Lajes Air Base विवाद: अमेरिका को बेस देने पर पुर्तगाल में जांच क्यों?

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अजमल शाह
अजमल शाह

पुर्तगाल के अभियोजकों (Prosecutors) ने ईरान पर हुए हालिया युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना द्वारा ‘लाजेस एयरबेस’ (Lajes airbase) के इस्तेमाल को लेकर एक औपचारिक जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई विपक्षी दलों की उस शिकायत के बाद की गई है, जिसमें केंद्र-दक्षिणपंथी सरकार पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। वामपंथी ‘लेफ्ट ब्लॉक’ (Left Bloc) के सांसदों ने सत्तारूढ़ पीएसडी (PSD) पार्टी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए एयरबेस के उपयोग की मंजूरी को अवैध ठहराया है।

क्या है पुर्तगाल और अमेरिका के बीच समझौता?

लाजेस एयरबेस पुर्तगाल की मुख्य भूमि से 1,600 किलोमीटर दूर अटलांटिक महासागर में अज़ोरेस (Azores) द्वीपसमूह के टेरेसिरा द्वीप पर स्थित है। लिस्बन और वाशिंगटन के बीच हुए एक पुराने समझौते के तहत, अमेरिकी सेना को शांति काल में बिना पूर्व अनुमति के इस एयरबेस का उपयोग करने का अधिकार है। हालांकि, युद्ध शुरू होने की स्थिति में अमेरिका को इसके इस्तेमाल के लिए लिस्बन से विशेष मंजूरी लेनी होती है।

पुर्तगाल सरकार ने किया बचाव

विपक्ष के इन आरोपों पर पुर्तगाल के विदेश मंत्री पाउलो रेंगल ने सरकार का बचाव किया है। रेंगल के मुताबिक, पुर्तगाल सीधे तौर पर इस युद्ध में शामिल नहीं था और अमेरिकी सेना को एयरबेस के इस्तेमाल की अनुमति देना पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में था।

उन्होंने कहा कि वाशिंगटन से इस स्पष्ट आश्वासन के बाद ही बेस के उपयोग की मंजूरी दी गई थी कि ईरान पर होने वाले अमेरिकी हमले रक्षात्मक, आवश्यक और आनुपातिक होंगे। रेंगल ने यह भी बताया कि दोनों देशों के समझौते में यह तय किया गया था कि लाजेस एयरबेस के जरिए ईरान पर होने वाले अमेरिकी हमले केवल सैन्य ठिकानों तक ही सीमित रहेंगे।

40 दिन का युद्ध और यूरोप की भूमिका

बीते साल (मार्च 2025 से मार्च 2026 के बीच) ईरान को अमेरिका और इजरायल की ओर से दो सैन्य अभियानों का सामना करना पड़ा। इसमें पहला 12 दिवसीय युद्ध जून 2025 में हुआ था। दूसरा बड़ा अभियान 28 फरवरी को शुरू होकर करीब 40 दिनों तक चला और अप्रैल में युद्धविराम के साथ समाप्त हुआ।

इस युद्ध में यूरोप की भूमिका को लेकर नाटो (NATO) महासचिव मार्क रुटे ने भी अहम जानकारी दी थी। रुटे ने स्वीकार किया था कि 40 दिनों के इस युद्ध के दौरान यूरोप के विभिन्न बेसों से 4,000 से 5,000 अमेरिकी सैन्य उड़ानों का संचालन हुआ। उन्होंने यूरोप को अमेरिका के लिए “शक्ति प्रक्षेपण का मंच” (platform of power projection) करार दिया था। इन सैन्य अभियानों में इटली, रोमानिया, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के बेस, एयरस्पेस और लॉजिस्टिक्स का इस्तेमाल हुआ था।

ईरान का रुख और युद्ध में हुआ नुकसान

ईरान लगातार अन्य देशों को चेतावनी देता रहा है कि वे अमेरिकी बलों को अपने सैन्य बेस या सुविधाओं का इस्तेमाल न करने दें। ईरानी सशस्त्र बलों ने इन दोनों युद्धों के दौरान जवाबी सैन्य हमले भी किए थे।

ईरानी स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, दूसरे दौर के युद्ध में सैकड़ों महिलाओं और बच्चों सहित 3,500 से अधिक लोग मारे गए। इससे पहले जून 2025 के अभियान में 1,000 से अधिक लोगों की जान गई थी। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई, कई वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और परमाणु वैज्ञानिकों की जान गई। युद्ध के कारण देश के कई हिस्सों में नागरिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा।