Mastermind क्यों हुई फेल? कमजोर प्लॉटिंग और लॉजिक ने बिगाड़ा पूरा खेल

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साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

हांगकांग के सिनेमा में मर्डर मिस्ट्री और थ्रिलर फिल्मों का एक अलग मुकाम रहा है, लेकिन नवोदित राइटर-डायरेक्टर जेम्स हंग लिंग-चिंग (James Hung Ling-ching) की नई फिल्म ‘मास्टरमाइंड’ (Mastermind) इस जॉनर के फैंस को पूरी तरह से निराश करती है। फिल्म को समीक्षकों की ओर से 5 में से महज 1 स्टार (1/5 stars) दिया गया है। खराब प्लॉटिंग और कन्फ्यूजन से भरी यह फिल्म एक बेहतरीन ‘हूडनिट’ (whodunnit) बनने की कोशिश में एक ‘बिखरा हुआ मजाक’ बनकर रह जाती है।

क्या है फिल्म की कहानी?

कहानी एक काल्पनिक और कानूनविहीन शहर ‘एच सिटी’ (H City) में एक तूफानी रात के इर्द-गिर्द घूमती है। एक भ्रष्टाचार का गवाह अर्ल (Yeung Wai-lun) जान बचाने के लिए ईस्ट प्रीसिंक्ट पुलिस स्टेशन भागकर आता है। वहां उसकी मुलाकात एक थके हुए लेकिन ईमानदार कैप्टन मैक्सिमो (लुइस कू/Louis Koo) से होती है। लेकिन तभी मैक्सिमो बेहोश हो जाता है।

असली ड्रामा तब शुरू होता है जब एक घंटे बाद अर्ल का शव 10 किलोमीटर दूर पुलिस मुख्यालय के एक बंद रिकॉर्ड्स वॉल्ट (locked records vault) के अंदर गोलियों से छलनी मिलता है। यह शव मैक्सिमो का शिष्य सन्नी (सी शा/Ci Sha) ढूंढता है।

बंद कमरे की हत्या में लॉजिक की कमी

फिल्म में इस ‘लॉक्ड-रूम’ हत्या को जिस तरह से दिखाया गया है, वह फिजिक्स के नियमों को पूरी तरह से धता बताता है। भारी दरवाजे के नीचे से खून बिल्कुल एक सीधी रेखा में बहता हुआ दिखाया गया है। हैरानी की बात यह है कि हत्या में इस्तेमाल की गई गोली कैप्टन मैक्सिमो की पुरानी निशानी निकलती है। इसके बाद इंस्पेक्टर सी (साइमन यम/Simon Yam) मैक्सिमो को ही मुख्य संदिग्ध मान लेते हैं। लेकिन सबसे अजीब बात यह है कि मैक्सिमो को सुबह होने से पहले खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए क्राइम सीन पर जाने की पूरी छूट दे दी जाती है।

खराब डायरेक्शन और बेतुके ट्विस्ट

निर्देशक जेम्स हंग ने फिल्म में अनगिनत क्लू, बेतरतीब ट्विस्ट और ओवर-द-टॉप ड्रामा ठूंसने की कोशिश की है। एक सीन में इंटेलिजेंस चीफ प्रिंस (Tse Kwan-ho) रात के अजीब समय पर वॉल्ट से सबूत मांगने आता है, जो एक हास्यास्पद इत्तेफाक लगता है। इमोशनल टच देने के लिए मैक्सिमो के मृत बेटे की बैकस्टोरी भी जोड़ी गई है, लेकिन यह कहानी में कोई प्रभाव नहीं डालती।

क्लाइमेक्स में विलेन अपने खिलाफ सबूत छिपाने के लिए एक बड़ा धमाका कर देते हैं, जो उनके खुद के ‘क्लीन रिकॉर्ड’ रखने के मकसद के बिल्कुल खिलाफ है।

एक्शन सीन्स भी रहे बेअसर

फिल्म के फाइट और शूटआउट सीक्वेंस इतने खराब तरीके से एडिट किए गए हैं कि एक्शन कोरियोग्राफी समझ ही नहीं आती। ‘मास्टरमाइंड’ एक ऐसा खोखला ढांचा है, जो यह साबित करता है कि मर्डर मिस्ट्री के लिए सिर्फ स्क्रीन पर अंधेरा और खराब लाइटिंग कर देना ही काफी नहीं होता, बल्कि एक कसी हुई कहानी और लॉजिक की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।