पणजी में ‘हिंदुत्व मुर्दाबाद’ के नारे से बवाल, प्रमोद सावंत ने दिए जांच के आदेश

गोवा की राजधानी पणजी में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा 11 अक्टूबर को आयोजित किए गए एक विरोध प्रदर्शन ने अब बड़ा तूल पकड़ लिया है। इस प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर ‘हिंदुत्व मुर्दाबाद’ के नारे लगाए जाने का एक वीडियो वायरल होने के बाद, पणजी पुलिस ने लगभग 300 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है।
आरोप है कि इन नारों के जरिए हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाई गई और राज्य का सांप्रदायिक एवं धार्मिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश की गई है। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने भी इस मामले में सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर था प्रदर्शन
यह पूरा विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित किए गए प्रदर्शन से जुड़ा है। CJP के समर्थक और पदाधिकारी देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कथित गड़बड़ियों और वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के विरोध में पणजी में इकट्ठा हुए थे।
‘मुर्दाबाद, मुर्दाबाद, हिंदुत्व मुर्दाबाद’ के नारों का आरोप
पणजी पुलिस निरीक्षक विजयकुमार चोडनकर के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान CJP के समर्थकों ने कथित तौर पर ‘मुर्दाबाद, मुर्दाबाद, हिंदुत्व मुर्दाबाद’ जैसे भड़काऊ नारे लगाए।
पुलिस ने इस कृत्य को समाज में धार्मिक वैमनस्य फैलाने वाला मानते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की दो गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है:
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धारा 196: धार्मिक समूहों के बीच वैमनस्य और दुश्मनी को बढ़ावा देना।
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धारा 299: जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से किसी वर्ग या समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना।
तालेगांव निवासी की शिकायत पर हुई कार्रवाई
इस मामले में एफआईआर तालेगांव के निवासी रामप्रसाद केलकर की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। केलकर ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर 11 अक्टूबर के प्रदर्शन का एक वायरल वीडियो देखा था, जिसमें प्रदर्शनकारी हिंदुओं के खिलाफ नारे लगा रहे थे।
केलकर ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि आयोजकों ने इसे एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन बताया था, लेकिन इस वीडियो से यह साफ संकेत मिलता है कि उनका मुख्य उद्देश्य स्थानीय क्षेत्र में शांति और सद्भाव को बिगाड़ना था। शिकायतकर्ता ने यह भी जानकारी दी कि CJP की एक महिला संयोजक ने उत्तरी गोवा के कलेक्टर से प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, जिसे प्रशासन ने पहले ही खारिज कर दिया था।
बगैर अनुमति आजाद मैदान में घुसे थे प्रदर्शनकारी
गौरतलब है कि 11 अक्टूबर को जिला प्रशासन द्वारा अनुमति न दिए जाने के बावजूद, कुछ प्रदर्शनकारी पणजी के ऐतिहासिक आजाद मैदान में घुस गए थे। इसके बाद पुलिस ने 7 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया था। हालांकि, बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने देर शाम बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus) पर एक विशेष सुनवाई की, जिसके बाद उन सातों को रिहा कर दिया गया था।
CM प्रमोद सावंत की सख्त चेतावनी
इस पूरे घटनाक्रम पर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और गोवा सरकार राज्य का सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी। फिलहाल, पुलिस वीडियो की सत्यता और इसमें शामिल अज्ञात प्रदर्शनकारियों की पहचान करने में जुटी है।

