14 राज्यों में एक्शन, 200+ गिरफ्तार; अमित शाह ने बताया क्या मिला?

स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले देश के कई राज्यों में चले एक समन्वित सुरक्षा अभियान को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को बड़ा दावा किया। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से कथित तौर पर जुड़े शहजाद भट्टी नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया और 200 से ज्यादा ऑपरेटिव्स को गिरफ्तार किया गया। उनके मुताबिक, कार्रवाई का मकसद संभावित विध्वंसक गतिविधियों को स्वतंत्रता दिवस से पहले रोकना था।
अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अलग-अलग राज्यों में एक साथ चलाए गए अभियान में सुरक्षा एजेंसियों ने नेटवर्क से जुड़े लोगों को पकड़ा और उनके पास से IED, ग्रेनेड, पिस्तौल, जिंदा कारतूस तथा निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे CCTV कैमरे बरामद किए। गृह मंत्री ने इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का उदाहरण बताया।
12 अगस्त को शुरू हुआ समन्वित अभियान
गृह मंत्री के बयान के मुताबिक, कार्रवाई 12 अगस्त को राज्य पुलिस बलों के साथ रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग सिस्टम के जरिए की गई। उपलब्ध विवरण में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक, गुजरात, बिहार, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल में अभियान चलाए जाने की बात कही गई है।
दिए गए आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा गिरफ्तारियां उत्तर प्रदेश में 62 बताई गई हैं। इसके बाद हरियाणा में 52, दिल्ली में 51 और पंजाब में 44 गिरफ्तारियां बताई गई हैं। राजस्थान में 15, महाराष्ट्र में 8 और उत्तराखंड में 5 लोगों की गिरफ्तारी का दावा है। गुजरात, कर्नाटक और बिहार में तीन-तीन तथा तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल में दो-दो गिरफ्तारियां बताई गई हैं।
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण आंकड़ा-संबंधी सवाल भी सामने आता है। इन राज्यों में दी गई गिरफ्तारियों की संख्या जोड़ने पर कुल आंकड़ा 200 से अधिक निकलता है। इसलिए गृह मंत्री के ‘200 से ज्यादा’ वाले व्यापक आंकड़े और राज्यवार संख्या को अलग-अलग संदर्भ में पढ़ना होगा। उपलब्ध सामग्री यह स्पष्ट नहीं करती कि सभी गिरफ्तारियां एक ही मामले में दर्ज हैं या नेटवर्क से जुड़े अलग-अलग मामलों और मॉड्यूल्स की संयुक्त कार्रवाई का हिस्सा हैं।
हथियारों से लेकर निगरानी उपकरण तक बरामदगी का दावा
सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से बताया गया है कि अभियान के दौरान IED, हथियार, जिंदा कारतूस और ग्रेनेड बरामद किए गए। कुछ ग्रेनेड पर पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री की मार्किंग होने का दावा भी किया गया है। इसके अलावा पिस्तौल और ऐसे CCTV कैमरे मिलने की बात कही गई है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर निगरानी या रेकी के लिए किया जा रहा था।
इन बरामदगियों का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि जांच एजेंसियां शहजाद भट्टी से जुड़े नेटवर्क पर पहले भी हथियारों की तस्करी, आतंकी मॉड्यूल और संवेदनशील ठिकानों की कथित रेकी से जुड़े मामलों में कार्रवाई कर चुकी हैं। जून में दिल्ली पुलिस ने भट्टी से जुड़े कथित पाकिस्तान समर्थित सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई में सात लोगों की गिरफ्तारी की थी और हथियार, गोला-बारूद तथा डिजिटल सामग्री बरामद करने की जानकारी दी थी।
जुलाई में दिल्ली पुलिस की एक अन्य कार्रवाई में भट्टी से जुड़े दो मॉड्यूल्स पर कार्रवाई की गई थी। पुलिस के अनुसार, इनमें एक कथित आतंकी गतिविधियों से और दूसरा अवैध हथियारों की तस्करी से जुड़ा था।
सुरक्षा एजेंसियों की जांच में क्या सामने आया?
