खालिद की डॉक्यूमेंट्री पर बवाल, ABVP- कैंपस को न बनाएं राजनीतिक मंच

दिल्ली दंगों की साजिश के आरोप में जेल में बंद उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। बेंगलुरु के प्रतिष्ठित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) में ललित वचानी द्वारा निर्देशित डॉक्यूमेंट्री ‘प्रिजनर नंबर 626710 इज़ प्रेजेंट’ की प्रस्तावित स्क्रीनिंग का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कड़ा विरोध किया है।
एबीवीपी ने 13 सितंबर को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर शैक्षणिक परिसरों में ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है।
‘देश-विरोधी गतिविधियों से जुड़े शख्स का महिमामंडन क्यों?’
एबीवीपी ने अपने बयान में कहा है कि शैक्षणिक परिसरों का इस्तेमाल ऐसे व्यक्ति से जुड़ी स्क्रीनिंग के लिए किया जा रहा है, जिसका नाम लगातार विवादों में रहा है।
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विवादों का हवाला: छात्र संगठन ने याद दिलाया कि उमर खालिद का नाम जेएनयू (JNU) विवाद के दौरान देश-विरोधी नारे लगाने, संसद हमले के दोषी अफजल गुरु के समर्थन में कार्यक्रम करने, सीएए-एनआरसी (CAA-NRC) विरोध-प्रदर्शनों और 2020 के दिल्ली दंगों में भड़काऊ गतिविधियों से जुड़ा रहा है।
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राष्ट्रीय अखंडता पर जोर: एबीवीपी ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक परिसरों को राजनीतिक प्रचार या नागरिक अशांति को बढ़ावा देने वाला मंच नहीं बनने देना चाहिए, बल्कि इन्हें शिक्षा और राष्ट्रीय अखंडता के प्रति समर्पित रहना चाहिए।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल, कार्यक्रम रद्द करने की मांग
छात्र संगठन का आरोप है कि उन्होंने NLSIU प्रशासन को ईमेल के जरिए औपचारिक शिकायत सौंपकर कार्यक्रम रोकने की मांग की थी, लेकिन प्रशासन की तरफ से अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। एबीवीपी के बेंगलुरु महानगर सचिव अभिनंदन मिर्जी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि संस्थान की गरिमा को बनाए रखने के लिए प्रशासन तत्काल प्रभाव से इस कार्यक्रम की सभी अनुमतियों को रद्द करे।
अभी भी जेल में बंद है उमर खालिद
उमर खालिद फरवरी 2020 में हुए उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोप में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत लंबे समय से जेल में बंद है। हाल ही में दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में उसकी नई जमानत अर्जियों का जोरदार विरोध किया था। पुलिस ने इन अर्जियों को गैरकानूनी और अदालत को गुमराह करने की कोशिश करार देते हुए कहा कि आरोपी सुप्रीम कोर्ट के आदेश को दरकिनार कर किसी अन्य मामले के फैसले को अपनी जमानत का नया आधार बनाने का प्रयास कर रहा है।
