राष्ट्रपति चुनाव से पहले फ्रांस में बढ़ा विरोध, 70 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात

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साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

फ्रांस में सरकार के खिलाफ गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। शनिवार को लगातार चौथे सप्ताह हजारों लोगों ने देश भर में विरोध-प्रदर्शन किया। इसी दौरान राजधानी पेरिस में राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास ‘एलिसी पैलेस’ (Elysee Palace) के पास एक अनाधिकृत जमावड़े को पुलिस ने रोक दिया।

यह प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं, जब फ्रांस में अगले पांच महीनों के भीतर राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, इस माहौल में धुर-दक्षिणपंथी (far-right) विचारधारा के सत्ता में आने की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।

विरोध-प्रदर्शनों में दर्ज की गई गिरावट

अधिकारियों को शुरुआत में देश भर में लगभग 170,000 और अकेले पेरिस में 60,000 प्रदर्शनकारियों के जुटने की उम्मीद थी। हालांकि, एक अधिकारी ने एएफपी (AFP) को बताया कि गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार दोपहर तक पूरे देश में केवल 7,000 लोग ही सड़कों पर उतरे। पिछले सप्ताह की तुलना में यह संख्या काफी कम है, जो प्रदर्शनों में घटती भागीदारी का संकेत देती है।

ये प्रदर्शन गुरुवार को मजदूर यूनियनों द्वारा की गई हड़ताल और भारी विरोध-प्रदर्शनों के बाद हो रहे हैं। शिक्षक संघों ने भी चेतावनी दी है कि वे अगले हफ्ते बड़े स्तर पर हड़ताल करेंगे।

‘येलो वेस्ट’ आंदोलन और पुलिस की कार्रवाई

17 अक्टूबर को हुए बड़े प्रदर्शनों के हिंसक रूप लेने के बाद, शनिवार को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए करीब 70,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था। यूनियनों ने मध्य पेरिस के ‘प्लेस डे ला रिपब्लिक’ (Place de la Republique) से ‘प्लेस डे ला नेशन’ (Place de la Nation) तक एक मार्च निकाला।

वहीं, ‘येलो वेस्ट’ (Yellow Vests) आंदोलन—जिसने लगभग एक दशक पहले इमैनुएल मैक्रों के राष्ट्रपति काल के शुरुआती दिनों में सरकार को हिला दिया था—ने मध्य पेरिस के ‘प्लेस डे ला कॉनकॉर्ड’ (Place de la Concorde) पर एक समानांतर प्रदर्शन का आह्वान किया था। यह स्थान राष्ट्रपति भवन और संसद के निचले सदन के काफी करीब है।

अधिकारियों ने इस प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगा दिया था। पुलिस की भारी मौजूदगी ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। एएफपी के मुताबिक, मौके पर पहुंचे करीब 100 लोगों को पुलिस ने घेर लिया और आंदोलन के समन्वयक बेंजामिन बॉल (Benjamin Ball) व प्रवक्ता अजेल्मा सिगौक्स (Azelma Sigaux) को हिरासत में ले लिया।

दक्षिण-पूर्वी शहर ल्योन (Lyon) में भी पुलिस ने एक अनाधिकृत जमावड़े के दौरान सड़क जाम कर रहे सैकड़ों लोगों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज (Laurent Nunez) ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा, “खतरा बिल्कुल पिछले शनिवारों जैसा ही है, इसलिए हमें अपनी सतर्कता कम नहीं करनी चाहिए।”

छात्रों का गुस्सा और बढ़ता दबाव

इस ताजा विरोध-प्रदर्शन की शुरुआत सितंबर के अंत में हाई स्कूल के छात्रों ने की थी। वे अपने शिक्षण संस्थानों की स्थिति से नाराज थे। अब उनके साथ विश्वविद्यालय के छात्र भी जुड़ गए हैं और वे इस पूरे आंदोलन के केंद्र में बने हुए हैं।

छात्र संघ की प्रवक्ता सबाइन खारबच ने कहा, “आज की तारीख सरकार पर दबाव बनाए रखने में मदद करती है। कई युवा सड़कों पर हैं क्योंकि सरकार की प्रतिक्रिया असंतोषजनक रही है।”

वहीं, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ‘बर्बरता’ के आरोपों को लेकर पुलिस की भारी आलोचना हो रही है, जिसकी दर्जन भर आंतरिक जांच शुरू हो चुकी है। एएफपी ने भी अपने पत्रकारों के खिलाफ कथित पुलिस क्रूरता के मामलों के बाद शुक्रवार को सुरक्षा की मांग की है।

आर्थिक संकट और चुनावों की छाया

इन प्रदर्शनों का सीधा असर स्थानीय व्यवसायों पर भी पड़ रहा है। मुख्य प्रदर्शन मार्ग पर दुकान चलाने वाले जीन एमिल मौलिनियर ने कहा, “यह ऐसे ही नहीं चल सकता, वरना बहुत जल्द यह एक बड़ी आपदा बन जाएगा।” पेरिस और अन्य शहरों में दुकानदारों ने सुरक्षा के लिहाज से अपने स्टोर बंद रखे और खिड़कियों पर लकड़ी के शटर लगा दिए।

सरकार समाधान खोजने की कोशिश कर रही है, लेकिन फ्रांस के भारी कर्ज के बोझ ने बाजारों को डरा रखा है। प्रधानमंत्री सेबस्टियन लेकोर्नु (Sebastien Lecornu) सोमवार को यूनियनों और नियोक्ता महासंघ के प्रतिनिधियों के साथ वेतन और क्रय शक्ति (purchasing power) पर चर्चा करने वाले हैं।

इस बीच, चुनावी सर्वेक्षणों में 2027 के राष्ट्रपति चुनावों के लिए धुर-दक्षिणपंथी उम्मीदवार मरीन ले पेन (Marine Le Pen) सबसे आगे चल रही हैं। उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में मैक्रों के पूर्व मध्यमार्गी सहयोगी नहीं, बल्कि वामपंथी नेता जीन-ल्यूक मेलेनचॉन (Jean-Luc Melenchon) उभर रहे हैं, जो शनिवार को एक रैली को संबोधित करने वाले हैं।