स्मार्ट खेती से पानी की बचत तक, अबू धाबी का नया फूड सिक्योरिटी मिशन

अबू धाबी: अबू धाबी ने खाद्य सुरक्षा और कृषि क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक व्यापक दीर्घकालिक रणनीति का अनावरण किया है। एडनेक (ADNEC) सेंटर में आयोजित ग्लोबल फूड सिक्योरिटी समिट (GFSS) के उद्घाटन सत्र में पेश की गई इस रणनीति के तहत, अबू धाबी ने बुनियादी खाद्य वस्तुओं में अपनी आत्मनिर्भरता को मौजूदा 30 प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2040 तक 70 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है।
अबू धाबी कृषि एवं खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण (ADAFSA) के महानिदेशक तारिक अल अमेरी ने समिट में स्पष्ट किया कि अमीरात अब अलग-थलग पहलों से आगे बढ़कर कृषि और खाद्य सुरक्षा के लिए एक पूरी तरह से एकीकृत प्रणाली की ओर बढ़ रहा है।
5 स्तंभ और 13 कार्यक्रमों पर टिकी नई रूपरेखा
तारिक अल अमेरी के अनुसार, प्राधिकरण की यह नई रणनीति 5 प्रमुख स्तंभों और 13 कार्यक्रमों पर आधारित है:
-
उत्पादन और आत्मनिर्भरता: बुनियादी खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता को मजबूत करते हुए आत्मनिर्भरता को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 2040 तक 70 प्रतिशत पहुंचाना।
-
संसाधनों की बचत और जल प्रबंधन: कम संसाधनों में अधिक उत्पादन सुनिश्चित करना। इसके तहत पानी की वार्षिक खपत को 24,700 क्यूबिक मीटर प्रति हेक्टेयर से घटाकर 2040 तक 12,700 क्यूबिक मीटर प्रति हेक्टेयर पर लाया जाएगा।
-
ग्लोबल इंडेक्स में टॉप 5 का लक्ष्य: आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना। यूएई का लक्ष्य 2040 तक ग्लोबल फूड सिक्योरिटी इंडेक्स में मौजूदा 26वें स्थान से छलांग लगाकर दुनिया के शीर्ष 5 देशों में शामिल होना है।
-
आर्थिक योगदान में चार गुना इजाफा: उन्नत तकनीक के प्रयोग से कृषि उत्पादकता को बढ़ाना, जिससे अबू धाबी की अर्थव्यवस्था में इस सेक्टर का योगदान 9.5 अरब दिरहम से बढ़कर 2040 तक 34.6 अरब दिरहम हो जाए।
-
जमीनी क्रियान्वयन: अल अमेरी ने कहा कि रणनीति सिर्फ कागजों पर लिखी बातों से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाले ठोस बदलावों से सफल होती है।
वैश्विक खाद्य व्यापार में यूएई की भूमिका और 41.8 अरब डॉलर का कारोबार
समिट में मंत्रिस्तरीय संबोधन देते हुए यूएई के विदेश व्यापार मंत्री डॉ. थानी बिन अहमद अल ज़ायूदी ने कहा कि मौजूदा दौर में ट्रेड रूट्स में बदलाव, भू-राजनीतिक समीकरण और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव के बीच खाद्य प्रणालियों का लचीला होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा का भविष्य केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि खेत से लेकर फैक्ट्री, बंदरगाह से वितरक और दुकानों से लेकर टेबल तक एक-दूसरे से जुड़ी और टिकाऊ सप्लाई चेन तैयार करने पर निर्भर है।
डॉ. ज़ायूदी ने जानकारी दी कि एशिया, अफ्रीका और यूरोप के व्यापारिक मार्गों के केंद्र में स्थित होने के चलते यूएई वैश्विक खाद्य उद्योग का प्रमुख केंद्र बन चुका है। वर्ष 2025 में भोजन, कृषि और संबंधित उत्पादों में यूएई का कुल व्यापार 41.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
एग्री-टेक और नवाचार पर निवेश
यूएई सरकार वर्टिकल फार्मिंग, हाइड्रोपोनिक्स और प्रिसिजन फर्मेंटेशन जैसी आधुनिक एग्री-टेक तकनीकों में निवेश तेजी से बढ़ा रही है। मंत्री ने बताया कि अबू धाबी फूड हब में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित किया जा चुका है। उन्होंने निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी पर जोर देते हुए कहा कि सरकारी विजन और निजी क्षेत्र के नवाचार मिलकर ही इन तकनीकों को बड़े पैमाने पर लागू कर सकते हैं।
70 देशों के प्रतिनिधि और वैश्विक सहयोग
इस शिखर सम्मेलन का आयोजन यूएई के उपराष्ट्रपति, उप प्रधानमंत्री, प्रेसिडेंशियल कोर्ट के चेयरमैन और ADAFSA के निदेशक मंडल के अध्यक्ष शेख मंसूर बिन जायद अल नाहयान के संरक्षण में किया जा रहा है। ADNEC ग्रुप और ADAFSA की रणनीतिक साझेदारी में आयोजित इस सम्मेलन की थीम “ग्लोबल कोलैबोरेशन फॉर फूड सिक्योरिटी फॉर ऑल” रखी गई है।
उद्घाटन समारोह में शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान भी शामिल हुए। सम्मेलन में 70 देशों के प्रतिनिधि, 80 से अधिक वक्ता, 350 से अधिक सीईओ और 3,500 से अधिक प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इसके साथ ही ‘ग्लोबल फूड वीक’ प्रदर्शनी की भी औपचारिक शुरुआत हो गई है, जिसमें एआई, डिजिटल बुनियादी ढांचे, सप्लाई चेन और टिकाऊ जल प्रबंधन जैसे विषयों पर वैश्विक चर्चा जारी रहेगी।