भारतीय एजेंसियां शहजाद भट्टी को पाकिस्तान स्थित आपराधिक-आतंकी नेटवर्क से जोड़कर जांच कर रही हैं। विभिन्न मामलों में जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया और दूसरे डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल भारतीय युवाओं को नेटवर्क से जोड़ने, उन्हें प्रभावित करने और संभावित स्लीपर मॉड्यूल तैयार करने के लिए किया गया।
इससे पहले उत्तर प्रदेश में हुई कार्रवाई में एजेंसियों ने कुछ संदिग्धों पर संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों की रेकी करने और अपने कथित पाकिस्तानी हैंडलर्स को जानकारी भेजने का आरोप लगाया था। वहीं जून में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पंजाब और हरियाणा में भट्टी से जुड़े कथित नेटवर्क की जांच के तहत कई स्थानों पर तलाशी ली थी। एनआईए के मुताबिक, कार्रवाई पुलिस प्रतिष्ठानों पर हमलों और पंजाब में हुए एक ग्रेनेड हमले से जुड़े मामलों की जांच का हिस्सा थी।
यानी 12 अगस्त की कार्रवाई को किसी एक दिन की अलग घटना के बजाय पिछले कई महीनों से चल रही जांच और अलग-अलग राज्यों में सामने आए मॉड्यूल्स के व्यापक नेटवर्क की कड़ी के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, प्रत्येक गिरफ्तार व्यक्ति की भूमिका और नेटवर्क से उसका संबंध जांच पूरी होने तथा संबंधित मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों से ही स्पष्ट होगा।
‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का शाह ने किया जिक्र
अमित शाह ने इस ऑपरेशन को आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति से जोड़ा। उनका कहना है कि स्वतंत्रता दिवस से पहले संभावित आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए एजेंसियों ने खुफिया जानकारी साझा कर कई राज्यों में एक साथ कार्रवाई की।
सुरक्षा अभियानों में रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग का इस्तेमाल इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि किसी एक राज्य में मिले इनपुट को दूसरे राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों तक तेजी से पहुंचाया जा सके। इस मामले में भी उपलब्ध विवरण के अनुसार कार्रवाई अलग-अलग राज्यों में एक समन्वित तरीके से की गई।
लेकिन गिरफ्तारी की संख्या अपने आप में किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं करती। गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ आरोपों की जांच, बरामद सामग्री की फॉरेंसिक जांच, डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण और अदालत में आरोपों का परीक्षण आगे की कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा होगा।
नेटवर्क पर पहले से कसता आ रहा है शिकंजा
शहजाद भट्टी का नाम पिछले कुछ महीनों में भारत में सामने आए कई कथित आतंकी और आपराधिक मॉड्यूल्स की जांच में सामने आया है। दिल्ली पुलिस, उत्तर प्रदेश एटीएस, महाराष्ट्र एटीएस और एनआईए जैसी एजेंसियां अलग-अलग मामलों में उससे जुड़े कथित नेटवर्क की जांच कर चुकी हैं।
मई में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसियों को आशंका थी कि भट्टी सोशल मीडिया के जरिए भारत में अपना नेटवर्क बढ़ाने की कोशिश कर रहा था। उसी दौरान अलग-अलग राज्यों में उसके कथित सहयोगियों और मॉड्यूल्स के खिलाफ कार्रवाई की खबरें सामने आई थीं।
इसलिए 12 अगस्त का अभियान सुरक्षा एजेंसियों के लिए केवल गिरफ्तारी अभियान नहीं, बल्कि कथित सीमा-पार नेटवर्क की भारत में मौजूद कड़ियों को पहचानने और उन्हें निष्क्रिय करने की कोशिश के तौर पर सामने आता है।
अब जांच का अगला चरण अहम
200 से ज्यादा गिरफ्तारियों और बड़ी मात्रा में हथियारों की बरामदगी के दावे के बाद जांच का अगला फोकस नेटवर्क की पूरी संरचना, फंडिंग, संपर्कों और कथित सीमा-पार निर्देशों को स्थापित करने पर होगा। खासतौर पर डिजिटल उपकरणों और CCTV कैमरों से मिलने वाली जानकारी जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि इससे कथित रेकी, संपर्क और नेटवर्क के संचालन की कड़ियों की जांच की जा सकती है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी का सबसे मजबूत तथ्य यह है कि केंद्र सरकार ने स्वतंत्रता दिवस से पहले बहु-राज्यीय कार्रवाई और 200 से अधिक गिरफ्तारियों का दावा किया है। सुरक्षा एजेंसियां इसे शहजाद भट्टी से जुड़े कथित ISI समर्थित नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बता रही हैं। दूसरी तरफ, इस पूरे मामले में गिरफ्तार लोगों की व्यक्तिगत भूमिका, आरोपों की कानूनी स्थिति और बरामद सामग्री का अंतिम साक्ष्यात्मक महत्व जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होगा।
भारत में भट्टी से जुड़े कथित नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई इससे पहले भी कई राज्यों में सामने आ चुकी है। इसलिए 12 अगस्त का अभियान एक व्यापक जांच की अगली कड़ी दिखाई देता है—और अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कितने लोग गिरफ्तार हुए, बल्कि यह है कि इन गिरफ्तारियों से कथित सीमा-पार नेटवर्क की कौन-कौन सी कड़ियां सामने आती हैं।
