22 में बदले समीकरण, 24 ने दिया संकेत, अब 2027 में बलिया का क्या होगा?

पूर्वांचल की राजनीति में ‘बागियों की धरती’ कहे जाने वाले बलिया जिले का अपना एक अलग और अहम राजनीतिक मिजाज रहा है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर जिले की सभी सात विधानसभा सीटों पर एक बार फिर कड़ा और दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।
2022 के विधानसभा चुनाव में यहां के मतदाताओं ने किसी एक दल को एकतरफा जनादेश नहीं दिया था। समाजवादी पार्टी (SP) ने तीन सीटें, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दो, जबकि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने एक-एक सीट पर जीत दर्ज की थी। ऐसे में 2027 का चुनाव पूरी तरह से उम्मीदवारों की स्थानीय पकड़ और गठबंधन के नए समीकरणों पर निर्भर करेगा।
बलिया की सात सीटों का 2022 का रिजल्ट
बलिया जिले में बैरिया, बलिया नगर, बांसडीह, बेल्थरा रोड (सुरक्षित), फेफना, रसड़ा और सिकंदरपुर विधानसभा सीटें आती हैं। 2022 के चुनावी आंकड़े कुछ इस प्रकार रहे:
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बैरिया: जय प्रकाश अंचल (सपा) – 12,951 वोटों से जीते
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बलिया नगर: दयाशंकर सिंह (बीजेपी) – 26,239 वोटों से जीते
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बांसडीह: केतकी सिंह (बीजेपी) – 21,352 वोटों से जीतीं
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बेल्थरा रोड (SC): हंसू राम (सुभासपा) – 5,514 वोटों से जीते
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फेफना: संग्राम सिंह (सपा) – 19,354 वोटों से जीते
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रसड़ा: उमाशंकर सिंह (बसपा) – 6,583 वोटों से जीते
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सिकंदरपुर: जियाउद्दीन रिजवी (सपा) – 11,855 वोटों से जीते
आंकड़े बताते हैं कि बलिया नगर और बांसडीह में भाजपा ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी, जबकि बेल्थरा रोड और रसड़ा जैसी सीटों पर जीत-हार का फासला बेहद कम था।
सपा के सामने किला बचाने और ‘PDA’ को साधने की चुनौती
2022 में सिकंदरपुर, फेफना और बैरिया जीतकर जिले में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी समाजवादी पार्टी के सामने 2027 में अपने इस राजनीतिक आधार को बचाए रखने की चुनौती है।
सपा इस बार अपने ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समीकरण के जरिए बूथ स्तर पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी के लिए उम्मीदवार चयन भी एक बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा, सपा को कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन के तहत सीट बंटवारे का पेंच भी सुलझाना होगा।
BJP का फोकस कमजोर बूथों पर, बलिया नगर और बांसडीह अहम
भाजपा के लिए अपनी दो मजबूत सीटों—बलिया नगर और बांसडीह—पर जीत का सिलसिला बरकरार रखना पहली प्राथमिकता होगी।
2024 के लोकसभा चुनाव में बलिया सीट गंवाने के बाद पार्टी हाईकमान पूरी तरह अलर्ट मोड में है। भाजपा की प्रदेशव्यापी रणनीति के तहत बलिया के उन कमजोर बूथों की विशेष रूप से पहचान की जा रही है, जहां लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी का वोट बैंक खिसका था। यहां स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
बेल्थरा रोड और रसड़ा के दिलचस्प समीकरण
जिले की सुरक्षित सीट बेल्थरा रोड (SC) पर सबकी नजरें टिकी हैं। 2022 में यह सीट सुभासपा ने सपा के साथ गठबंधन में रहकर जीती थी, लेकिन अब सुभासपा एनडीए का हिस्सा है। ऐसे में यहां दलित मतदाताओं का झुकाव जीत-हार तय करेगा।
वहीं, रसड़ा विधानसभा सीट बलिया में बसपा का इकलौता गढ़ बनी हुई है। 2022 में बसपा के उमाशंकर सिंह ने सुभासपा को करीबी मुकाबले में हराया था। 2027 में यह देखना अहम होगा कि बसपा यहां अपना दबदबा कायम रख पाती है या सपा-बीजेपी कोई नया सामाजिक गठजोड़ तैयार कर पाती हैं।
2024 के लोकसभा नतीजों ने बदल दी है तस्वीर
2024 के लोकसभा चुनाव के परिणाम विधानसभा चुनावों से बिल्कुल अलग रहे। बलिया लोकसभा सीट पर सपा के सनातन पांडेय ने भाजपा के नीरज शेखर को 43,384 वोटों से हरा दिया।
लोकसभा चुनाव में यहां मुकाबला मुख्य रूप से सपा और भाजपा के बीच सिमट गया था, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में चार अलग-अलग दलों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। ऐसे में 2027 के चुनाव में सड़क, स्वास्थ्य, बाढ़, रोजगार और किसानों के स्थानीय मुद्दे हर सीट के समीकरण को नए सिरे से तय करेंगे।

