UAE ने बदला Suicide Law, प्रयास अपराध से बाहर किया; उकसाने पर जेल

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शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में आत्महत्या के प्रयास को अब आपराधिक कृत्य (Criminal Offence) नहीं माना जाएगा। यूएई सरकार ने देश के ‘क्राइम्स एंड पेनल्टीज लॉ’ (अपराध और दंड कानून) में अहम संशोधन करते हुए एक मानवीय दृष्टिकोण अपनाया है। गुरुवार, 8 अक्टूबर को संघीय डिक्री कानून (Federal Decree Law) के तहत घोषित इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य आपराधिक सजा के बजाय लोगों के मानसिक स्वास्थ्य समर्थन (Mental Health Support), रोकथाम और समय पर इलाज पर ध्यान केंद्रित करना है।

इन संशोधनों में आत्महत्या के लिए उकसाने या मदद करने वालों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया गया है, साथ ही हत्या के गंभीर मामलों में सजा के प्रावधानों को भी बदला गया है।

आत्महत्या का प्रयास अपराध की श्रेणी से बाहर

नए कानून का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आत्महत्या के प्रयास को अपराध की श्रेणी से बाहर (Decriminalisation) करना है। अब अपनी जान लेने की कोशिश करने वाले व्यक्तियों को आपराधिक दंड का सामना नहीं करना पड़ेगा।

संशोधित कानून के तहत ऐसे मामलों को अब आपराधिक मुकदमों के बजाय निवारक, चिकित्सीय और मानवीय नजरिए से देखा जाएगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से मनोवैज्ञानिक संकट से गुजर रहे लोगों में कानूनी कार्रवाई का डर कम होगा, जिससे वे समय रहते चिकित्सकीय और मानसिक सहायता लेने के लिए आगे आ सकेंगे।

उकसाने और मदद करने वालों के लिए सख्त सजा

भले ही आत्महत्या के प्रयास को अपराध की श्रेणी से हटा दिया गया हो, लेकिन कानून में उन लोगों के खिलाफ सख्त सजा तय की गई है जो किसी को आत्महत्या के लिए उकसाते हैं या इसमें सहायता करते हैं:

  • गंभीर चोट या विकलांगता: यदि कोई व्यक्ति उकसावे के बाद आत्महत्या का प्रयास करता है और 20 दिनों से अधिक समय तक स्थायी विकलांगता, बीमारी या दैनिक कार्य करने में असमर्थता का शिकार होता है, तो उकसाने वाले को 3 से 5 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है।

  • मौत होने पर: यदि उकसाने या सहायता करने के कारण पीड़ित की मौत हो जाती है, तो अपराधी को 5 से 7 साल तक की कैद की सजा का सामना करना पड़ेगा।

  • विदेशी नागरिकों का डिपोर्टेशन: आत्महत्या के लिए उकसाने या मदद करने के दोषी पाए गए किसी भी विदेशी नागरिक को देश से डिपोर्ट (निर्वासित) कर दिया जाएगा।

नाबालिगों और मानसिक रूप से कमजोर लोगों को विशेष सुरक्षा

नए कानून में बच्चों और मानसिक रूप से कमजोर (इच्छा या समझने की क्षमता की कमी) लोगों की सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं। यदि पीड़ित 18 वर्ष से कम उम्र का है या उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, तो उकसाने वाले कृत्य को बेहद गंभीर अपराध माना जाएगा। यदि मानसिक रूप से अक्षम व्यक्ति आत्महत्या करता है या प्रयास करता है, तो उकसाने वाले को जानबूझकर की गई हत्या (Intentional Murder) या हत्या के प्रयास के तहत सजा दी जाएगी।

माफी का भी है प्रावधान

कानून में जान बचाने वाले अपराधियों को राहत देने का भी प्रावधान है। यदि आत्महत्या के लिए उकसाने वाला व्यक्ति खुद बीच-बचाव करके पीड़ित की जान बचा लेता है, तो अदालत उसे सजा से छूट दे सकती है। हालांकि, यदि पीड़ित स्थायी रूप से विकलांग हो जाता है या 20 दिनों से ज्यादा बीमार रहता है, तो यह छूट लागू नहीं होगी।

हत्या के मामलों में ‘किसास’ (Qisas) कानून में संशोधन

एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव में गंभीर आपराधिक मामलों में ‘किसास’ (प्रतिशोध/Retribution) से संबंधित अनुच्छेद 384 के खंड 3 में संशोधन किया गया है। संशोधित प्रावधान के अनुसार, यदि हत्या के किसी मामले में पीड़ित के उत्तराधिकारी कानूनी कार्यवाही के किसी भी स्तर पर या सजा दिए जाने से पहले अपना ‘किसास’ (बदला लेने या मौत की सजा की मांग) का अधिकार छोड़ देते हैं (यानी माफ कर देते हैं), तो भी अपराधी को कम से कम 15 साल और अधिकतम 20 साल तक की जेल की सजा काटनी होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ित परिवार के माफ कर देने के बावजूद समाज की सुरक्षा और कानून का डर बना रहे।