सोमालिया क्यों कर रहा इजरायली बेस का विरोध और बरबेरा इतना अहम क्यों

हॉर्न ऑफ अफ्रीका के अहम देश सोमालिया ने इजरायल को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। सोमालिया के राष्ट्रपति हसन शेख महमूद ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनका देश ‘किसी भी परिस्थिति में’ अपने क्षेत्र में इजरायली उपस्थिति की अनुमति नहीं देगा। राष्ट्रपति की यह कड़ी प्रतिक्रिया उन दावों के बीच आई है, जिनमें कहा जा रहा है कि इजरायल सोमालिया के अलग हुए क्षेत्र ‘सोमालीलैंड’ (Somaliland) में अपनी सैन्य पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
बेरबेरा में नौसैनिक अड्डा और एयरपोर्ट पर इजरायल की नजर
राष्ट्रपति महमूद ने कहा कि इजरायल अदन की खाड़ी के तट पर स्थित सोमालीलैंड के बेरबेरा (Berbera) शहर में एक नौसैनिक अड्डा स्थापित करने की योजना बना रहा है। उन्होंने बताया कि सैन्य अड्डे के अलावा इजरायल इस तटीय शहर के एयरपोर्ट तक भी अपनी पहुंच बनाना चाहता है।
बता दें कि सोमालीलैंड उत्तर-पश्चिमी सोमालिया का एक स्वघोषित गणराज्य है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और सोमालिया की संघीय सरकार की नजर में यह सोमालिया का ही एक अभिन्न अंग है।
‘ग्रेटर इजरायल’ और अरब देशों को घेरने की रणनीति
सोमाली राष्ट्रपति ने इजरायल के इन कदमों के पीछे एक बड़ी रणनीतिक मंशा होने का दावा किया। उनके मुताबिक, इजरायल की असली कोशिश सोमालीलैंड के जरिए फारस की खाड़ी के अरब देशों और ईरान के करीब पहुंचने की है। महमूद ने कहा कि इजरायल के ये कदम ‘ग्रेटर इजरायल’ (Greater Israel) की तथाकथित परिकल्पना के दायरे में आते हैं।
‘ग्रेटर इजरायल’ का मुद्दा हाल के वर्षों में इजरायली राजनीतिक विमर्श में फिर से चर्चा में आया है। पिछले साल अगस्त में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मीडिया से कहा था कि वह इस ‘विजन’ से गहरा जुड़ाव महसूस करते हैं। नेतन्याहू ने फिलिस्तीनी क्षेत्रों के साथ-साथ मिस्र, जॉर्डन, सीरिया और लेबनान के कुछ हिस्सों को अपनी “ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मिशन” का हिस्सा बताया था, जिस पर क्षेत्रीय देशों ने कड़ी आपत्ति जताई थी।
सोमालीलैंड में 50 इजरायली सैनिकों की गुप्त तैनाती का दावा
राष्ट्रपति महमूद का यह बयान उन खुफिया रिपोर्ट्स के बाद सामने आया है, जिनमें इजरायली सैनिकों की गुप्त तैनाती का जिक्र किया गया था। ‘मिडिल ईस्ट आई’ न्यूज़ वेबसाइट की एक रिपोर्ट में सोमाली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया था कि 22 जून को इजरायल ने सोमालीलैंड में 50 सैनिकों की एक छोटी टुकड़ी गुप्त रूप से भेजी थी।
मान्यता का विरोध और वैश्विक प्रतिक्रिया
यह पूरा विवाद दिसंबर 2025 में इजरायल द्वारा उठाए गए एक कदम से गहराया। इजरायल ने सोमालिया के इस अलग हुए हिस्से ‘सोमालीलैंड’ को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दे दी थी।
सोमालिया की संघीय सरकार ने इजरायल के इस कदम को पूरी तरह गैरकानूनी बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया था। सरकार ने दोहराया था कि सोमालीलैंड सोमालिया के संप्रभु क्षेत्र का हिस्सा है। इजरायल के इस फैसले का कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और 15 मुस्लिम देशों ने भी कड़ा विरोध किया है, जिन्होंने चेतावनी दी थी कि इस तरह के कदमों से क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।

