बेटी की नौकरी से 400 पदों के पेपर लीक तक, कौन हैं KPSC के साहूकार?

कर्नाटक की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में इन दिनों कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के निलंबित चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस. साहूकार (Shivashankarappa S. Sahukar) का मामला गरमाया हुआ है। राजनीतिक संरक्षण, भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग की यह कहानी बेहद चौंकाने वाली है। जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शनों और राज्य कैबिनेट की सिफारिश के बाद, कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 25 अगस्त को साहूकार को उनके पद से सस्पेंड कर दिया है।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साहूकार का 7 साल का KPSC कार्यकाल विवादों और गंभीर अनियमितताओं से भरा रहा है। सबसे खास बात यह है कि इन अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद उन्हें राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस (Congress), दोनों ही सरकारों से भरपूर राजनीतिक संरक्षण मिला।
साहूकार पर लगे दो सबसे बड़े आरोप
साहूकार के निलंबन के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े खुलासे हैं, जो उनके कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार के ‘पैटर्न’ को उजागर करते हैं:
-
बेटी को गलत तरीके से नौकरी: साहूकार पर आरोप है कि उन्होंने राज्य के उद्योग और वाणिज्य विभाग में अपनी बेटी को नौकरी दिलाने के लिए कथित तौर पर अपनी आय कम दिखाकर दस्तावेजों और फॉर्म में हेरफेर की।
-
400 पदों के लिए पेपर लीक: दूसरा गंभीर आरोप पशु चिकित्सक (Veterinarian) के 400 पदों पर होने वाली भर्ती से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ खास उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने के लिए परीक्षा का पेपर लीक किया गया।
कौन हैं साहूकार और कैसे हुई उनकी विवादित नियुक्ति?
एक बिना लाइसेंस के पैसे उधार देने वाले (मनी लेंडर) व्यक्ति को राज्य की सबसे प्रतिष्ठित भर्ती संस्था का प्रमुख कैसे बना दिया गया, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है।
-
KPSC रिकॉर्ड्स के अनुसार, साहूकार ने 1988 में रायचूर से एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग की डिग्री ली थी।
-
कुछ वर्षों तक सुपरवाइजर के रूप में काम करने के बाद, उन्होंने 1996 में ‘नेशनल कोऑपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया’ (NCUI) में कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरी की।
-
मार्च 2010 में NCUI ने असंतोषजनक काम और समय की पाबंदी न होने का हवाला देकर उनका कॉन्ट्रैक्ट आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया था।
-
इसके बावजूद, 2019 में जब बीएस येदियुरप्पा (BS Yediyurappa) मुख्यमंत्री बने, तो मात्र 36 दिन बाद साहूकार को KPSC में ‘सरकारी’ श्रेणी के तहत नियुक्त कर दिया गया। बाद में आपत्तियों के कारण उन्हें ‘गैर-सरकारी’ श्रेणी में डाल दिया गया और 2021 में उन्हें चेयरमैन बना दिया गया।
कांग्रेस राज में IAS अधिकारी से हुआ टकराव
मई 2023 में जब राज्य में कांग्रेस की सरकार लौटी और सिद्धारमैया (Siddaramaiah) मुख्यमंत्री बने, तब तक साहूकार का KPSC के सेक्रेटरी और तेज-तर्रार IAS अधिकारी विकास सुरलकर के साथ खुला टकराव शुरू हो चुका था।
-
विकास सुरलकर ने KPSC में पारदर्शिता लाने के लिए सोशल मीडिया अकाउंट्स बनाए और वेबसाइट पर भर्तियों की विस्तृत जानकारी देना शुरू किया।
-
इससे खफा होकर साहूकार ने फाइलों को मंजूरी देने में देरी शुरू कर दी और मीटिंग्स में सेक्रेटरी को दरकिनार करने लगे।
-
विवाद इतना बढ़ा कि साहूकार ने नए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से सुरलकर की शिकायत कर दी।
हालांकि, KPSC के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कई बार सिस्टम की कमियों और भ्रष्टाचार की ओर ध्यान दिलाने के बाद आखिरकार मामला तूल पकड़ गया। अब राज्यपाल की ओर से की गई इस बड़ी कार्रवाई ने कर्नाटक के इस बहुचर्चित ‘साहूकार कांड’ को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है।
