‘इनाम देने से अपराध की जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी’, ईरान का तीखा हमला

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सैयद सरवर हुसैन - कंट्री हेड- ईरान
सैयद सरवर हुसैन – कंट्री हेड- ईरान

ईरान ने अमेरिका के विवादित ‘रिवार्ड्स फॉर जस्टिस’ (Rewards for Justice) कार्यक्रम की कड़ी निंदा की है। वियना स्थित संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी मिशन ने वाशिंगटन के इस कदम को सीधे तौर पर हत्याओं, आपराधिक कृत्यों और भविष्य में होने वाले किसी भी हमले के लिए ‘सहयोगियों की भर्ती’ करने का प्रयास करार दिया है।

शनिवार को ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक कड़ी टिप्पणी करते हुए ईरानी मिशन ने लिखा, “अमेरिका का यह नया तथाकथित ‘रिवार्ड फॉर जस्टिस’ असल में अपराधों के लिए सहयोगियों की भर्ती करने का एक खुला अभियान है।”

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर 20 मिलियन डॉलर के इनाम का ऐलान

यह तीखी प्रतिक्रिया वाशिंगटन द्वारा शनिवार को की गई एक बड़ी घोषणा के बाद आई है। अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों, उपकरणों, वैज्ञानिक कर्मियों और उनकी आवाजाही से जुड़ी जानकारी देने वाले को 20 मिलियन डॉलर (करीब 2 करोड़ डॉलर) तक का इनाम देने का ऐलान किया है।

हालांकि, इस नए इनाम की घोषणा ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के उन दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें उन्होंने बार-बार कहा था कि अमेरिकी हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी सुविधाओं को पूरी तरह से ‘नष्ट’ कर दिया है।

परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या और इजरायली हमलों का जिक्र

अपने बयान में ईरानी मिशन ने वाशिंगटन और इजरायल (Israel) के पुराने रिकॉर्ड की ओर इशारा किया। मिशन ने याद दिलाया कि कैसे अतीत में ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या की गई, ईरान की परमाणु सुविधाओं पर बार-बार तोड़फोड़ के प्रयास हुए और उन साइटों पर हवाई बमबारी की गई।

ईरानी मिशन ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “कोई भी देश, सरकारी संस्था, अंतरराष्ट्रीय संगठन (जिसमें IAEA भी शामिल है) या कोई गैर-सरकारी व्यक्ति जो इस तरह के जघन्य अपराधों को अंजाम देने के लिए जानकारी मुहैया कराता है, वह अंतरराष्ट्रीय कानूनी जिम्मेदारी के दायरे में आएगा।”

“इनाम आपको जवाबदेही से नहीं बचा सकता”

ईरानी मिशन ने स्पष्ट किया कि जो भी व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ऐसे “अत्याचारों” में जानबूझकर सहायता करेगा, उसे उन लोगों के साथ ही व्यक्तिगत रूप से आपराधिक रूप से उत्तरदायी ठहराया जा सकता है जो वास्तव में इन हमलों को अंजाम देते हैं।

बयान में कड़े शब्दों में कहा गया, “एक इनाम न तो मिलीभगत को मिटा सकता है और न ही इससे आपको कोई छूट मिल सकती है। जवाबदेही हर हाल में तय की जाएगी।”

अपने पोस्ट के अंत में ईरानी मिशन ने अमेरिकी-इजरायली आक्रामकता और आतंकवादी हमलों के दौरान जान गंवाने वाले देश के 18 शहीद वैज्ञानिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने एक ग्राफिक साझा करते हुए लिखा, “हमारे शहीद वैज्ञानिक ही हमारे गवाह हैं।”

2025 और 2026 के हमलों का बैकग्राउंड

ज्ञात हो कि जून 2025 में इजरायल ने ईरान पर एक बड़ा सैन्य हमला किया था, जिसमें परमाणु सुविधाओं, सैन्य प्रतिष्ठानों और शीर्ष कमांडरों को निशाना बनाया गया था। इसके कुछ दिन बाद, 21-22 जून की रात को अमेरिका ने भी मध्य ईरान के इस्फहान प्रांत में स्थित परमाणु सुविधाओं पर बमबारी की थी।

इसके जवाब में ईरान ने इजरायल पर ड्रोन और मिसाइल दागे और 23 जून को कतर स्थित अमेरिकी अल-उदीद (al-Udeid) एयरबेस को निशाना बनाया था। इसके बाद, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर एक और बड़ा सैन्य हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने भी क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली सैन्य प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचाया था।