1 करोड़ दान और देहदान का संकल्प, जस्टिस अवनींद्र सिंह ने पेश की मिसाल

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संजीव पॉल
संजीव पॉल

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने अपने न्यायिक करियर के समापन पर समाज के लिए एक बड़ी नजीर पेश की है। 17 सितंबर को अपने विदाई समारोह में जस्टिस सिंह ने ऐलान किया कि वह अपने जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) से मिलने वाली पूरी राशि प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपात स्थिति राहत कोष (PM CARES Fund) में दान करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मरणोपरांत देहदान का भी संकल्प लिया है।

राष्ट्र निर्माण के लिए GPF का समर्पण

जस्टिस सिंह ने अपने फेयरवेल संबोधन में स्पष्ट किया कि जैसे ही उन्हें GPF की राशि प्राप्त होगी, वह उसे राष्ट्र निर्माण के काम के लिए सीधे PM केयर्स फंड में ट्रांसफर कर देंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उनके GPF की यह अनुमानित रकम करीब 1.01 करोड़ से 1.1 करोड़ रुपये के बीच है।

अपने फैसले को लेकर उन्होंने कहा कि उनके लिए समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। उनका मानना है कि समाज और मानवता की सेवा के लिए व्यक्ति को अपने स्तर पर ठोस योगदान भी देना चाहिए।

पत्नी के सुझाव पर मेडिकल रिसर्च के लिए देहदान

आर्थिक योगदान के अलावा रिटायरमेंट से ठीक दो दिन पहले जस्टिस सिंह और उनकी पत्नी इंदिरा सिंह ने एक मेडिकल कॉलेज के माध्यम से मरणोपरांत देहदान की प्रक्रिया पूरी कर ली है। यह शरीर भविष्य में मेडिकल के छात्रों की शिक्षा और वैज्ञानिक कार्यों के काम आएगा। जस्टिस सिंह ने कार्यक्रम में बताया कि अपनी जीवन भर की जमा पूंजी और शरीर दान करने का यह विचार मुख्य रूप से उनकी पत्नी ने ही सुझाया था।

‘रिटायरमेंट कोई अंत नहीं, एक नई शुरुआत’

विदाई समारोह में भावुक होते हुए जस्टिस सिंह ने कहा कि सेवानिवृत्ति उनके जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत है। वह भविष्य में किसी अन्य मंच के जरिए समाज के लिए काम करना जारी रखेंगे।

उन्होंने अपने बचपन के संघर्षों को याद करते हुए बताया कि कम उम्र में ही मां का साया सिर से उठ गया था, जिसके बाद उनकी मौसी ने उन्हें अपने बेटे की तरह पाला। अपनी मौसी की सीख का जिक्र करते हुए उन्होंने युवा पीढ़ी को संदेश दिया कि जीवन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। बिना कड़ी मेहनत और ईमानदार प्रयास के मिली कोई भी सफलता लंबे समय तक नहीं टिकती।

1990 से 2026: 36 साल का लंबा न्यायिक करियर

जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह का न्यायिक सफर 31 मई 1990 को सिविल जज (क्लास-II) के तौर पर शुरू हुआ था। अपने करीब 36 वर्षों के करियर में उन्होंने मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में अहम जिम्मेदारियां निभाईं।

साल 2018 में वह छतरपुर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश बने। इसके बाद 2022 में उन्हें धार में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर नियुक्त किया गया। 1 मई 2023 को उन्होंने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। 17 सितंबर 2026 को हाई कोर्ट जज के रूप में उनका कार्यकाल पूरा हो गया।