गोरखपुर में सपा नेताओं की हाथापाई, अखिलेश ने भंग की पूरी यूनिट, देखें चिट्ठी

गोरखपुर प्रेस क्लब में शनिवार को समाजवादी पार्टी (सपा) की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस अखाड़े में तब्दील हो गई। बैठने की व्यवस्था को लेकर पार्टी नेताओं के बीच हुई हाथापाई और हंगामे के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सख्त कदम उठाया है। अखिलेश यादव ने अनुशासनहीनता पर कार्रवाई करते हुए गोरखपुर की पूरी जिला और महानगर कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है।
कुर्सी को लेकर शुरू हुई तनातनी
गोरखपुर में सपा जिलाध्यक्ष बृजेश गौतम ने 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक चलने वाले पार्टी के ‘लोकतंत्र बचाओ सप्ताह’ अभियान की जानकारी देने के लिए शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी। दोपहर करीब तीन बजे 2027 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर ग्रामीण सीट से टिकट की दावेदारी कर रहे सपा नेता अंशुमान सिंह अपने समर्थकों के साथ प्रेस क्लब पहुंचे।
सभागार पहले से खचाखच भरा हुआ था। अंशुमान और उनके समर्थकों ने बैठने के लिए जगह मांगी। इसी बात को लेकर अंशुमान सिंह और पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी के समर्थकों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो चंद मिनटों में ही हाथापाई में बदल गई।

पूर्व जिलाध्यक्ष को थप्पड़ और अवैध हथियार का आरोप
हंगामे के दौरान आरोप है कि अंशुमान सिंह के बेटे कमलेश सिंह ने पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी को थप्पड़ जड़ दिया। साहनी ने अंशुमान के समर्थकों पर बदसलूकी, मारपीट और डराने-धमकाने का सीधा आरोप लगाया है। साहनी ने यह भी दावा किया कि कार्यक्रम स्थल पर कुछ लोग अवैध हथियार लेकर अंदर आए थे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद वरिष्ठ नेताओं और पार्टी पदाधिकारियों ने किसी तरह बीच-बचाव कर दोनों गुटों को अलग किया। इस मारपीट और विवाद का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आ गया।
अंशुमान सिंह ने बताया साजिश
इस पूरे घटनाक्रम पर अंशुमान सिंह ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने दावा किया कि इस विवाद का इस्तेमाल उनकी छवि खराब करने के लिए किया जा रहा है। अंशुमान ने आरोप लगाया कि पार्टी में मौजूद उनके राजनीतिक विरोधी बेवजह विवाद खड़ा करने और उन्हें फंसाने की कोशिश कर रहे हैं।
सभी विंग और फ्रंटल संगठन के पदाधिकारी पदमुक्त
प्रेस क्लब में हुई इस घटना की गूंज लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय तक पहुंची, जिसके बाद पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कड़ा रुख अपनाया। आलाकमान के निर्देश पर गोरखपुर के जिला अध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष को उनके पदों से हटा दिया गया है। मुख्य कार्यकारिणी के साथ-साथ पार्टी की सभी विंग और फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारियों को भी पदमुक्त कर दिया गया है।

