इंडोनेशिया के शेयर बाजार में भूचाल, एक दिन में 11.57% गिरा जकार्ता इंडेक्स

इंडोनेशिया के शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी बिकवाली के चलते ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। देश का प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक ‘जकार्ता कंपोजिट इंडेक्स’ (JCI) एक ही कारोबारी सत्र में 11.57 प्रतिशत तक लुढ़क गया। जनवरी 1998 के बाद यह किसी एक दिन में बाजार की सबसे बड़ी गिरावट है। चौतरफा बिकवाली के चलते बाजार में 30 मिनट के लिए ट्रेडिंग रोकनी पड़ी।
वैश्विक इंडेक्स प्रदाता MSCI द्वारा इंडोनेशिया के बाजार को लेकर दी गई कड़ी चेतावनी को इस भारी गिरावट का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
बैंकिंग शेयरों में 15% तक की बड़ी गिरावट
कारोबार की शुरुआत में ही बाजार करीब 8 प्रतिशत टूटकर खुला था। इसके बाद बिकवाली इतनी आक्रामक हुई कि सर्किट ब्रेकर लागू कर 30 मिनट के लिए कारोबार स्थगित करना पड़ा।
सबसे ज्यादा मार देश के प्रमुख बैंकिंग शेयरों पर पड़ी:
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बैंक सेंट्रल एशिया, बैंक राक्यत इंडोनेशिया और बैंक मंदिरी के शेयर लगभग 15-15 प्रतिशत तक धराशायी हो गए।
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इस साल अब तक इंडोनेशियाई शेयर बाजार में कुल मिलाकर करीब 40 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
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शेयर बाजार में मचे इस कोहराम का सीधा असर देश की मुद्रा पर भी दिखा। इंडोनेशियाई रुपिया (Rupiah) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 18,070 के निचले स्तर पर पहुंच गया।
क्यों घबराए निवेशक? MSCI की चेतावनी से बना दबाव
इस बिकवाली की मुख्य वजह वैश्विक स्तर पर सूचकांक तैयार करने वाली संस्था MSCI का वह प्रस्ताव है, जिसमें इंडोनेशिया के बाजार को ‘उभरते बाजार’ (Emerging Market) के दर्जे से हटाकर ‘स्टैंडअलोन मार्केट’ (Standalone Market) की श्रेणी में डालने की बात कही गई है।
MSCI ने इंडोनेशियाई शेयर बाजार में पारदर्शिता, कंपनियों के शेयरों के मालिकाना हक (Beneficial Ownership) के स्पष्ट खुलासे और ट्रेडिंग व्यवस्थाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इंडेक्स प्रदाता की मुख्य चिंता यह है कि बाजार में कंपनियों के वास्तविक शेयरधारक कौन हैं और शेयरों की खरीद-बिक्री किस व्यवस्था के तहत हो रही है, इसका डेटा पर्याप्त रूप से पारदर्शी और भरोसेमंद नहीं है।
यदि MSCI इंडोनेशिया का दर्जा घटाकर ‘स्टैंडअलोन’ करता है, तो वैश्विक इमर्जिंग मार्केट फंड्स और बड़े विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के लिए वहां से बड़े पैमाने पर पूंजी निकालना अनिवार्य हो जाएगा। इसी संभावित पूंजी निकासी की आशंका के चलते विदेशी और घरेलू निवेशकों ने एक साथ बिकवाली शुरू कर दी, जिससे बाजार में 1998 के एशियाई वित्तीय संकट जैसे हालात बन गए।

