लखनऊ में भारी बारिश के बाद पनपा डेंगू का ‘डंक’: अस्पतालों में 34 मरीज

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अजमल शाह
अजमल शाह

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कई दिनों तक हुई भारी बारिश और जलभराव के बाद अब डेंगू (Dengue) ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। बारिश थमने के बाद मौसम में आए बदलाव और जगह-जगह जमे पानी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिसका सीधा असर शहर के अस्पतालों में देखने को मिल रहा है।

लखनऊ के तमाम सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी (OPD) में बुखार और डेंगू के लक्षण वाले मरीजों की कतारें लंबी होने लगी हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, फिलहाल शहर के चार बड़े अस्पतालों में डेंगू के 34 मरीज भर्ती हैं, जिसने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

इन 4 बड़े अस्पतालों में मरीजों का आंकड़ा बढ़ा

बीते दिनों हुई बारिश और गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से राजधानी के कई कॉलोनियों में अभी भी जलभराव की स्थिति है। जमा पानी और नमी के चलते डेंगू फैलाने वाले मच्छर तेजी से पनप रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, लखनऊ के जिन चार प्रमुख अस्पतालों में सबसे ज्यादा 34 मरीज भर्ती हैं, उनमें राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), बलरामपुर अस्पताल और सिविल अस्पताल शामिल हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर बचाव के उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले 15 दिनों में डेंगू के मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हो सकता है।

शहर के पॉश इलाके भी डेंगू की चपेट में

डेंगू का असर सिर्फ निचले इलाकों तक सीमित नहीं है। लखनऊ के कई पॉश और रिहायशी इलाके भी इसकी चपेट में आ गए हैं। इनमें मुख्य रूप से आलमबाग, इंदिरा नगर, गोमती नगर, गोसाईगंज, चिनहट और उसके आसपास के इलाके शामिल हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवायजरी

डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे मच्छरों से बचाव के लिए जरूरी कदम उठाएं। विभाग ने एडवायजरी जारी करते हुए कहा है:

  • घरों के अंदर कूलर, खाली गमलों, और पुराने टायरों में पानी जमा न होने दें।

  • घर के आसपास और कॉलोनियों में जलभराव को रोकें।

  • रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें।

  • बच्चों को स्कूल भेजते समय पूरी बाजू के कपड़े ही पहनाएं।

स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता को सतर्क करते हुए कहा है कि तेज बुखार, सिरदर्द, जोड़ों में दर्द और उल्टी जैसे लक्षण दिखने पर घरेलू नुस्खे अपनाने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और डेंगू की जांच (NS1/Elisa) कराएं। सही समय पर इलाज मिलना मरीज की जान बचाने के लिए बेहद जरूरी है।