आकाश आनंद की ‘परमानेंट इंटर्नशिप’! माया ने फिर क्यों रोकी बड़ी जिम्मेदारी?

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ASHISH SHARMA RISHI
ASHISH SHARMA RISHI

बहुजन समाज पार्टी (BSP) में आकाश आनंद की सियासी उड़ान एक बार फिर टेकऑफ से पहले ही रोक दी गई है। पार्टी की अहम बैठकों से उनका किनारा किया जाना और बुआ मायावती द्वारा उन्हें ‘अपरिपक्व’ बताना इस बात का संकेत है कि उनके भतीजे और पार्टी के घोषित उत्तराधिकारी की ‘पॉलिटिकल ट्रेनिंग’ अभी तक पूरी नहीं हुई है।

सियासी ‘किड्स टेबल’ पर वापसी

  • सियासत का प्रीलिम्स: देश की राजनीति में जहां अन्य राजनीतिक घरानों के युवा नेता सीधे हेलीकॉप्टर से उतरकर पार्टी हाईकमान की कुर्सी पर बैठ जाते हैं, वहीं आकाश आनंद को मानो सियासी ‘यूपीएससी’ क्लीयर करने के बाद भी दोबारा ‘प्रीलिम्स’ देने के लिए भेज दिया गया है।

  • बड़ों की पंचायत से दूरी: बीएसपी की हालिया वीआईपी बैठक में आकाश को न बुलाए जाने का दर्द कुछ वैसा ही है, जैसे घर में कोई बड़ी प्रॉपर्टी की पंचायत बैठी हो और युवा बेटे को मेहमानों के लिए बाहर से समोसे लाने भेज दिया गया हो।

हर अप्रैजल में ‘यू नीड मोर एक्सपीरियंस’

यह लगातार तीसरा मौका है जब आकाश को बड़ी जिम्मेदारी का सपना दिखाकर वापस किनारे कर दिया गया है। उनकी स्थिति बिल्कुल उस हताश कॉर्पोरेट एम्पलॉयी जैसी हो गई है, जिसका बॉस हर साल अप्रैजल मीटिंग में अनुभव की कमी का हवाला देकर प्रमोशन रोक देता है। हर बड़े चुनाव से पहले उन्हें एक नए लॉन्च पैड पर बिठाया जाता है, जनता से ‘उत्तराधिकारी’ के रूप में परिचय कराया जाता है, और फिर ठीक उड़ान से पहले बुआ जी लाल बटन दबाकर लॉन्चिंग रोक देती हैं।

आखिर कहां मिलेगा ‘परिपक्वता’ का सर्टिफिकेट?

यूपी की राजनीति में जहां कल के आए नेता आज खुद को ‘चाणक्य’ समझने लगते हैं, वहां आकाश आनंद को बार-बार ‘सियासी हॉर्लिक्स’ पीने की सलाह मिल रही है।

अब सवाल यह है कि राजनीति में यह ‘परिपक्वता’ आखिर है क्या? क्या यह मंच से गोलमोल बयान देने की कला है या हर तीखे मुद्दे पर रहस्यमयी चुप्पी साधे रहने का हुनर? फिलहाल आकाश के लिए शायद सबसे सुरक्षित रास्ता यही है कि वे अपने युवा लुक को छोड़कर, चेहरे पर एक स्थायी राजनीतिक शिकन और मोटे फ्रेम का चश्मा पहनना शुरू कर दें। क्योंकि जब तक मायावती के ‘मैच्योरिटी मीटर’ की सुई आगे नहीं बढ़ती, आकाश को अपनी ही पार्टी में एक ‘ट्रेनी राजनेता’ के पद पर ही संतोष करना पड़ेगा।