नवाब अली बहादुर द्वितीय ने यहां से अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा संभाला था। बाद में असहयोग, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो आंदोलन में भी बांदा की सक्रिय भागीदारी रही। 1929 में महात्मा गांधी ने भी बांदा का दौरा किया था।
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प्रशासनिक बदलाव: 1998 में चित्रकूट को अलग जिला बनाया गया। वर्तमान में बांदा जिले का क्षेत्रफल 4,408 वर्ग किलोमीटर है और इसमें पांच तहसीलें (बांदा, नरैनी, बबेरू, पैलानी और अतर्रा) हैं। यह चित्रकूटधाम मंडल का मुख्यालय भी है।
आबादी और साक्षरता का गणित (2011 जनगणना)
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कुल आबादी: 17,99,410 (पुरुष: 9,65,876, महिलाएं: 8,33,534)
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लिंगानुपात: 863 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष।
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साक्षरता दर: जिले की कुल साक्षरता दर 66.67% थी। (पुरुष: 77.78%, महिला: 53.67%)
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धार्मिक समीकरण: हिंदू आबादी लगभग 91% (16,37,549) और मुस्लिम आबादी करीब 8.76% (1,57,612) है।
बांदा का सियासी समीकरण: 4 विधानसभा सीटों का हाल
बांदा जिले में कुल 4 विधानसभा सीटें आती हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि एक सीट समाजवादी पार्टी (सपा) के खाते में गई थी।
1. तिंदवारी (सीट क्रमांक 232): यह बांदा जिले में है, लेकिन लोकसभा स्तर पर यह हमीरपुर संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। 2022 में यहां से भाजपा के रामकेश निषाद ने जीत दर्ज की थी।
2. बबेरू (सीट क्रमांक 233): यह सीट बांदा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यहां भाजपा और सपा के बीच कड़ी टक्कर रहती है। 2022 में सपा के विशंभर सिंह यादव ने यहां से जीत हासिल कर जिले में पार्टी का खाता खोला था।
3. नरैनी (सीट क्रमांक 234 – SC आरक्षित): यह अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीट है। दलित मतदाताओं की बड़ी भूमिका वाली इस सीट पर वर्तमान में भाजपा की ओममनी वर्मा विधायक हैं।
4. बांदा (सीट क्रमांक 235): यह जिले की सबसे प्रमुख शहरी सीट और मुख्यालय है। शहरी विकास, पेयजल और रोजगार यहां के मुख्य मुद्दे रहते हैं। फिलहाल यहां से भाजपा के प्रकाश द्विवेदी विधायक हैं।
2024 लोकसभा चुनाव के बाद बदला माहौल
बांदा लोकसभा सीट के अंतर्गत 5 विधानसभाएं (बबेरू, नरैनी, बांदा, चित्रकूट और मानिकपुर) आती हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की कृष्णा देवी पटेल ने यहां से जीत दर्ज की।
लोकसभा चुनाव के विधानसभा-वार आंकड़ों में सपा को बबेरू, नरैनी और चित्रकूट में बढ़त मिली, जबकि बांदा शहरी सीट पर भाजपा आगे रही। 2022 में भाजपा का दबदबा और 2024 में सपा की शानदार वापसी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में बांदा जिले में मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का होने वाला है। बेरोजगारी, कृषि, सिंचाई का पानी और पलायन यहां चुनाव के सबसे बड़े मुद्दे रहेंगे।
