इंदौर वोटर लिस्ट: 2022 के डिलीटेड नामों का डिजिटल रिकॉर्ड कहां है?

मतदाता सूची (Voter List) से नाम हटाए जाने को लेकर आजकल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर जिले से एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां एक आरटीआई (RTI) में खुलासा हुआ है कि साल 2022 में जिले से 1.36 लाख से अधिक वोटरों के नाम काट दिए गए, लेकिन जब इन फैसलों का डिजिटल रिकॉर्ड (Digital Record) मांगा गया, तो निर्वाचन दफ्तरों ने जवाब दिया कि ऐसा कोई रिकॉर्ड रखा ही नहीं गया है। अब यह पूरा मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (MP High Court) की चौखट तक पहुंच गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 5 जनवरी 2022 से लेकर 15 अक्टूबर 2022 के बीच का है।
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इस अवधि के दौरान इंदौर जिले की मतदाता सूची से कुल 1,36,552 वोटरों के नाम हटाए गए थे।
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इंदौर के एक पूर्व पार्षद दिलीप कौशल ने 23 मई 2025 को एक आरटीआई लगाकर गरुड़ ऐप (Garuda App) और ईआरओ नेट (ERO Net) पर की गई सभी एंट्रियों और डिजिटल रिकॉर्ड का ब्योरा मांगा था।
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उन्होंने इस प्रक्रिया में शामिल प्राइवेट कंपनियों के अनुबंध और डेटा बैकअप की जानकारी भी मांगी थी।
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27 मई 2025 को यह आवेदन अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के अधिकारियों को भेजा गया, जिनके जवाब जून महीने में आने शुरू हुए।
‘डिजिटल रिकॉर्ड नहीं रखा गया’— दफ्तरों का रटा-रटाया जवाब
जब विधानसभा क्षेत्रों के दफ्तरों से जवाब आए, तो वे हैरान करने वाले थे।
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देपालपुर निर्वाचन कार्यालय ने साफ कह दिया कि उनकी तरफ से ईआरओ नेट या बीएलओ के गरुड़ ऐप से संबंधित कोई डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करके नहीं रखा गया है।
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इंदौर-2, इंदौर-5, राऊ और सांवेर विधानसभा क्षेत्रों के दफ्तरों से भी लगभग यही रटा-रटाया जवाब मिला।
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इंदौर-1 और इंदौर-3 कार्यालयों ने दलील दी कि उस समय भारत निर्वाचन आयोग की तरफ से ऐसे निर्देश नहीं थे, इसलिए वीडियो, डीवीडी या पेन ड्राइव के रूप में डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित नहीं रखा गया।
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इंदौर-4 कार्यालय ने कहा कि वोटरों के नाम हटाना रोजमर्रा के काम का हिस्सा है, लेकिन उनके यहां भी डिजिटल रिकॉर्ड बचाकर नहीं रखा गया है। डेटा बैकअप और अनुबंध के सवाल पर उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए जिम्मेदारी जिला निर्वाचन कार्यालय पर डाल दी।
सिर्फ तीन सीटों से कट गए 57% नाम
आरटीआई के सरकारी जवाबों में मिले आंकड़े इस मामले को और गंभीर बनाते हैं। पूरे जिले में कटे कुल नामों में से लगभग 57% नाम सिर्फ तीन विधानसभा सीटों से हटा दिए गए थे।
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इंदौर-4: 28,391 नाम कटे
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इंदौर-5: 28,091 नाम कटे
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राऊ: 21,346 नाम कटे इसके अलावा इंदौर-2 में 19,983, इंदौर-1 में 12,102, इंदौर-3 में 8,107, सांवेर में 8,531 और देपालपुर में 2,214 वोटरों के नाम काटे गए थे। आठों विधानसभा क्षेत्रों का कुल जोड़ 1,28,765 तक पहुंच जाता है।
हाईकोर्ट का सख्त रुख: 45 दिन में फैसला करने का निर्देश
राज्य सूचना आयोग में 30 जनवरी 2026 से अटकी दूसरी अपील पर सुनवाई न होने के बाद पूर्व पार्षद दिलीप कौशल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट के जस्टिस संदीप एन. भट्ट ने 17 सितंबर 2026 को सख्त निर्देश देते हुए राज्य सूचना आयोग को 45 दिनों के भीतर इस अपील पर कानून और दस्तावेजों के आधार पर फैसला करने को कहा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो भी फैसला हो, उसकी सूचना सीधे आवेदक को दी जाए। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस मामले के गुण-दोष पर अपनी कोई निजी राय जाहिर नहीं की है।
चुनाव आयोग तक पहुंची शिकायत
इंदौर के दफ्तरों से कोई पुख्ता जवाब न मिलने के बाद दिलीप कौशल ने 31 जुलाई 2025 को देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्तों और मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को औपचारिक शिकायत भेज दी थी। अपनी शिकायत में उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पूरे मध्य प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों पर भी मतदाता सूची से नाम हटाने में इसी तरह नियमों की अनदेखी की गई है?
साल 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने भारी जीत दर्ज की थी, और इंदौर जिले की सभी नौ सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार जीते थे। अब दिलीप कौशल की कोशिश उन दस्तावेजों को हासिल करने की है, जो यह साफ कर सकें कि आखिर किस तकनीकी आधार पर 2022 में सवा लाख से ज्यादा वोटरों के नाम हटाए गए थे।

