हॉर्मुज पर ईरान के 7 दिन वाले प्लान का US ने दिया जवाब, अब क्या होगा?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और मौजूदा तनाव को कम करने की दिशा में एक अहम कूटनीतिक हलचल हुई है। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने रविवार को जानकारी दी कि अमेरिका ने उनके सात दिन वाले प्रस्ताव का जवाब दे दिया है। फिलहाल ईरान इस अमेरिकी प्रतिक्रिया की समीक्षा कर रहा है और इसके आधार पर ही आगे का कूटनीतिक या रणनीतिक कदम उठाया जाएगा।
UNGA में अब्बास अरागची ने रखा था प्रस्ताव
ग़रीबाबादी ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि मध्यस्थों के जरिए अमेरिका का जवाब तेहरान तक पहुंच गया है। यह मूल प्रस्ताव हाल ही में न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) के दौरान ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची द्वारा पेश किया गया था।
उप विदेश मंत्री ने कूटनीतिक प्रयासों पर अपडेट देते हुए कहा, “अमेरिकियों ने अपने विचार हम तक पहुंचा दिए हैं और देश के भीतर संबंधित रास्तों और चैनलों के माध्यम से इन विचारों का परीक्षण किया जा रहा है।”
क्या है ईरान का ‘7 डे प्रपोज़ल’?
ईरान ने अमेरिका के सामने एक शर्त रखी थी कि अगर वह ईरान पर लगे प्रतिबंधों और नाकेबंदी को हटा ले, साथ ही देश के रोके गए फंड को जारी कर दे, तो ईरान सात दिनों के भीतर हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल देगा।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य एक प्रमुख समुद्री मार्ग है जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है। ईरान द्वारा इस पर लगाए गए पारगमन (transit) प्रतिबंधों के कारण वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है।
जून का समझौता क्यों हुआ था फेल?
फरवरी के अंत में शुरू हुआ सैन्य तनाव अप्रैल के मध्य में युद्धविराम के साथ रुका था, लेकिन कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह से ठप पड़े थे। तनाव के कारण ही ईरान ने जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर प्रतिबंध लगाए थे।
इससे पहले जून में ईरान और अमेरिका के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे। इसमें अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील के बदले ईरानी व्यवस्था के तहत हॉर्मुज को धीरे-धीरे खोलने पर सहमति बनी थी। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने जलडमरूमध्य पर ईरान के नियंत्रण को कमजोर करने की कोशिश की, जिसके चलते यह समझौता टूट गया और गतिरोध फिर से बढ़ गया।
‘किसी भी हालात के लिए तैयार है ईरान’
अमेरिका के जवाब के बाद ईरान का अगला रुख क्या होगा, इस पर ग़रीबाबादी ने स्पष्ट किया कि प्रस्ताव पर आंतरिक विचार-विमर्श पूरा होने के बाद ही उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कूटनीतिक बातचीत के साथ-साथ देश किसी भी अन्य परिस्थिति से निपटने के लिए जरूरी तैयारियां कर रहा है, जिसमें संभावित ‘नए सिरे से होने वाले हमले या आक्रामकता’ का परिदृश्य भी शामिल है।

