सपा अपना वो दौर भूल गई जब हर दिन दंगे होते थे: BJP का हमला

समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के निशाने पर हैं। महिला पत्रकारों की सुरक्षा, चुनाव आयोग पर सवाल उठाने और राममनोहर लोहिया की विरासत को लेकर यूपी सरकार के मंत्री और भाजपा नेताओं ने अखिलेश यादव पर चौतरफा हमला बोला है।
भाजपा ने सपा के ‘PDA’ (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को महज एक छलावा बताते हुए दावा किया है कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में जनता अखिलेश यादव को ‘तीसरी बार सबक सिखाएगी।’
‘महिला सुरक्षा पर बोलने का सपा को नैतिक अधिकार नहीं’
महिला पत्रकारों के सम्मान को लेकर अखिलेश यादव द्वारा दिए गए बयान पर यूपी सरकार के मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि महिलाओं और महिला पत्रकारों का सम्मान हर हाल में होना चाहिए और भाजपा हमेशा से यह करती आई है।
अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए डॉ. सक्सेना ने कहा, “समाजवादी पार्टी अपना वह दौर भूल गई है जब महिलाओं के साथ खुलेआम दरिंदगी होती थी और प्रदेश में हर दिन दंगे होते थे।”
वहीं, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने सपा मुखिया पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा को महिला सुरक्षा पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि सपा के शासनकाल में महिलाओं से दुर्व्यवहार करने वालों को हमेशा सरकारी संरक्षण मिला। उन्होंने कहा, “आज अखिलेश पत्रकारों के सम्मान की बात कर रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि वो अपनी हर प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों को अपमानित करते हैं।”
EVM पर सवाल उठाना सुविधानुसार राजनीति: BJP
चुनाव आयोग और ईवीएम (EVM) को लेकर अखिलेश यादव द्वारा लगातार उठाए जा रहे सवालों पर भी भाजपा ने पलटवार किया है। राकेश त्रिपाठी ने सपा पर सुविधानुसार राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा, “जब सपा को चुनाव में अच्छे परिणाम मिलते हैं, तब उसे चुनाव आयोग से कोई शिकायत नहीं होती। लेकिन जैसे ही नतीजे प्रतिकूल आते हैं, वे आयोग और EVM पर सवाल उठाने लगते हैं।”
त्रिपाठी ने नसीहत देते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए जनता का दिल जीतना जरूरी होता है, अपनी हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ना लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास है।
‘लोहिया परिवारवाद के विरोधी थे, सपा परिवार को समर्पित है’
भाजपा नेताओं ने समाजवादी पार्टी पर डॉ. राममनोहर लोहिया के सिद्धांतों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। राकेश त्रिपाठी ने कहा, “लोहिया जी रामायण मेलों की बात करते थे, जबकि आज के सपा नेताओं पर रामचरितमानस को फाड़ने और जलाने के आरोप लग रहे हैं। लोहिया परिवारवाद की राजनीति के घोर विरोधी थे, लेकिन समाजवादी पार्टी आज पूरी तरह से परिवारवाद को समर्पित हो चुकी है।”
भाजपा विधायक राजेश चौधरी ने कहा कि अखिलेश यादव और लोहिया के आदर्शों में कोई तालमेल ही नहीं है। उन्होंने कहा कि लोहिया सद्भावना और सामूहिकता की बात करते थे, जबकि अखिलेश यादव की राजनीति पूरे समाज को जातियों में विभाजित करने वाली है।
विधायक ने सपा के कोर वोट बैंक पर हमला बोलते हुए कहा, “PDA का नारा विभाजन का नारा है। अखिलेश यादव एक धर्म और एक जाति विशेष को ध्यान में रखकर राजनीति करते हैं और अपने स्वार्थ के लिए दूसरे समाजों में भी विघटन और विद्रोह पैदा करना चाहते हैं।”

