राजवीर गुर्जर की कहानी: हाथ नहीं, हौसले ने लिखी RAS की सफलता

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Prabhash Bahadur Civil Services Mentor
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“शारीरिक अक्षमता को मन पर हावी नहीं होने देना चाहिए… यदि इरादे पक्के हों तो इंसान कुछ भी कर सकता है।” राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की आरएएस (RAS) भर्ती परीक्षा 2024 में सफलता हासिल करने वाले राजवीर गुर्जर के यह शब्द उन तमाम युवाओं के लिए एक मिसाल हैं, जो जिंदगी की मुश्किलों के आगे घुटने टेक देते हैं।

बचपन में एक दर्दनाक हादसे में अपने दोनों हाथों की हथेलियां गंवा चुके दौसा (Dausa) जिले के राजवीर गुर्जर ने न केवल आरएएस परीक्षा पास की है, बल्कि उन्हें अब राजस्थान तहसीलदार सेवा (Rajasthan Tehsildar Service) आवंटित हो गई है।

बचपन का वो खौफनाक हादसा और जिंदगी की नई शुरुआत

राजवीर दौसा जिले के छोटे से गांव सलेमपुर के रहने वाले हैं। उनके पिता विक्रम सिंह पुलिस विभाग में हेड कांस्टेबल हैं। एनडीटीवी (NDTV) से बातचीत में राजवीर ने उस भयानक हादसे को याद किया जिसने उनके हाथ छीन लिए।

उन्होंने बताया कि जब वह करीब 10 साल के थे, तब उन्हें घर के सामने सड़क पर एक खिलौना पड़ा हुआ मिला। बच्चा समझकर वह उसे खेलने के लिए घर ले आए। राजवीर को आज भी याद नहीं कि उस खिलौने में क्या था, लेकिन जैसे ही उन्होंने उसे चलाने की कोशिश की, उसमें एक तेज धमाका हो गया। इस विस्फोट में राजवीर ने अपने दोनों हाथों की हथेलियां हमेशा के लिए खो दीं।

बिना हथेलियों के दोनों हाथों से पकड़ते हैं पेन

हाथ की हथेलियां कटने के बाद भी राजवीर ने जीवन से हार नहीं मानी। उन्होंने अपने बचे हुए हाथों की सहायता से ही सारे काम करने शुरू कर दिए। राजवीर ने अपने दोनों हाथों को मिलाकर पेन पकड़ने और लिखने का निरंतर अभ्यास किया। इसी अदम्य इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने अपनी स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई पूरी की, और अंततः आरएएस परीक्षा (RAS Exam) भी लिखकर उत्तीर्ण की। इस परीक्षा में राजवीर को दिव्यांग श्रेणी में चौथी (4th) रैंक प्राप्त हुई है।

पिता पुलिस विभाग में हैं, अधिकारी बनने का था सपना

राजवीर ने बताया कि उनके पिता एक आरपीएस (RPS) अधिकारी की सरकारी गाड़ी के चालक हैं। बचपन में वह अक्सर अधिकारियों को देखते थे और सोचते थे कि एक दिन वह भी पुलिस अधिकारी बनेंगे। हालांकि, दिव्यांगता के कारण वह आरपीएस सेवा (पुलिस) में नहीं जा सकते थे, लेकिन उन्होंने मन में ठान लिया था कि किसी न किसी प्रशासनिक सेवा में अधिकारी जरूर बनेंगे।

हिंदी और राजनीति विज्ञान (Political Science) में परास्नातक (Post Graduation) की पढ़ाई कर चुके राजवीर के लिए यह सफर आसान नहीं था।

  • आरएएस भर्ती में यह उनका दूसरा प्रयास था।

  • पहले प्रयास में असफलता मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

  • उन्होंने किसी भी कोचिंग का सहारा नहीं लिया और पूरी तरह सेल्फ स्टडी (Self Study) पर भरोसा करते हुए यह मुकाम हासिल किया।

राजवीर की इस सफलता से उनके पूरे परिवार में जश्न का माहौल है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले राजवीर कहते हैं कि वह अपने आसपास के लोगों की समस्याओं को समझते हैं और पूरी ईमानदारी से काम करेंगे। उनका सपना है कि वह अपने जैसे दिव्यांग और मेहनती बच्चों की हर संभव सहायता कर सकें, ताकि वे भी अपने सपनों की उड़ान भर सकें।